साथ ही वह यह भी चाहते हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र की ओएनजीसी तथा जीएसपीसी जैसी कंपनियों द्वारा वर्तमान या भविष्य में उत्पादित गैस में से उर्वरक संयंत्र यूरिया के उत्पादन के लिये जरूरतों को पूरा करने के बाद कुछ गैस छोड़ दें।
सिंधिया ने प्रेट्र को दिये साक्षात्कार में कहा, कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिये 3 करोड़ टन उर्वरक उत्पादन करने की जरूरत है। यह वास्तव में प्राथमिक कार्य है लेकिन इसके बावजूद हमें देखना होगा क्या कुछ गैस बिजली क्षेत्र के लिये कुछ निकाला जा सकता है।
मंत्री ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में बिजली संयंत्रों के लिये गैस प्राप्त करना समय की जरूरत है।
फिलहाल, 18,713 मेगावाट क्षमता की गैस आधारित बिजली संयंत्रों के लिये 7.2 करोड़ घन मीटर प्रतिदिन गैस की जरूरत है लेकिन इसमें से केवल एक तिहाई गैस ही मिल पा रही है। इसके अलावा 8,000 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं चालू होने के लिये तैयार होने वाली हैं लेकिन उनके लिये गैस की कोई व्यवस्था नहीं हुई है।
जारी भाषा