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बेमौसम बारिश से मंडियों में फसलों के कारोबार पर मार

भले ही फसलों की पैदावार कम होने की संभावना है लेकिन फसलों के दाम गिर रहे हैं

Last Updated- April 07, 2023 | 10:03 PM IST
Unseasonal rains hit the business of crops in mandis

बेमौसम बारिश से मंडियों में फसलें बरबाद तो हुई ही हैं, मंडियों में रबी फसलों का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। भले ही फसलों की पैदावार कम होने की संभावना है, लेकिन फसलों के दाम गिर रहे हैं। सबसे ज्यादा असर गेहूं के कारोबार पर पड़ रहा है। बारिश से गेहूं के दाने की चमक फीकी पड़ गई है, जिससे इसके भाव नीचे आ रहे हैं।

रबी सीजन की दूसरी बडी फसल चना और तीसरी प्रमुख फसल सरसों की उपज पर बारिश का खास असर नहीं पड़ा मगर ज्यादातर मंडियों में सरसों न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी ) से नीचे बिक रही है। पिछले दिनों की बारिश से पहले ही ज्यादातर सरसों कटकर किसानों के घरों और खलिहानों में पहुंच चुकी थी। बमुश्किल 15-20 फीसदी फसल ही खेतों में खड़ी थी, जिसे नुकसान हुआ है। उधर बारिश के समय खेतों में खड़े चने पर दाग पड़ गए हैं, जिससे इसके भाव मंद हो गए हैं। बेमौसम बारिश से फसल में देर होने से मंडियों में फसलों की आवक भी पिछले साल से कम हो रही है।

रबी की सबसे अहम फसल गेहूं की बात करें तो किसान और कारोबारियों के अनुसार 20 से 25 फीसदी गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। लेकिन कृषि आयुक्त पीके सिंह के अनुसार जिन इलाकों में बेमौसम बारिश और ओले पड़े थे, केवल वहां 8-10 फीसदी फसल को नुकसान पहुंचा है। बाकी जगह फसल अच्छी है। सरकार ने इस साल 11.22 करोड़ टन गेहूं पैदा होने का अनुमान लगाया है।

उत्तर प्रदेश में मथुरा के पास कोसीकलां मंडी के अनाज कारोबारी बृजेंद्र कुमार ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि आम तौर पर नई आवक की शुरुआत में कारोबारी गेहूं खरीद पर खूब जोर देते हैं क्योंकि इस समय तक सरकारी खरीद शुरू न होने के कारण गेहूं कम भाव पर मिल जाता है। मगर इस बार बेमौसम बारिश ने गेहूं को गीला कर दिया है और उसकी चमक भी फीकी पड़ गई है। गीला गेहूं भरने और पीसने के लिए कोई तैयार नहीं है। इसलिए फिलहाल उतनी ही गेहूं खरीदा जा रहा है, जितने की फौरी जरूरत है। जिन मिलों या कारोबारियों के पास ड्रायर से गेहूं सुखाने की सुविधा है, वे इस समय गेहूं खरीद रहे हैं। इन दिनों कोसीकलां मंडी में रोजाना करीब 15,000 हजार बोरी गेहूं आ रहा है और 1,900 से 2,100 रुपये प्रति क्विंटल पर बिक रहा है। गुणवत्ता नहीं बिगड़ती तो इसी का भाव 2,150 से 2,300 रुपये क्विंटल होता। कुमार कहते हैं कि खराब गुणवत्ता के कारण कारोबारियों को गेहूं पर 5 से 10 रुपये प्रति क्विंटल कम मार्जिन मिल रहा है।

मध्य प्रदेश ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक जैन कहते हैं कि मंडियों में अभी गीला गेहूं आ रहा है, जिसके सूखने पर वजन कम हो जाएगा। इसलिए भंडारण के मकसद से गीला गेहूं खरीदने का कोई फायदा नहीं है चाहे उसके भाव कम ही क्यों न हों। आटा मिलों को गेहूं सुखाए बगैर बेचा नहीं जा सकेगा। गेहूं की चमक फीकी पड़ने और गीला होने के कारण खुदरा ग्राहक भी उसे खरीदने में कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं। बिक्री तभी जोर पकड़ेगी, जब सूखा गेहूं आएगा, जिसमें 10 से 15 दिन लग सकते हैं।

उत्तर प्रदेश की हरदोई मंडी के गेहूं कारोबारी और मिलर संजीव अग्रवाल प्रतिकूल मौसम के कारण गेहूं का दाना काला पड़ने की भी शिकायत करते हैं। उनका कहना है कि इस समय मंडी जो गेहूं आ रहा है, उसमें 14 फीसदी से अधिक नमी है, इसलिए भंडारण के लायक गेहूं इस समय मंडी में मौजूद ही नहीं है। खराब गुणवत्ता के कारण भाव भी 2,150 से 2,200 रुपये प्रति क्विंटल हैं, जिनमें सूखा गेहूं आने पर तेजी आ सकती है।

सरसों, चने की गुणवत्ता घटी

अशोक जैन बताते हैं कि मध्य प्रदेश में बेमौसम बारिश से पहले ही 80 फीसदी से अधिक सरसों की फसल किसानों के घर आ चुकी थी। इसलिए सरसों को बारिश से कम नुकसान हुआ है। सरसों की बेंचमार्क मंडी जयपुर के कारोबारी अनिल चतर कहते हैं कि बेमौसम बारिश के समय खड़ी फसल को 3 से 5 फीसदी ही नुकसान हुआ है क्योंकि बमुश्किल 10-15 फीसदी फसल ही खेतों में थी। मगर पिछले दिनों हुए इस नुकसान और छुट्टियों के कारण आवक घटने से सरसों के दाम 200 रुपये प्रति क्विंटल उछल गए हैं और जयपुर मंडी में सरसों 5,200 से 5,300 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। पिछले सप्ताह देश भर में 12 लाख बोरी सरसों की आवक हो रही थी मगर अब 6 लाख बोरी ही रह गई है। सरसों अनुसंधान निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक बेमौसम बारिश से सरसों के उत्पादन मे 1-1.5 लाख टन कमी आ सकती है, जो बेहद मामूली होगी। सरसों के उत्पादन का सरकारी अनुमान 128 लाख टन है।

एमपी एग्रो ओवरसीज के मालिक व चना कारोबारी शीशराम रावत कहते हैं कि राजस्थान में बारिश से खेतों में खड़ी चने की फसल को नुकसान पहुंचा है और चना दागी हो गया है। किसानों ने भी जल्दबाजी में चने की कटाई की, जिससे यह गीला भी है। इस समय राजस्थान वाले चने की आपूर्ति ज्यादा है। चना दागी और गीला होने के कारण इसके भाव बीते 10 दिनों में 100 रुपये क्विंटल गिर चुके हैं। खराब गुणवत्ता वाला चना 5,000 से 5,100 रुपये प्रति क्विंटल तक और अच्छा चना 5,200 रुपये क्विंटल से ऊपर बिक रहा है। इस समय भंडारण के लिए चने की खरीद कम हो रही है। खराब गुणवत्ता वाली फसल के कारोबार में मार्जिन भी घट जाता है।

First Published - April 7, 2023 | 10:03 PM IST

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