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लेखक : राजेश्वरी सेनगुप्ता

आज का अखबार, लेख

आर्थिक संकट से निपटने में सरकारी नियंत्रण से कहीं अधिक कारगर है कीमतों का स्वतंत्र खेल

जब किसी अर्थव्यवस्था को युद्ध या महामारी जैसा कोई झटका लगता है तो मोटे तौर पर यह दो तरीकों से संभल सकती है – या तो कीमतों के जरिये या राज्य द्वारा लगाए गए प्रशासनिक नियंत्रणों से। बाजार अर्थव्यवस्थाएं मुख्य रूप से कीमतों पर निर्भर करती हैं। केंद्र से नियोजित व्यवस्थाएं अफसरशाही द्वारा आवंटन पर […]

आज का अखबार, लेख

रुपये को संभालने के फायदे कम, नुकसान ज्यादा

पिछले कुछ हफ्तों से सभी की नजरें रुपये पर टिकी हुई हैं। अमेरिकी मुद्रा डॉलर की तुलना में रुपये का लगातार फिसलना कौतूहल का विषय बनता जा रहा है। रुपये की चाल पर हो रही टीका-टिप्पणी में इसकी व्याख्या कमजोरी के संकेत के रूप में हो रही है। इसके साथ ही, रुपया संभालने के लिए […]

आज का अखबार, लेख

रुपये को स्वतंत्र रूप से चलने दें: RBI का हस्तक्षेप फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध छिड़ने के बाद भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार दबाव में है। रुपये को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। हालांकि, आरबीआई ने जो उपाय किए हैं उनका विपरीत असर होने और विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवधान उत्पन्न का खतरा है। […]

आज का अखबार, लेख

MPC बैठक पर नजर: युद्ध, महंगाई और ग्रोथ के बीच RBI की बड़ी दुविधा

RBI MPC Meet, April 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अपनी अगली मौद्रिक नीति 9 अप्रैल को घोषित करेगा। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की हर बैठक पर नजर होती है लेकिन इस बार इस पर विशेष रूप से नजर होगी क्योंकि पश्चिम एशिया में संघर्ष चल रहा है। भले ही एमपीसी ब्याज दर में कोई बदलाव […]

आज का अखबार, लेख

मजबूत विकास संकेतों के बीच ब्याज दर में कटौती बताती है कि मौद्रिक नीति को बेहतर आंकड़ों की जरूरत

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जब 6 दिसंबर को नीतिगत दर घटाई तो कई विश्लेषक हैरान रह गए। यह कटौती ऐसे समय में हुई जब अर्थव्यवस्था 8.2 फीसदी की वृद्धि दर से आगे बढ़ रही है। वृहद अर्थशास्त्र के नियम मोटे तौर पर यह कहते हैं कि जब कोई अर्थव्यवस्था तेज गति से आगे बढ़ती […]

आज का अखबार, लेख

रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण की भविष्य की दिशा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी पिछली नीतिगत बैठक में, सीमा-पार व्यापार में रुपये के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई उपायों की पेशकश की जो इसके धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में बढ़ाया गया एक कदम है। एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था की मुद्रा भी वैश्विक स्तर पर एक अहम दर्जा हासिल कर सकती है, […]

आज का अखबार, लेख

भारत की जीडीपी डेटा की अनंत कहानी: आंकड़ों के पीछे के असली तथ्य

ज्यादातर देशों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े नियमित अंतराल पर जारी होते रहते हैं। मगर भारत में एक खास बात यह है कि उनके जारी होते ही बहस छिड़ जाती है। जीडीपी की नई श्रृंखला जारी होने के एक दशक बाद इसकी विश्वसनीयता को लेकर अब भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसकी […]

आज का अखबार, लेख

ट्रंप का टैरिफ झटका: भारत के लिए चेतावनी, चुनौतियां बढ़ीं; सरकार को नए कदम उठाने होंगे

भारतीय निर्यात पर अब अमेरिका में 50 फीसदी का आयात शुल्क (टैरिफ) लग रहा है। यह दुनिया के लगभग किसी भी अन्य देश की तुलना में एक बड़ी बाधा है। नतीजतन, सरकार को यह विचार करना होगा कि इससे कैसे निपटा जाए। हालांकि सरकार को राजनीतिक पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा, लेकिन आर्थिक […]

आज का अखबार, लेख

Trade war: वैश्विक विनिर्माण आकर्षित करने का भारत के लिए दूसरा मौका

किसी अन्य देश की तरह ही भारत भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ वस्तुओं, सेवाओं और वित्तीय आदान-प्रदान के माध्यम से जुड़ता है। भारत ने सेवा और वित्तीय क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया है और अब इसके पास वैश्विक वस्तु व्यापार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरने का मौका है। इसके कारण भारत की […]

आज का अखबार, लेख

डंपिंग रोधी शुल्क: घरेलू उद्योग की रक्षा या वैश्विक व्यापार से दूरी?

पिछले कई वर्षों से भारत सहित दुनिया के कई देश चीन से आयातित सस्ते सामान से अपने स्थानीय उद्योगों को होने वाले नुकसान को लेकर चिंतित रहे हैं। अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापार युद्ध के कारण हाल में यह चिंता और बढ़ गई है। 16 जून तक अमेरिका ने चीन के आयात पर […]

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