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कीमतों में इजाफे का इरादा नहीं

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Last Updated- December 07, 2022 | 3:43 PM IST

महंगाई की दुहाई देकर स्टील-सीमेंट कंपनियों को तीन महीने तक दाम न बढ़ाने के लिए सरकार ने राजी कर लिया था।


हालांकि 7 अगस्त को जहां स्टील कंपनियों की ओर से कीमतें नहीं बढ़ाने का वायदा पूरा हो रहा है, वहीं 14 अगस्त को सीमेंट कंपनियों की ओर से कीमतें नहीं बढ़ाने की मियाद भी पूरी हो रही है। ऐसे में, कंपनियों की क्या होगी रणनीति, हमने टटोला इस क्षेत्र से जुड़े लोगों का मन।

कीमतों में बढ़ोतरी नहीं करने की स्टील कंपनियों की मियाद गुरुवार को खत्म हो रही है। प्रमुख स्टील निर्माताओं का इरादा फिलहाल कीमतें नहीं बढ़ाने का लगता है। सेल के एक अधिकारी के अनुसार, कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना न के बराबर है। जेएसडब्ल्यू स्टील के सान जिंदल भी कह चुके हैं कि कंपनी कम से कम इस महीने तो कीमतों में इजाफा नहीं करेगी।

टाटा स्टील ने भी कुछ ऐसे ही संकेत दिए हैं। कंपनियों के पास दो वजहें हैं, जो उन्हें कीमतें बढ़ाने से रोक सकती हैं। पहली तो यह कि जुलाई से सितंबर तिमाही में स्टील की मांग अपेक्षाकृत कम रहती है, वहीं पिछले 15 दिनों में वैश्विक स्तर पर स्टील की कीमतों में 100 डॉलर प्रति टन की कमी आई है।

दूसरी ओर, जुलाई में हुए स्टील कॉनक्लेव में निजी कंपनियों ने वैश्विक कीमतों का हवाला देकर देश में स्टील की कीमतों में बढ़ोतरी करने की जोरदार वकालत की थी। इन कंपनियों के सामने परेशानी यह है कि कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से लागत में इजाफा हो रहा है।

स्टील उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ के मुताबिक, सेल और टाटा स्टील जैसी बड़ी कंपनियों के पास अपनी खदानें हैं, जिनसे उन्हें लौह अयस्क मिल जाता है। वहीं जेएसडब्ल्यू स्टील, एस्सार स्टील, इस्पात इंडस्ट्रीज और राष्ट्रीय इस्पात लिमिटेड जैसी कंपनियों को अधिकतर लौह अयस्क बाजार से खरीदना पड़ता है।

सीमेंट मैन्यूफैक्चर्स एसोशिएसन (सीएमए) के अध्यक्ष और श्री सीमेंट के प्रबंध निदेशक एच. एम. बांगुर ने बिानेस स्टैंडर्ड को बताया कि बाजार की मौजूदा स्थितियां कीमतें बढ़ाने की इजाजत नहीं दे रही हैं। यह पूछने पर कि क्या सीमेंट कंपनियां केवल सरकार के दबाव में कीमतों में बढ़ोतरी को टाल रही हैं, बांगुर ने कहा कि हम लोगों पर सरकार का कोई दबाव नहीं है। उनके मुताबिक, सीमेंट उद्योग के लिए तात्कालिक और दीर्घकालिक, दोनों तरह की स्थितियां कीमतों में बढ़ोतरी की इजाजत नहीं दे रही हैं।

मानसून की वजह से जहां सीमेंट की मांग में तात्कालिक तौर पर काफी कमी हो चुकी है, वहीं अगले तीन सालों में सीमेंट के उत्पादन में 10.5 करोड़ टन की वृद्धि होने के अनुमान से भी कंपनियां इस समय ‘बैकफुट’ पर दिख रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सही है कि लागत बढ़ने से सीमेंट कंपनियों का मुनाफा इस समय कम हो चुका है, लेकिन कारोबार में मुनाफे की दर हमेशा ऊंची नहीं होती।

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First Published - August 7, 2008 | 12:39 AM IST

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