वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार अपना नौवां बजट पेश कर दिया है। इस बजट में आम आदमी की जेब, कारोबारी फैसले और रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने के थोड़े बहुत संकेत मिले है। साथ ही बजट ने यह दिखाया कि कुछ चीजें अब सस्ती होंगी और कुछ महंगी, और यही फर्क हमारे खर्च और बचत पर असर डालेगा। विदेश यात्रा, पढ़ाई, हेल्थ या ट्रेडिंग, बजट के बाद इनपर थोड़ा बदलाव महसूस हो सकता है। आइए समझते हैं कि इस बजट के बाद मोटा-माटी क्या सस्ती होंगी और किन चीजों के लिए आपको जेब और ढीली करनी होगी।
बजट में कई राहतें दी गई हैं, खासकर विदेशी खर्चों और कुछ जरूरी सामानों पर। विदेश घूमने के पैकेज अब पहले से सस्ते पड़ेंगे, क्योंकि ओवरसीज टूर पैकेज पर टीसीएस (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) की दर 5-20 फीसदी से घटाकर सिर्फ 2 फीसदी कर दी गई है। कोई न्यूनतम रकम की शर्त भी नहीं है।
विदेश में पढ़ाई करने वालों को भी फायदा मिलेगा। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा के खर्च पर TCS की दर 5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी कर दी गई है। (मेडिकल खर्चों पर भी यही राहत है।)
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कुछ खास सेक्टरों में भी छूट मिली है। जैसे, कैंसर और रेयर डिजीज की दवाओं पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी पूरी तरह हटा दी गई है। सोलर ग्लास बनाने वाली सामग्री, एनर्जी ट्रांजिशन के उपकरण, क्रिटिकल मिनरल्स के लिए कैपिटल गुड्स, सिविलियन एयरक्राफ्ट के पार्ट्स और माइक्रोवेव ओवन के पार्ट्स पर भी BCD छूट दी गई है।
पर्सनल यूज के लिए इंपोर्टेड सामान पर BCD 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दी गई है। भारतीय मछुआरों द्वारा पकड़ी गई मछली और न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए इंपोर्टेड सामान पर भी ड्यूटी छूट है।
कुछ जगहों पर टैक्स बढ़ाने के फैसले भी लिए गए हैं। इनकम टैक्स में मिसरिपोर्टिंग करने पर अब टैक्स की रकम के बराबर 100 फीसदी पेनल्टी लगेगी। मूवेबल एसेट्स को छिपाने पर भी पेनल्टी का प्रावधान आ गया है।
शेयर मार्केट में ट्रेडिंग करने वालों के लिए स्टॉक ऑप्शंस और फ्यूचर्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STD) बढ़ा दिया गया है। फ्यूचर्स पर यह 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी हो गया है।
ये सारे बदलाव सीधे तौर पर लोगों की जेब को पर असर डाल सकते हैं, खासकर जो विदेश यात्रा, पढ़ाई या ट्रेडिंग करते हैं।