facebookmetapixel
Advertisement
सोने-चांदी में तेजी के संकेत, अगले हफ्ते कहां तक जाएंगे भाव?Explainer: म्युचुअल फंड में ₹3,811 करोड़ अनक्लेम्ड, कहीं आपका पैसा तो नहीं? ऐसे करें चेक और क्लेमइस हफ्ते खुलेंगे 8 नए IPOs, ₹5,499 करोड़ से ज्यादा जुटाएंगी कंपनियांशेयर बाजार की इस हफ्ते कैसी रहेगी चाल? अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल और फेड के फैसले पर टिकी नजरेंभारतीय शेयर बाजार में फिर बढ़ा विदेशी निवेशकों का भरोसा, अगस्त में अब तक लगाए 16,621 करोड़ रुपयेशेयर बाजार में मंदी की मार, टॉप-5 कंपनियों के ₹1 लाख करोड़ स्वाहा; TCS को लगा सबसे बड़ा झटकापश्चिम एशिया संकट से सरकार ने लिया सबक, LPG उत्पादन के लिए 21 रिफाइनरियों को दिए नए टारगेटLPG e-KYC की आज आखिरी तारीख, नहीं कराया तो घरेलू रेट पर सिलेंडर मिलने में आएगी दिक्कतदिल्ली समेत कई राज्यों में बारिश का अलर्ट, अगले कुछ दिनों तक बदला रहेगा मौसम का मिजाजE20 पर फिर सरकार की सफाई: सिर्फ एथेनॉल वाले पेट्रोल से नहीं घटता माइलेज, कई और फैक्टर्स भी शामिल

लेखक : एम एस साहू

आज का अखबार, लेख

वास्तविक जलवायु कार्रवाई नीतिगत निर्णयों से संभव, वित्तीय बाजारों से नहीं

सरकारें, वित्तीय बाजार नियामक और सामाजिक नागरिक संगठन सभी पृथ्वी के पर्यावरण को बेहतर बनाने में वित्तीय बाजारों की भूमिका को अहम मान रहे हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि निवेशक अपने निजी लाभ पर सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दें और पूंजी प्रवाह को टिकाऊ लक्ष्यों के साथ जोड़ा जा सके। वित्तीय […]

आज का अखबार, लेख

IBC की रफ्तार थमी: अस्तित्व मूल सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता पर निर्भर

भारतीय संसद ने 2016 में ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) का गठन किया ताकि देश को वित्तीय दिक्कत और फंसा कर्ज संभालने की चुनौतियों से उबारा जा सके। शुरुआती सालों में आईबीसी को संस्थागत तालमेल का फायदा मिला। विधायिका ने पहले पांच साल में संहिता में छह संशोधन किए ताकि क्रियान्वयन की चुनौतियां […]

आज का अखबार, लेख

कारोबारी लेनदेन की निश्चितता रखें बरकरार

उच्चतम न्यायालय ने 2 मई को दिवालिया एवं ऋण शोधन अक्षमता  संहिता, 2016 (आईबीएस) के अंतर्गत भूषण पावर ऐंड स्टील (बीपीएस) के समाधान से जुड़ी एक याचिका का निपटारा कर दिया। यह याचिका पांच वर्ष पहले दायर की गई थी। उच्चतम न्यायालय ने एकदम सटीक ढंग से तथ्य आधारित विस्तृत निर्णय दिया। इस आदेश में […]

आज का अखबार, लेख

क्या प्रबंधक की भूमिका में आ रहे हैं नियामक?

इंडसइंड बैंक में विदेशी मुद्रा देनदारी के हिसाब-किताब में हुई गड़बड़ी खबरों में खूब रही है। इससे कुछ दिन पहले ही पहले बैंक के निवर्तमान प्रबंध निदेशक को तीन साल के लिए फिर नियुक्त करने की सिफारिश ठुकराकर केवल एक साल के लिए नियुक्त किया जाना भी सुर्खियों में रहा था। इससे पहले भी बैंक […]

आज का अखबार, लेख

विधि निर्माण में तय हो नागरिकों की भूमिका

इस वर्ष की आर्थिक समीक्षा और केंद्रीय बजट विनियमन पर खूब जोर रहा है। सरकार पहले लागू कई कानूनों और नियम-कायदों को वापस लेने पर विचार कर रही है। कायदे-कानून बनाते समय अगर सार्वजनिक सलाह-मशविरे पर जोर दिया गया होता तो यह कवायद नहीं करनी पड़ती। ढंग से मशविरा किया जाए तो नियमन न कम […]

आज का अखबार, लेख

कारोबारी सुगमता का बने अंतरराष्ट्रीय संस्थान

कारोबार को धन सृजन और आर्थिक वृद्धि का इंजन माना जाता है। सरकार ने कारोबार एवं व्यवसायों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के लगातार प्रयास किए हैं। कारोबार स्वतंत्र माहौल में ही फलता-फूलता है, इसलिए उसकी बेड़ियां काटने के लिए पिछले कुछ साल में कई आर्थिक सुधार किए गए है। शुरुआत में कानूनी ढांचे […]

आज का अखबार, लेख

अचल संपत्ति क्षेत्र का दिवालियापन

दिवालिया कानूनों में मकान खरीदने वालों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, उन्हें निस्तारण प्रक्रिया की जटिलताओं में नहीं घसीटा जाना चाहिए। बता रहे हैं एमएस साहू और राघव पांडे किसी भी क्षेत्र के दिवालिया कानून की तरह ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता, 2016 (आईबीसी) भी लेनदार-देनदार के रिश्तों के इर्दगिर्द घूमती है। सामान्य […]

आज का अखबार, लेख

विफलता को सराहना कब आरंभ करेगा भारत?

कार्यपालिका और विधायिका एक दूसरे के साथ कदमताल करते हुए महत्त्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक मुद्दों के समाधान के लिए कानून बनाती हैं। पहले कानूनों में एक अनुच्छेद होता था, जो बताता था कि वे कार्यपालिका द्वारा तय अमुक तारीख को प्रभाव में आएंगे। किंतु हाल के कुछ कानूनों में इस अनुच्छेद के साथ एक शर्त है, जिसके […]

आज का अखबार, लेख

छिपे हुए कानून का बंद हो चलन

बंबई उच्च न्यायालय ने इस साल 4 अप्रैल को अपने एक फैसले में भारतीय दिवाला एवं शोध अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) द्वारा जारी एक परिपत्र (सर्कुलर) की कुछ धाराओं को खत्म कर दिया। अदालत का कहना था कि कानूनी नियम वाली ये धाराएं, भुगतान प्रक्रिया नियमन से परे हैं। हालांकि इसमें कहा गया कि आईबीबीआई के […]

आज का अखबार, लेख

IBC का कैसा रहा अब तक का प्रदर्शन

ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी), 2016 के प्रदर्शन का आकलन कई लोगों के लिए खाली समय का मनोरंजन रहा है। कुछ लोगों ने तो इसके लिए डोसा (डिसीजन ओरिएंटेड सिस्टमैटिक एनालिसिस यानी निर्णयोन्मुखीय व्यवस्थित विश्लेषण) का रुख भी अपनाया। यह रुख पहले ही वांछित आकलन निष्कर्ष निर्धारित कर लेता है और उसके बाद […]

1 2 3
Advertisement
Advertisement