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लेखक : अजय छिब्बर

आज का अखबार, लेख

अव्यवस्थित वैश्विक माहौल में भारत को आर्थिक और सैन्य ताकत बढ़ानी होगी

अमेरिका की आर्थिक नीतियां और सैन्य कार्रवाइयां, आज दुनिया में जोखिम और अनिश्चितता के सबसे बड़े कारणों में से एक बनती जा रही हैं। आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेरिका ने अपने रक्षा विभाग को फिर से ‘युद्ध विभाग’ कहना शुरू कर दिया है और पश्चिम एशिया में एक और युद्ध छेड़ दिया है जो इस […]

आज का अखबार, लेख

व्यापार समझौतों से खुलेगा ‘विकसित भारत’ का रास्ता, ट्रंप टैरिफ के बीच अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती

भारत ने अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के शुल्कों के दंश को उम्मीद से कहीं बेहतर ढंग से झेला। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 2025 में 7 प्रतिशत से अधिक रहने की संभावना है और इस दौरान भुगतान संतुलन भी सकारात्मक बना रहा। शुल्क लागू होने से पहले ही एहतियातन अमेरिका […]

आज का अखबार, लेख

RBI और सरकार में तालमेल तय करेगा भारत के ग्रोथ की राह

हम साल 2026 में प्रवेश कर गए हैं और रिजर्व बैंक के गवर्नर देश की अर्थव्यवस्था को ‘गोल्डीलॉक्स’ बता रहे हैं जहां वृद्धि मजबूत है और मुद्रास्फीति कम। श्रम सुधारों के बाद अगला लक्ष्य यह होना चाहिए कि वित्तीय बाजारों की गहराई बढ़ाकर पूंजी की लागत को कम किया जाए। यह शायद वित्त मंत्रालय और […]

आज का अखबार, लेख

नेहरू को दोष देना बंद करें: बड़ा सवाल यह है कि उनके बाद भारत ने रास्ता क्यों नहीं बदला?

देश की कई समस्याओं के लिए अभी भी नेहरू को जिम्मेदार ठहराया जाता है। अपनी ताजा किताब ‘द नेहरू इरा इकनॉमिक हिस्ट्री ऐंड थॉट ऐंड देयर लास्टिंग इंपैक्ट’ में अरविंद पानगड़िया ने जवाहरलाल नेहरू की सभी आर्थिक गलतियों को याद किया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कैसे इन गलतियों का प्रभाव […]

आज का अखबार, लेख

ढाका से कोलंबो तक: GenZ ने भ्रष्ट शासन पर गुस्सा दिखाना शुरू कर दिया है

हाल ही में आयोजित सरदार पटेल स्मृति व्याख्यान में देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने उचित ही यह बात रेखांकित की है कि बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में सरकारों के गिरने में शासन व्यवस्था एक प्रमुख कारण रही। जेन जी (सन 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई पीढ़ी) के विद्रोहों ने भारत […]

आज का अखबार, लेख

भारत के विकास के लिए लोकलुभावन नीतियों को सुधारना आवश्यक

आर्थिक लोकलुभावनवाद एक राजनीतिक दृष्टिकोण है जो आर्थिक मुद्दों को आम जनता और भ्रष्ट या वास्तविकता से कटे हुए अभिजात वर्ग के बीच संघर्ष के रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें अक्सर राष्ट्रवाद की तीव्र भावना होती है, जो वैश्वीकरण का विरोध करती है। लोकलुभावनवाद दोबारा चलन में है, इस बार यह अमेरिका, हंगरी और […]

आज का अखबार, लेख

ट्रंप के टैरिफ झटकों ने भारत को दूसरी पीढ़ी के सुधारों की ओर धकेला

भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में जो चरणबद्ध सुधार आरंभ हुए थे और जिन्हें उनके बाद हर अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा और गहरा किया गया, वह सिलसिला अब बाधित हो गया है। डॉनल्ड ट्रंप अब भारत को चीन के साथ भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में एक रणनीतिक साझेदार के रूप […]

आज का अखबार, लेख

भारत और अमेरिका के लिए दांव बहुत बड़े, एक लाभदायक व्यापार समझौते की जरूरत

स्वामी विवेकानंद ने कहा था, ‘दुनिया एक व्यायामशाला है जहां हम स्वयं को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।’ परंतु डॉनल्ड ट्रंप की मनमानी शुल्क दरों के बीच विश्व व्यापार व्यवस्था व्यायामशाला के बजाय कुश्ती का अखाड़ा बनती दिख रही है। ट्रंप ने हर देश के साथ अलग से बातचीत करके व्यापार समझौते करने की […]

आज का अखबार, लेख

इस ‘दिलचस्प समय में’ भारत के लिए है बड़ा अवसर

डॉनल्ड ट्रंप के कदमों ने विश्व अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल मचा दी है। उन्होंने हर प्रकार के आयात पर 10 फीसदी बुनियादी टैरिफ लागू कर दिया और स्टील, एल्युमीनियम, वाहनों और वाहन कलपुर्जों पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही। उन्होंने बेतुके ढंग से जवाबी शुल्क लगाने की बात कही, हालांकि फिर उसके […]

आज का अखबार, लेख

न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन का आ गया है समय

डॉनल्ड ट्रंप के कदमों से दुनिया भर में अनिश्चितता फैल गई है और बराबरी के शुल्क की धमकी देकर उन्होंने भारत की शुल्क व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है। ऐसे में लालफीताशाही, भ्रष्टाचार और अफसरशाही कम कर प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने का वक्त आ गया है। बजट में उल्लिखित विनियमन के अलावा भारत को सरकार का […]

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