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लेखक : राजेश्वरी सेनगुप्ता

आज का अखबार, लेख

RBI की मौद्रिक नीति पर सवाल नहीं, महंगाई के सटीक पूर्वानुमान पर हो बहस

कई लोगों की राय है कि भारतीय रिजर्व बैंक को अपनी मौद्रिक नीति के तौर-तरीकों में बड़े बदलाव करने की जरूरत है। उसे नीतिगत दरें तय करने का अपना तरीका तो  बदलना ही चाहिए। संभव है कि उसे मुद्रास्फीति को ध्यान में रखकर कदम उठाने का तरीका ही छोड़ना पड़े। क्या इन दावों और तर्कों […]

आज का अखबार, लेख

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता: निवेश सुरक्षा के बिना अधूरा रहेगा एफटीए

इस समय भारत के समक्ष सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती रोजगार के अच्छे अवसर तैयार करना है। हर वर्ष 1.0 से 1.2 करोड़ युवा श्रम बल में शामिल होते हैं। विनिर्माण क्षेत्र को रोजगार उपलब्ध कराने में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए थी लेकिन इसका सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान पिछले दो दशकों से 15-17 फीसदी […]

आज का अखबार, लेख

विदेशी पूंजी के लिए भारत को आकर्षक बनाने की राह: आरबीआई के जून कदमों से आगे

भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी उधारी को प्रोत्साहन देकर रुपये को सहारा देने के लिए पिछले हफ्ते कई उपायों की घोषणा की। वे उपाय अभी तक तो कारगर नजर आ रहे हैं और रुपया ठहर गया है। लेकिन बड़ा प्रश्न यह है कि यह स्थिरता बनी रहेगी या नहीं। उत्तर इस बात पर निर्भर करता […]

आज का अखबार, लेख

रुपये की कमजोरी की जड़ें कहीं गहरी, सिर्फ तेल और पश्चिम एशिया संकट नहीं जिम्मेदार

देश के नीति निर्धारकों ने रुपया संभालने के लिए 5 जून को कुछ महत्त्वपूर्ण उपायों की घोषणा की। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जिन उपायों का ऐलान किया उनमें विदेश से ऋण लेने वाली सरकारी कंपनियों को सब्सिडी, प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए डॉलर- जमा योजना का नया संस्करण (जो आखिरी बार वर्ष 2013 में […]

आज का अखबार, लेख

आर्थिक संकट से निपटने में सरकारी नियंत्रण से कहीं अधिक कारगर है कीमतों का स्वतंत्र खेल

जब किसी अर्थव्यवस्था को युद्ध या महामारी जैसा कोई झटका लगता है तो मोटे तौर पर यह दो तरीकों से संभल सकती है – या तो कीमतों के जरिये या राज्य द्वारा लगाए गए प्रशासनिक नियंत्रणों से। बाजार अर्थव्यवस्थाएं मुख्य रूप से कीमतों पर निर्भर करती हैं। केंद्र से नियोजित व्यवस्थाएं अफसरशाही द्वारा आवंटन पर […]

आज का अखबार, लेख

रुपये को संभालने के फायदे कम, नुकसान ज्यादा

पिछले कुछ हफ्तों से सभी की नजरें रुपये पर टिकी हुई हैं। अमेरिकी मुद्रा डॉलर की तुलना में रुपये का लगातार फिसलना कौतूहल का विषय बनता जा रहा है। रुपये की चाल पर हो रही टीका-टिप्पणी में इसकी व्याख्या कमजोरी के संकेत के रूप में हो रही है। इसके साथ ही, रुपया संभालने के लिए […]

आज का अखबार, लेख

रुपये को स्वतंत्र रूप से चलने दें: RBI का हस्तक्षेप फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध छिड़ने के बाद भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार दबाव में है। रुपये को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। हालांकि, आरबीआई ने जो उपाय किए हैं उनका विपरीत असर होने और विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवधान उत्पन्न का खतरा है। […]

आज का अखबार, लेख

MPC बैठक पर नजर: युद्ध, महंगाई और ग्रोथ के बीच RBI की बड़ी दुविधा

RBI MPC Meet, April 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अपनी अगली मौद्रिक नीति 9 अप्रैल को घोषित करेगा। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की हर बैठक पर नजर होती है लेकिन इस बार इस पर विशेष रूप से नजर होगी क्योंकि पश्चिम एशिया में संघर्ष चल रहा है। भले ही एमपीसी ब्याज दर में कोई बदलाव […]

आज का अखबार, लेख

मजबूत विकास संकेतों के बीच ब्याज दर में कटौती बताती है कि मौद्रिक नीति को बेहतर आंकड़ों की जरूरत

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जब 6 दिसंबर को नीतिगत दर घटाई तो कई विश्लेषक हैरान रह गए। यह कटौती ऐसे समय में हुई जब अर्थव्यवस्था 8.2 फीसदी की वृद्धि दर से आगे बढ़ रही है। वृहद अर्थशास्त्र के नियम मोटे तौर पर यह कहते हैं कि जब कोई अर्थव्यवस्था तेज गति से आगे बढ़ती […]

आज का अखबार, लेख

रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण की भविष्य की दिशा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी पिछली नीतिगत बैठक में, सीमा-पार व्यापार में रुपये के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई उपायों की पेशकश की जो इसके धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में बढ़ाया गया एक कदम है। एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था की मुद्रा भी वैश्विक स्तर पर एक अहम दर्जा हासिल कर सकती है, […]

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