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एयर इंडिया प्रीमियम पर करेगी बॉन्ड का पूर्व भुगतान

Last Updated- December 11, 2022 | 9:52 PM IST

एयर इंडिया के डिबेंचर के निवेशकों ने विमान कंपनी को पिछले साल नवंबर में कंपनी द्वारा बॉन्ड का समतुल्य स्तर पर पूर्व भुगतान करने के लिए जताई सहमति के बजाय प्रीमियम पर बॉन्ड का पूर्व भुगतान करने के लिए कहा है। प्रीमियम पर बॉन्ड का पूर्व भुगतान करने से भारत सरकार पर अतिरिक्त लागत आएगी, जो विमान कंपनी की निजीकरण योजना के तहत एयर इंडिया के कर्ज का पूर्व भुगतान कर रही थी।
पिछले साल नवंबर में विमान कंपनी ने इस बात की घोषणा की थी कि वह निवेशकों के 12,900 करोड़ रुपये (7,400 करोड़ रुपये और 5,500 करोड़ रुपये की दो शृंखलाओं वाले) के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) का पूर्व भुगतान करेगी। हालांकि निवेशकों ने अतिरिक्त पूर्व भुगतान शुल्क की मांग की है, क्योंकि उन्हें शेष अवधि के लिए डिबेंचर पर ब्याज गंवाना होगा। एनसीडी धारकों ने डिबेंचर पर प्रीमियम के रूप में अतिरिक्त दो प्रतिशत तक की मांग की है।
टाटा ने पिछले साल अक्टूबर में विमान कंपनी का अधिग्रहण करने के लिए भारत सरकार को उद्यम मूल्य निर्धारण के रूप में 18,000 करोड़ का भुगतान करने का प्रस्ताव दिया था। टाटा समूह इस प्रस्ताव में से 15,300 करोड़ रुपये का एयर इंडिया का ऋण ग्रहण कर रहा था और शेष भुगतान भारत सरकार को विमान कंपनी की इक्विटी के लिए नकद रूप में किया जाना था।
एयर इंडिया को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला।
वास्तविक हस्तांतरण से पहले भारत सरकार एयर इंडिया के ऋणों के भाग का पूर्व भुगतान करेगी। हालांकि इस लेनदेन में एयर इंडिया की गैर-प्रमुख परिसंपत्तियां शामिल नहीं हैं जैसे भूमि और भवन, जिन्हें एयर इंडिया एसेट होल्डिंग लिमिटेड (एआईएएचएल) को हस्तांतरित किया जाना है। यह भारत सरकार के स्वामित्व वाली एक नियंत्रक कंपनी है। एयर इंडिया के ऋणों का पूर्व भुगतान किए जाने के बाद विमान कंपनी टाटा को सौंप दी जाएगी।
एयर इंडिया के डिबेंचर निवेशकों के लिए आकर्षक थे, क्योंकि भारत सरकार ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के माध्यम से पूरी राशि कवर करने वाली बिना शर्त और अपरिवर्तनीय गारंटी प्रदान की थी। इसके अलावा डिबेंचर को भारत सरकार के उपक्रम द्वारा समर्थन दिया गया था कि इसकी गारंटी एनसीडी कार्यक्रम के तहत अपने किसी भी दायित्व को पूरा करने के लिए एयर इंडिया की ओर से किसी भी अशक्तता या अनियमितता से अप्रभावित रहेगी। निजी प्रोविडेंट फंड और बैंकों सहित कई निवेशकों ने एयर इंडिया के डिबेंचर की अधिक रेटिंग के कारण एनसीडी में निवेश किया था।
टाटा समूह एयर इंडिया में उठाए जाने वाले ऋण को चुकाने के लिए धन जुटाने का भी प्रयास कर रहा था। एक बैंकर ने कहा कि टाटा समूह इस अधिग्रहण के लिए पैसा देने के वास्ते 23,000 करोड़ रुपये जुटा रहा है और वह चार से पांच प्रतिशत ब्याज दर पर धन जुटाना चाहता है। एयर इंडिया डिबेंचर पर लगभग नौ प्रतिशत से 10.5 प्रतिशत ब्याज का भुगतान कर रही थी, जिसका अब वह पूर्व भुगतान करने की योजना बना रही है।
मार्च 2020 तक एयर इंडिया पर 62,361 करोड़ रुपये का ऋण था। इसमें से एयर इंडिया सरकार के स्वामित्व वाली इकाई एआईएएचएल को 46,262 करोड़ रुपये का ऋण हस्तांतरित करेगी।

First Published - January 19, 2022 | 11:12 PM IST

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