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लॉकडाउन के बीच कॉरपोरेट आय वृद्घि पर सतर्क हैं विश्लेषक

Last Updated- December 12, 2022 | 4:37 AM IST

कोविड संक्रमण की दूसरी लहर के बीच विश्लेषक अब सतर्कता बढ़ा रहे हैं और उन्होंने वित्त वर्ष 2022 के लिए कॉरपोरेट आय वृद्घि के लिए अपने अनुमानों को घटाना शुरू कर दिया है। कोविड-19 से लॉकडाउन को बढ़ावा मिला है और इससे देश के कई प्रमुख शहरों में आवाजाही सीमित हुई है।
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा लॉकडाउन अब तक काफी हद तक क्षेत्रीय और कम सख्त है, और इसलिए आर्थिक गतिविधि पर इसका कम प्रभाव पड़ा है, लेकिन यदि संक्रमण की रफ्तार नियंत्रित नहीं हुई तो लॉकडाउन लंबे समय तक बना रह सकता है और इससे आय सुधार की प्रक्रिया पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि हालांकि जब यह सख्ती धीरे धीरे कम होने लगेगी तो भारतीय उद्योग जगत की स्थिति में सुधार आना शुरू हो जाएगा।
श्वेता पटोदिया और कौस्तुभ चौबल के साथ मिलकर लिखी गई रिपोर्ट में मूडीज के सहायक प्रबंध निदेशक विकास हेलेन ने कहा है, ‘जून तिमाही में आवासीय और कार बिक्री में तिमाही आधार पर गिरावट आएगी, लेकिन संक्रमण घटने पर हालात में सुधार आ सकता है। आवाजाही में कमी से परिवहन-केंद्रित मांग कमजोर होगी और रिफाइनरों का क्षमता इस्तेमाल भी घटेगा। वैश्विक मांग भारतीय इस्पात निर्माताओं को अपना घरेलू अधिशेष निर्यात करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। निर्माण गतिविधि में सुस्ती से सीमेंट की खपत घटेगी और वित्त वर्ष 2022 में वृद्घि पूर्व के 10-12 प्रतिशत बढ़ोतरी के अनुमानों के मुकाबले कमजोर रह सकती है।’
जेफरीज के विश्लेषकों के अनुसार, कोविड की पहली लहर के दौरान, वित्त वर्ष 2021 और वित्त वर्ष 2022 के निफ्टी आय अनुमानों में सितंबर 2020 तक 33 और 21 प्रतिशत तक की कमी की गई थी। तिमाही आधार पर, इसमें 13 प्रतिशत/9 प्रतिशत तक सुधार किया गया था और शुद्घ प्रभाव -24 प्रतिशत/-14 प्रतिशत था।
जेफरीज के प्रबंध निदेशक महेश नंदुरकर ने अभिनव सिन्हा के साथ तैयार की गई रिपोर्ट में लिखा है, ‘हमारा मानना है कि इस बार प्रभाव पहली लहर के करीब  30 प्रतिशत के बराबर होगा और इसलिए आय अनुमानों में कटौती निफ्टी के स्तर पर 5-7 प्रतिशत हो सकती है। रिटेल, ऑटो और अन्य  कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी, वित्त, उद्योग, रियल्टी और स्टैपल्स आय कटौती को बढ़ावा देंगे। वैश्विक रुझानों पर केंद्रित क्षेत्रों आईटी सेवा, दवा, धातु और ऑटो एंसिलियरी में आय कटौती नहीं देखी जा सकती है।’
रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि क्षेत्रों के संदर्भ में बात की जाए तो पता चलता है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिम बंगाल का 25 अप्रैल के बाद से दैनिक संक्रमण में करीब 64 प्रतिशत का योगदान है। मूडीज के अनुसार, इन राज्यों का मार्च 2020 तक पिछले चार वित्त वर्षों के दौरान भारत की जीडीपी में करीब 60 प्रतिशत का योगदान रहा है।
इन सब बातों को देखते हुए, मूडीज, नोमुरा, क्रिसिल, क्वांटइको रिसर्च एवं केयर रेटिंग्स समेत प्रमुख ब्रोकरों और रेटिंग एजेंसियों ने भारत के वित्त वर्ष 2020 के जीडीपी वृद्घि अनुमानों में 32 प्रतिशत तक की कटौती की है।
क्वांटइको रिसर्च के विश्लेषकों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में वृद्घि पर दबाव का कारण मांग पर प्रभाव होगा। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों का भी मानना है कि दूसरी कोविड लहर की शुरुआत ने धारणा को पहले ही प्रभावित कर दियाह ै और वित्त वर्ष 2022 की आय संभावना को अस्पष्ट बना दिया है।

First Published - May 20, 2021 | 9:12 PM IST

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