तुर्की एयरलाइंस के पूर्व चेयरमैन इल्कर आयची ने टाटा समूह की कंपनी एयर इंडिया का मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) बनने का प्रस्ताव आज ठुकरा दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध स्वदेशी जागरण मंच द्वारा उनकी नियुक्ति का विरोध किए जाने के बाद आयची ने यह कदम उठाया है।
आयची का एयर इंडिया की कमान अपने हाथ में लेने से इनकार करना घाटे में चल रही विमानन कंपनी का टाटा संस द्वारा पुनरूद्घार के प्रयास को बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। टाटा समूह ने एयर इंडिया की बोली जीती थी और नियामकीय मंजूरियां हासिल करने के बाद पिछले महीने ही उसे विमानन कंपनी का स्वामित्व मिला था।
सूत्रों ने कहा कि विमानन कंपनी का परिचालन अंतरिम व्यवस्था के तहत पांच सदस्यीस समिति द्वारा किया जाएगा और इस बीच टाटा संस नए मुख्य कार्याधिकारी की तलाश करेगी। पांच सदस्यीय समिति के अध्यक्ष टाटा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष निपुन अग्रवाल होंगे। इसके साथ ही वित्त, वाणिज्यिक, परिचालन और मानव संसाधन क्षेत्र से जुड़े निदेशक बतौर सदस्य शामिल होंगे।
एक जानकार शख्स ने बताया कि मौजूदा व्यवस्था के तहत विमानन कंपनी के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि जरूरत पडऩे पर समूह के विशेषज्ञ अंतरिम समिति की सहायता कर रहे हैं। विनिवेश से पहले वित्तीय पुनर्गठन की वजह से विमानन कंपनी का दैनिक घाटा भी कम हुआ है। टाटा समूह को कमान सौंपने से पहले करीब 46,000 करोड़ रुपये का कर्ज सरकार के खाते में गया था। सूत्रों ने कहा कि टाटा स्टील के मानव संसाधन विभाग के पूर्व उपाध्यक्ष सुरेश त्रिपाठी एयर इंडिया के पुनर्गठन प्रक्रिया में शामिल थे, वहीं टाटा कसंल्टेंसी सर्विसेज की एक टीम विमानन कंपनी के सॉफ्टवेयर को वन टाटा ऑपरेटिंग नेटवर्क के साथ जोडऩे पर काम कर रही है। संदीप वर्मा के नेतृत्व में ताज हॉस्पिटैलिटी समूह की एक टीम भी एयर इंडिया की छवि को सुधारने में लगी है। संदीप के पास विस्तारा में काम करने का भी अनुभव है।
हालांकि डीजीसीए के नियमों के अनुसार विमानन कंपनी में एक प्रबंधक होना चाहिए जो परिचालन के लिए जिम्मेदार होगा। अधिकांश मामलों में विमानन कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी जिम्मेदार प्रबंधक होते हैं।
आयची पहले तुर्की के राष्ट्रपति रेसिप एर्डोगन के सलाहकार रह चुके हैं। टाटा संस ने 14 फरवरी को उन्हें एयर इंडिया का मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक बनाने की घोषणा की थी।
उनकी नियुक्ति के समय आयची को विमानन उद्योग का दिग्गज बताया गया था, जिन्होंने टर्किश एयरलाइंस का नेतृत्व किया था।
लेकिन तुर्की के राष्ट्रपति से उनकी निकटता को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना होने लगी थी क्योंकि भारत और तुर्की के संबंध अच्छे नहीं हैं। स्वदेशी जागरण मंच ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए उनकी नियुक्ति का विरोध किया था।