facebookmetapixel
Advertisement
नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद दतिया में बड़ा हंगामा, सामने आया पहला बयान: पार्टी फोरम में बात रखेंअमेरिका के एकतरफा 12.5% टैरिफ प्रस्ताव पर भारत सख्त, कहा: बातचीत से सुलझाएं व्यापारिक मुद्देइंडियन टोनर्स का बड़ा फैसला: 1 शेयर के होंगे 5 टुकड़े, 17 जुलाई को तय हुई स्टॉक स्प्लिट की रिकॉर्ड डेट1 के बदले 2 फ्री बोनस शेयर! फॉर्मा कंपनी ने जबरदस्त मुनाफे के बाद लुटाया प्यार, रिकॉर्ड डेट अगले हफ्तेनिवेशकों के लिए खुशखबरी! मिनोल्टा फाइनेंस के 1 शेयर पर 4 नए शेयर खरीदने का मौका, रिकॉर्ड डेट फिक्सUN Women की रिपोर्ट में खुलासा: संकटग्रस्त इलाकों में 10 लाख से अधिक महिलाओं तक नहीं पहुंच रही मददट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, कहा: मुझ पर हमला हुआ तो 1000 मिसाइलों से तबाह कर देंगेसरकारी बैंकों की बंपर कमाई के बाद शेयरों में जबरदस्त उछाल, इंडियन बैंक-बैंक ऑफ महाराष्ट्र में बड़ी तेजीज्यादा अल्कोहल वाली दवाओं पर सरकार सख्त, अब बिना डॉक्टर के पर्चे और लाइसेंस के नहीं मिलेगी दवाईसस्ती होंगी जगुआर लैंड रोवर जैसी लक्जरी गाड़ियां, ब्रिटेन से आने वाली कारों पर सिर्फ 10% लगेगा आयात शुल्क

गेहूं, चना, सरसों समेत 7 कमोडिटी की फ्यूचर ट्रेडिंग पर लगी रोक अगले एक साल के लिए रहेगी जारी

Advertisement
Last Updated- December 21, 2022 | 1:14 PM IST
Mustard seeds

बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए 7 एग्रीकल्चर कमोडिटी पर  पिछले एक साल से वायदा कारोबार पर लगी रोक को एक और वर्ष के लिए बढा दिया गया है।  सेबी की तरफ से  देर रात इस संबंध में आदेश जारी किए गए।

जिन सात जिंसों में वायदा कारोबार को अगले एक और साल के लिए बढ़ाया गया है उसमें सोयाबीन (Soybean), सरसों (Mustard Seed), चना (Chana), गेहूं (Wheat), धान (Paddy), मूंग (Moong) और कच्चे पाम तेल (Crude Palm Oil)  शामिल है।

इन सभी कमोडिटी पर रोक अब 20 दिसंबर 2023 तक बनी रहेगी।

इन 7 कमोडिटी की फ्यूचर ट्रेडिंग पर लगी रोक की समय सीमा 20 दिसंबर को समाप्त हो रही थी। 20 दिसंबर 2021 को इन सभी एग्रीकल्चर कमोडिटी में वायदा कारोबार पर रोक लगाई थी।

फ्यूचर कमोडिटी ट्रेडिंग पर लगी रोक को बढाने  के पीछे ये सोच है कि इससे बढ़ती कीमतों पर कुछ लगाम लगाए जाने में मदद मिलेगी।  इसी महीने जारी महंगाई दर के आंकड़ों में WPI (Wholesale Price Index) पर आधारित थोक महंगाई दर 14.23 फीसदी पर आ गई थी । वहीं CPI (Consumer Price Index) पर आधारित रिटेल महंगाई दर 4.91 फीसदी पर जा पहुंची थी।

देश में खुदरा महंगाई भले पहले से नीचे आ गई हो, लेकिन ये अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)  के दायरे की ऊपरी सीमा यानी 6 फीसदी के आसपास बनी हुई है। खुदरा महंगाई को बढ़ाने में खाद्य महंगाई दर (Food Inflation) की अहम भूमिका होती है। ऐसे में खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने इन जिंसों के वायदा कारोबार पर लगी रोक को जारी रखा है ।

दलहन और तिलहन के मामले में भारत को आयात पर भी निर्भर करना पड़ता है, क्योंकि इनकी खपत के मुकाबले पैदावार कम है। ऐसे में इन दोनों कमोडिटी में महंगाई तेजी से बढ़ती है।

Advertisement
First Published - December 21, 2022 | 11:59 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement