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अमेरिकी बाजार में बिना शुल्क प्रवेश पर होगी बात: पीयूष गोयल

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गोयल ने कहा कि अमेरिका-बांग्लादेश समझौते में जो है, वह ‘हमारे समझौते में भी होगा’। भारत और अमेरिका मार्च के अंत तक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।

Last Updated- February 12, 2026 | 10:35 PM IST
Piyush Goyal

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में भारत को भी अमेरिकी धागे और कपास से बने कपड़ों पर शुल्क में उसी तरह की छूट हासिल होगी, जैसी बांग्लादेश को मिली है। बांग्लादेश ने इसी हफ्ते अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किया है।

अमेरिका के साथ भारत के समझौते का ब्योरा अभी सामने नहीं आया है मगर इसके लागू होने से भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग को राहत मिल सकती है। भारतीय कपड़ा उद्योग को चिंता है कि पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ समझौता बेहतर हुआ तो उसे नुकसान हो सकता है। मगर गोयल ने संवाददाताओं से कहा, ‘बांग्लादेश को जो मिला है, वो भारत को भी फाइनल एग्रीमेंट में मिलने वाला है।’

अमेरिका के साथ इसी हफ्ते हुए पारस्परिक शुल्क समझौते के मुताबिक बांग्लादेश से आयात पर पारस्परिक शुल्क घटकर 19 फीसदी रह जाएगा। अगर कपड़ा अमेरिकी कपास और मानव निर्मित फाइबर से तैयार होता है तो अमेरिकी बाजार में उस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। अभी बांग्लादेश से अमेरिका को निर्यात हो रहे कपड़ों पर 31 फीसदी आयात शुल्क लगता है, जिसमें सबसे पसंदीदा देश पर लगने वाला 12 फीसदी आयात शुल्क और 19 फीसदी पारस्परिक शुल्क है। अमेरिकी फाइबर इस्तेमाल होने पर पारस्परिक शुल्क खत्म हो जाएगा और कुल 12 फीसदी आयात शुल्क लगेगा।

गोयल ने कहा कि अमेरिका-बांग्लादेश समझौते में जो है, वह ‘हमारे समझौते में भी होगा’। भारत और अमेरिका मार्च के अंत तक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।

मंत्री ने भारत के कपास किसानों पर पड़ने वाले संभावित असर के बारे में चिंता भी दूर कीं। उन्होंने कहा कि अमेरिका में कपास का काफी कम उत्पादन होता है और केवल 50 लाख डॉलर का कपास निर्यात होता है, जबकि भारत के लिए लक्ष्य 50 अरब डॉलर रखा गया है। उद्योग से जुड़े 4 सूत्रों ने कहा कि गोयल ने उद्योग के प्रमुखों को कल शाम नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में हुई बैठक के दौरान भी आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि उद्योग को चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि भारत भी अमेरिका के साथ उसी तरह की कर व्यवस्था वाले कर समझौते की कोशिश कर रहा है।

बैठक में शामिल रहे एक सूत्र ने कहा, ‘ट्रंप प्रशासन द्वारा जारी शुरुआती शुल्क दिशानिर्देशों के मुताबिक अगर किसी देश के उत्पादों में 20 फीसदी अमेरिकी कच्चा माल लगा होगा तो वह उस कच्चे माल से तैयार उत्पाद को बिना शुल्क के अमेरिका को निर्यात कर सकता है। इसलिए अमेरिकी बाजार में बिना शुल्क प्रवेश केवल बांग्लादेश के लिए नहीं है। मंत्री ने हमें आश्वस्त किया कि भारत भी इस तरह के समझौते पर विचार कर सकता है।’एक अन्य सू्त्र ने कहा, ‘इसका मतलब है कि अमेरिकी बाजार में अपनी बढ़त प्रतिद्वंद्वी बांग्लादेश के हाथ गंवाने या उसे कपास निर्यात में कमी आने की कोई चिंता नहीं है।’

गोयल ने कहा कि भारत के करीब 90-95 फीसदी कृषि उत्पाद इस व्यापार समझौते के बाहर हैं और इस तरह समझौते में किसानों के हितों का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि भारत ने फलों, सब्जियों, एथनॉल, तंबाकू, तमाम दलहन और मिलेट को समझौते से बाहर रखा है।

मंत्री की यह प्रतिक्रिया विपक्ष के नेता राहुल गांधी के इस आरोप के बाद आई कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता पूरी तरह घुटने टेकने जैसा है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा अमेरिका के हाथों सौंप दी गई है और किसानों के हितों के साथ समझौता किया गया है।

कपास निर्यात का गणित

कयास लगाए जा रहे थे कि अमेरिकी कदम से भारत से बांग्लादेश को होने वाले कपास निर्यात पर असर पड़ सकता है। बांग्लादेश अपनी कताई मिलों के लिए हर साल करीब 85 लाख गांठ कपास आयात करता है। वह ब्राजील, भारत और अफ्रीका से कपास खरीदता है और पिछले कुछ साल में उसने अमेरिका से ज्यादा कपास आयात नहीं किया है। बांग्लादेश में काफी कपास होता है मगर वहां के परिधान विनिर्माण उद्योग के लिए यह पर्याप्त नहीं है। इसलिए बांग्लादेश भारी मात्रा में धागे और कपड़ा भी आयात करता है। लेकिन मानव निर्मित फाइबर तैयार करने में उसकी गहरी पैठ है। भारत हर साल बांग्लादेश को औसतन 12 लाख गांठ कपास निर्यात करता है। भारत में सालाना करीब 370 लाख गांठ कपास होता है और देसी मांग पूरी करने के लिए वह 50 लाख गांठ का आयात भी करता है।

उद्योग के एक सूत्र ने कहा, ‘इससे साफ है कि मौजूदा उत्पादन के बीच भी भारत के पास अतिरिक्त कपास नहीं है। इसलिए मौजूदा और अनुमानित हालात में भारत की बढ़त खत्म नहीं होने जा रही। बल्कि ब्रिटेन और यूपोरीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते तथा अमेरिका से साथ होने जा रहे समझौते से भारत का कपड़ा और परिधान निर्यात काफी बढ़ सकता है।’

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First Published - February 12, 2026 | 10:32 PM IST

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