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अमेरिकी कोर्ट ने एंट्रिक्स के खिलाफ देवास का फैसला रखा बरकरार, 56.25 करोड़ डॉलर का अवॉर्ड कायमएअर इंडिया A320 का हाइड्रोलिक सिस्टम हुआ था फेल, 4 सेकंड तक नियंत्रण से बाहर रहा विमान: एयरबसमहिंद्रा का भारी ट्रकों पर बड़ा दांव, बाजार हिस्सेदारी 5% करनी की तैयारी; नई डीलरशिप जोड़ेगी कंपनीAMCA लड़ाकू विमान के लिए रिलायंस और रोल्स-रॉयस ने मिलाया हाथ, भारत में बनेगा फाइटर जेट इंजनवैश्विक पटल पर चमका भारत, प्यू रिसर्च के सर्वे में दुनिया के कई देशों ने जताई सकारात्मक रायस्वतंत्रता दिवस पर घूमने का बढ़ा क्रेज, होटल बुकिंग 20% तक बढ़ी; युवाओं में ट्रैवल का जोशलंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की मांग बढ़ी, ब्याज दर स्थिर रहने की उम्मीद से मिला सहारावीकेंड पर भारी डिस्काउंट व ग्राहकों के बेहतर मूड से अच्छी खरीदारी की उम्मीद, रिटेलरों को मजबूत बिक्री का भरोसाबैंक जमा वृद्धि दिसंबर 2016 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर, 31 जुलाई तक 15.4% बढ़ीअमेरिका की नई रिपोर्ट से भारत पर बढ़ा दबाव, चीन के ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क में किया गया शामिल

लेखक : अजय छिब्बर

आज का अखबार, लेख

वैश्विक मंच पर भारतीय प्रवासियों की सफलता: विदेशों में हासिल उपलब्धियों से भारत क्या सीख सकता है?

भारतीयों को दुनिया भर में कामयाबी क्यों मिलती है और वे शीर्ष पर क्यों पहुंचते हैं? इस प्रश्न का उत्तर हमें बता सकता है कि कैसे भारत विश्व में शीर्ष स्तर पर पहुंच सकता है। विदेश में रहने वाला करीब 3.5 करोड़ की संख्या में भारतीय समुदाय, यानी आबादी का करीब 2.5 फीसदी हिस्सा, उन […]

आज का अखबार, लेख

अच्छे दिनों में राजकोषीय गुंजाइश न बनाना भारत की बड़ी भूल, आर्थिक संकट में विकल्प हुए सीमित

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सभी से हाल के संकट से निपटने के लिए तीन ‘एफ’ पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। ये हैं फॉरेन एक्सचेंज, फ्यूल और फर्टिलाइजर यानी विदेशी मुद्रा, ईंधन और उर्वरक। लेकिन उन्हें एक और महत्त्वपूर्ण ‘एफ’ जोड़ने की आवश्यकता हो सकती है: ​फिस्कल स्पेस यानी राजकोषीय गुंजाइश। यदि यह उपलब्ध […]

आज का अखबार, लेख

पश्चिम एशिया संघर्ष से भारत की अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव

होर्मुज स्ट्रेट से आवागमन लगातार बाधित होने के कारण अप्रैल के अपने स्तंभ में मैंने जिस मुद्रास्फीति जनित सुस्ती (स्टैगफ्लेशन) की आशंका जताई थी वह अब भारत और विश्व के लिए स्पष्ट वास्तविकता बनती जा रही है। विश्व बैंक के नवीनतम वस्तु पूर्वानुमान के मुताबिक युद्ध के चलते 2026 में तेल की कीमतें पहले की […]

आज का अखबार, लेख

अव्यवस्थित वैश्विक माहौल में भारत को आर्थिक और सैन्य ताकत बढ़ानी होगी

अमेरिका की आर्थिक नीतियां और सैन्य कार्रवाइयां, आज दुनिया में जोखिम और अनिश्चितता के सबसे बड़े कारणों में से एक बनती जा रही हैं। आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेरिका ने अपने रक्षा विभाग को फिर से ‘युद्ध विभाग’ कहना शुरू कर दिया है और पश्चिम एशिया में एक और युद्ध छेड़ दिया है जो इस […]

आज का अखबार, लेख

व्यापार समझौतों से खुलेगा ‘विकसित भारत’ का रास्ता, ट्रंप टैरिफ के बीच अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती

भारत ने अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के शुल्कों के दंश को उम्मीद से कहीं बेहतर ढंग से झेला। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 2025 में 7 प्रतिशत से अधिक रहने की संभावना है और इस दौरान भुगतान संतुलन भी सकारात्मक बना रहा। शुल्क लागू होने से पहले ही एहतियातन अमेरिका […]

आज का अखबार, लेख

RBI और सरकार में तालमेल तय करेगा भारत के ग्रोथ की राह

हम साल 2026 में प्रवेश कर गए हैं और रिजर्व बैंक के गवर्नर देश की अर्थव्यवस्था को ‘गोल्डीलॉक्स’ बता रहे हैं जहां वृद्धि मजबूत है और मुद्रास्फीति कम। श्रम सुधारों के बाद अगला लक्ष्य यह होना चाहिए कि वित्तीय बाजारों की गहराई बढ़ाकर पूंजी की लागत को कम किया जाए। यह शायद वित्त मंत्रालय और […]

आज का अखबार, लेख

नेहरू को दोष देना बंद करें: बड़ा सवाल यह है कि उनके बाद भारत ने रास्ता क्यों नहीं बदला?

देश की कई समस्याओं के लिए अभी भी नेहरू को जिम्मेदार ठहराया जाता है। अपनी ताजा किताब ‘द नेहरू इरा इकनॉमिक हिस्ट्री ऐंड थॉट ऐंड देयर लास्टिंग इंपैक्ट’ में अरविंद पानगड़िया ने जवाहरलाल नेहरू की सभी आर्थिक गलतियों को याद किया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कैसे इन गलतियों का प्रभाव […]

आज का अखबार, लेख

ढाका से कोलंबो तक: GenZ ने भ्रष्ट शासन पर गुस्सा दिखाना शुरू कर दिया है

हाल ही में आयोजित सरदार पटेल स्मृति व्याख्यान में देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने उचित ही यह बात रेखांकित की है कि बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में सरकारों के गिरने में शासन व्यवस्था एक प्रमुख कारण रही। जेन जी (सन 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई पीढ़ी) के विद्रोहों ने भारत […]

आज का अखबार, लेख

भारत के विकास के लिए लोकलुभावन नीतियों को सुधारना आवश्यक

आर्थिक लोकलुभावनवाद एक राजनीतिक दृष्टिकोण है जो आर्थिक मुद्दों को आम जनता और भ्रष्ट या वास्तविकता से कटे हुए अभिजात वर्ग के बीच संघर्ष के रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें अक्सर राष्ट्रवाद की तीव्र भावना होती है, जो वैश्वीकरण का विरोध करती है। लोकलुभावनवाद दोबारा चलन में है, इस बार यह अमेरिका, हंगरी और […]

आज का अखबार, लेख

ट्रंप के टैरिफ झटकों ने भारत को दूसरी पीढ़ी के सुधारों की ओर धकेला

भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में जो चरणबद्ध सुधार आरंभ हुए थे और जिन्हें उनके बाद हर अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा और गहरा किया गया, वह सिलसिला अब बाधित हो गया है। डॉनल्ड ट्रंप अब भारत को चीन के साथ भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में एक रणनीतिक साझेदार के रूप […]

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