facebookmetapixel
Advertisement
ट्रंप ने की पीएम मोदी की जमकर तारीफ, बोले: 150 करोड़ लोगों का यह नेता है असली ‘टफ कुकी’NEET UG 2026: नागपुर के छात्र को मिला अबू धाबी का परीक्षा केंद्र, NTA की लापरवाही से परिवार परेशानBonus Stocks Alert: अगले हफ्ते इन 2 कंपनियों के निवेशकों की चमकेगी किस्मत, मिलेंगे मुफ्त में शेयरOMC को भारी चपत: तेल कंपनियों को लगा ₹22,000 करोड़ का बड़ा झटका, बाजार से कम दाम पर बेची रसोई गैसCrude Oil Import: पश्चिम एशिया संकट की भारी चपत, बराबर तेल खरीदने के बाद भी 81.5% बढ़ा भारत का खर्चRBI Regulatory Action: विदेश से जुटाई उधारी की रोज देनी होगी जानकारी, RBI ने बैंकों को दिया कड़ा निर्देशबैंकिंग सेक्टर में हलचल! वारी रिन्यूएबल्स के बड़े सौदे को हरी झंडी, HSBC इंडिया ने दिए ₹1,255 करोड़देश के बड़े कैंसर अस्पताल HCG ऑन्कोलॉजी हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड, नियमों की अनदेखी को लेकर हुई कार्रवाईAmazon ने तय समय से पहले हासिल किया बड़ा लक्ष्य, भारत में बनी ‘वॉटर पॉजिटिव’ कंपनीमहिला श्रम शक्ति में उछाल: असंगठित क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी दो-तिहाई के पार, ई-श्रम पोर्टल पर रिकॉर्ड पंजीकरण

कपास पर आयात शुल्क से छूट की अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2025 तक

Advertisement

पहले इस छूट की घोषणा 19 अगस्त से 30 सितंबर, 2025 तक के लिए की थी। इसका मकसद कच्चे कपास की उपलब्धता में सुधार करना और निर्यातकों पर दबाव कम करना था

Last Updated- August 28, 2025 | 10:50 PM IST
India faces limited gains, more pain from trade war between US and China

सरकार ने गुरुवार को कपास पर आयात शुल्क से छूट की अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2025 तक कर दी है, जिससे घरेलू टेक्सटाइल सेक्टर को मदद मिल सके। सरकार ने गुरुवार को एक बयान में कहा, ‘निर्यातकों को और अधिक समर्थन देने के लिए केंद्र सरकार ने कपास (एचएस 5201) पर आयात शुल्क छूट को 30 सितंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाने का फैसला किया है।’ वित्त मंत्रालय ने सबसे पहले इस छूट की घोषणा 19 अगस्त से 30 सितंबर, 2025 तक के लिए की थी। इसका मकसद कच्चे कपास की उपलब्धता में सुधार करना और निर्यातकों पर दबाव कम करना था।

इसमें 5 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) और 5 प्रतिशत कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (एआईडीसी) से छूट, साथ ही दोनों पर 10 प्रतिशत सामाजिक कल्याण अधिभार शामिल है जिससे कपास पर कुल आयात शुल्क 11 प्रतिशत बैठता है।  इस बीच तमिलनाडु सरकार ने अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क के तूफान से निर्यातकों को बचाने के लिए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इसमें तिरुपुर क्लस्टर की मदद के लिए निर्यात प्रोत्साहन बढ़ाया जाना शामिल है।

उद्योग जगत ने भी केंद्र से प्रोत्साहनों और नए बाजारों की तलाश के लिए सहायता और यूरोपीय संघ से जल्द व्यापार समझौता किए जाने की मांग की है। कुछ कारोबारियों ने रूस के बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच की सुविधा दिलाए जाने की भी मांग की है। निर्यात प्रोत्साहन बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने की मांग करते हुए तमिलनाडु के उद्योग मंत्री टीआरबी राजा ने तिरुपुर के निर्यातकों के विचार सामने रखे और संकेत दिया कि इस क्षेत्र को हर महीने करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा, जो तिरुपुर के कुल निर्यात का करीब 40 प्रतिशत है।

कपास के शुल्क मुक्त आयात से कपड़ा मूल्य श्रृंखला की कच्चे माल की लागत कम होने और विनिर्माताओं एवं उपभोक्ताओं दोनों को आवश्यक राहत मिलने की उम्मीद है। कपड़ा मूल्य श्रृंखला में धागा, कपड़ा, परिधान एवं सिले हुए उत्पाद शामिल हैं। कपड़ा, रत्न एवं आभूषण और चमड़ा सहित भारतीय वस्तुओं पर 27 अगस्त से अमेरिका शुल्क बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया है। शुल्क छूट से घरेलू बाजार में कच्चे कपास की उपलब्धता बढ़ेगी, कपास की कीमतें स्थिर होंगी और इस प्रकार तैयार वस्त्र उत्पादों पर महंगाई का दबाव कम होगा।

Advertisement
First Published - August 28, 2025 | 10:30 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement