facebookmetapixel
Advertisement
Sugar Price: मॉनसून की मार से चीनी महंगी, जानें क्यों बढ़ रही हैं कीमतें और आगे क्या होगा?कच्चे तेल की कीमतें घटीं, फिर भी पेट्रोल-डीजल महंगा क्यों? हरदीप पुरी ने बताई वजहInvesco Mutual Fund ने SIF सेगमेंट में रखा कदम, लॉन्च किया समिट इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट फंड; क्या है इसमें खास?India-EU FTA: 10-12 दिन में पूरी होगी कानूनी समीक्षा, गोयल बोले- साल के अंत तक होगी डील30 चुनिंदा मिडकैप शेयरों में निवेश का मौका, 17 जुलाई तक खुला रहेगा MOMF का नया इंडेक्स फंडMirae Asset MF ने उतारे 2 नए मिडकैप फंड, ₹5,000 से निवेश शुरू; प्राइस मोमेंटम वाले शेयरों पर फोकसविदेशी फंड्स में लौटी निवेशकों की दिलचस्पी, 40% रिटर्न और ₹7,600 करोड़ के इनफ्लो ने बदला ट्रेंडSBI Mutual Fund का IPO अगले हफ्ते आ सकता है, ₹11,400 करोड़ जुटाने की तैयारी: रिपोर्टModi-Takaichi बैठक में बड़ा फैसला! AI, ग्रीन एनर्जी और डिफेंस में भारत-जापान मिलकर करेंगे कामRed Bull से Monster तक कई एनर्जी ड्रिंक कंपनियों पर FSSAI का शिकंजा, भ्रामक दावों पर भेजा नोटिस

ईयू-ब्रिटेन कारोबार की रणनीति में फेरबदल करेगी अशोक लीलैंड

Advertisement

कंपनी खाड़ी सहयोग परिषद क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए भी इस योजना पर विचार कर रही है।

Last Updated- February 12, 2026 | 10:21 PM IST
Ashok Leyland

हिंदुजा समूह की प्रमुख भारतीय कंपनी अशोक लीलैंड यूरोपीय संघ (ईयू) और ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के मद्देनजर यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के अपने कारोबार की रणनीति को फिर से तैयार कर सकती है। कंपनी के चेयरमैन धीरज हिंदुजा ने यह जानकारी दी है।

ब्रिटेन में अपनी ईवी कंपनी स्विच मोबिलिटी की एक इकाई बंद करने के बाद कंपनी इलेक्ट्रिक बसों के अपने उत्पादन आधार को ब्रिटने से हटाकर यूएई के रास अल खैमाह (आरएके) में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में लगी थी। यह सऊदी अरब में एक विनिर्माण इकाई स्थापित करने की प्रक्रिया में भी लगी हुई है। भारत द्वारा व्यापार सौदों को अंतिम रूप दिए जाने के साथ कंपनी अब सीधे यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के बाजारों में निर्यात करने की संभावना पर विचार कर रही है।

हिंदुजा ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हमारी आकांक्षा यूरोपीय बाजार में विकास करने की है। हमारे पास एक नया मॉडल ई1 (स्विच द्वारा इलेक्ट्रिक बस) है। हमारा इरादा इन वाहनों को आरएके से निर्यात करने का था। नए एफटीए से ऐसा रास्ता खुलता है जिसके जरिये भारत में उत्पादन करना भी फायदेमंद हो सकता है। हम लागत के मानकों को ध्यान में रखते हुए सबसे अच्छे विकल्प पर विचार करेंगे।’

कंपनी खाड़ी सहयोग परिषद क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए भी इस योजना पर विचार कर रही है। आरएके की इकाई पहले से ही 6,000 वाहनों की अपनी पूरी क्षमता पर चल रही है। कंपनी को इस साल इस क्षेत्र में लगभग 7,000 से 8,000 वाहनों की बिक्री की उम्मीद थी। इसलिए सऊदी अरब में 2,500 वाहन क्षमता वाला नया असेंबली संयंत्र बनाने की योजना है, जिससे कंपनी को यूएई से निर्यात किए गए वाहनों पर सीमा शुल्क बचाने का लाभ मिलेगा। बीएस

Advertisement
First Published - February 12, 2026 | 10:16 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement