उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की नई श्रृंखला के जारी होने के बाद अर्थशास्त्रियों को नीतिगत रीपो रेट में लंबे समय तक ठहराव की उम्मीद है। इससे महंगाई बढ़ने के रुझान के संकेत मिलते हैं और निकट अवधि के अनुमानों में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा कोई बदलाव फिर किए जाने की संभावना कम हो गई है।
अगली नीतिगत कार्रवाई दरों में बढ़ोतरी की रहने की संभावना है। यह महंगाई दर के आंकड़ों और उस समय की स्थिति पर निर्भर होगा। बहरहाल अर्थशास्त्रियों ने कहा कि अगले 3 से 4 महीनों में नीतिगत दर स्थिर रखे जाने की संभावना है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘सूचकांक की बनावट और खाद्य वस्तुओं के लिए आधार का असर कम किए जाने से हम उम्मीद कर सकते हैं कि महंगाई दर आने वाले महीनों में बढ़ेगी। इसका मतलब यह है कि रिजर्व बैंक दरों में लंबा ठहराव रखेगा। अगले वर्ष के लिए रिजर्व बैंक के महंगाई दर के अनुमान में बहुत ज्यादा बदलाव होने की संभावना नहीं है।’
भारतीय रिजर्व बैंक की 6 सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति ने पिछले साल फरवरी से नीतिगत रीपो रेट में 125 आधार अंक की कटौती करके इसे 5.25 प्रतिशत कर दिया है। समिति ने फरवरी में हुई समीक्षा बैठक में यथास्थिति बरकरार रखने का फैसला किया था।
उन्होंने कहा, ‘अगली कार्रवाई संभवतः नीतिगत दर में बढ़ोतरी की हो सकती है, जब महंगाई दर ऊपर जाएगी। यह स्थिति पर निर्भर होगा। लेकिन अगले 3-4 महीने तक नीतिगत दर में लंबा ठहराव रहेगा।’
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही और वित्त वर्ष2027 की दूसरी तिमाही के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर में संशोधन कर 4 प्रतिशत और 4.2 प्रतिशत कर दिया है, जबकि पहले क्रमशः 3.9 प्रतिशत और 4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।
रिजर्व बैंक ने अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते सहित विभिन्न वजहों को देखते हुए वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही और दूसरी तिमाही के लिए वृद्धि अनुमान भी 20 आधार अंक बढ़ा दिया था।
एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज में मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा, ‘हमें उम्मीद नहीं है कि महंगाई दर की नई श्रृंखला निकट अवधि के हिसाब से नीति पर असर डालेगी। दरों में लंबे समय तक ठहराव रह सकता है, यह वृद्धि और महंगाई दर के आंकड़ों और भारत-अमेरिका समझौता होने के बाद आत्मविश्वास में सुधार पर निर्भर होगा।’
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में मुख्य आर्थिक सलाहकार कणिका पसरीचा को अभी नीतिगत दर में किसी बदलाव की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। उन्होंने कहा, ‘रिजर्व बैंक के लिए बेहतर यह होगा कि देखो और इंतजार करो की रणनीति अपनाए और कोई विचार पेश करने से पहले धारणाओं और गति पर नजर रखे।’
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता ने कहा, ‘महंगाई दर के हिसाब से देखें तो नजरिये में कोई बदलाव नहीं आया है। वित्त वर्ष 2027 में महंगाई दर में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है।’
रिजर्व बैंक ने जीडीपी वृद्धि के संशोधित अनुमान को वित्त वर्ष 2027 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए बढ़ाकर क्रमशः 6.9 प्रतिशत और 7 प्रतिशत कर दिया है, जबकि पहले 6.7 प्रतिशत ओर 6.8 प्रतिशत का अनुमान लगाया था। हालांकि रिजर्व बैंक ने पूरे वित्त वर्ष लिए वृद्धि अनुमान में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, क्योंकि उसे जीडीपी आंकड़ों की नई श्रृंखला का इंतजार है। मौद्रिक नीति समिति की अगली समीक्षा बैठक 6 से 8 अप्रैल 2025 को होनी प्रस्तावित है।