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एटेरो रेयर अर्थ कॉरिडोर में लगाएगी 7,000 करोड़ रुपये, रिफाइनिंग-प्रोसेसिंग पर फोकस

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एटेरो मौजूदा समय में दुर्लभ मैग्नेट सहित सरकार द्वारा चिह्नित 30 महत्त्वपूर्ण खनिजों में से लगभग 22 पर ध्यान दे रही है।

Last Updated- February 13, 2026 | 10:52 PM IST
rare Earth metals

प्रमुख खनिज एवं रीसाइक्लिंग फर्म एटेरो केंद्र की प्रस्तावित दुर्लभ मैग्नेट और महत्वपूर्ण खनिज कॉरिडोर योजना में रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग सुविधाओं के तहत अगले पांच वर्षों में लगभग 7,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। कंपनी के सीईओ नितिन गुप्ता ने बिजनेस स्टैंडर्ड को एक साक्षात्कार में बताया, ‘अगले पांच वर्षों में, हम लगभग 7,000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे। यह सब सरकार द्वारा घोषित कॉरिडोर के अंदर होगा।’

कंपनी दुर्लभ मैग्नेट और लीथियम कार्बोनेट, कोबाल्ट, निकल तथा ग्रेफाइट सहित अन्य महत्त्वपूर्ण खनिजों के लिए रीफाइनिंग सुविधाएं स्थापित करने के लिए संभावित स्थानों के रूप में तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश पर विचार कर रही है। एटेरो मौजूदा समय में दुर्लभ मैग्नेट सहित सरकार द्वारा चिह्नित 30 महत्त्वपूर्ण खनिजों में से लगभग 22 पर ध्यान दे रही है।

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के अपने बजट भाषण में कहा कि केंद्र ओडिशा, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में रेयर-अर्थ कॉरिडोरों का समर्थन करेगा। इन कॉरिडोरों के जरिये प्रमुख खनिजों के खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

यह कदम दुर्लभ-मैग्नेट के लिए चीन पर निर्भरता कम करने के भारत के प्रयासों के बीच उठाया गया है। ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइनों, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा प्रणालियों के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। यह कॉरिडोर पहल पिछले नवंबर में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा रेयर अर्थ पर्मानेंट मैग्नेट्स (आरईपीएम) के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए स्वीकृत 7,280 करोड़ रुपये की योजना पर आधारित है।

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First Published - February 13, 2026 | 10:16 PM IST

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