facebookmetapixel
Advertisement
NSE ने सेबी के पास IPO पेपर जमा किए, ₹30,000 करोड़ जुटाने की योजना; देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बनेगाBrazil में फ्लेक्स फ्यूल 70% सस्ता क्यों?मुंबई में जल संकट गहराया, BMC की पाबंदियों से 2.07 लाख घरों की डिलीवरी पर खतराSuzlon 2.0: क्या शेयर अगली रैली के लिए तैयार है?India-EU FTA पर साल के अंत तक लगेगी मुहर, 99% भारतीय निर्यात पर घटेगा शुल्कभारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा सवाल! सिर्फ 10 दिन का रणनीतिक तेल भंडार, CEEW की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंताSEBI की चेतावनी: अनलिस्टेड शेयरों में निवेश से पहले सावधान! इन प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग से बचेंस्मॉल कैप निवेश का सही तरीका क्या है? एक्टिव, पैसिव या स्मार्ट-बीटा फंड; कहां मिलेगा बेहतर रिटर्नJioBlackRock AMC ने ओवरनाइट फंड को जियो पेमेंट्स बैंक के ‘सेविंग्स प्रो’ फीचर से जोड़ा, निवेशकों को मिलेंगे ये फायदेReliance AGM 2026: Jio IPO से AI तक, मुकेश अंबानी के बड़े ऐलान पर टिकी बाजार की नजर

ग्राहकों को भ्रमित करने के लिए न हो आदेश का उपयोग

Advertisement
Last Updated- April 13, 2023 | 9:30 AM IST
hotel bill

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि सीसीपीए (केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण) के दिशानिर्देशों पर अंतरिम स्थगनादेश का इस्तेमाल ग्राहकों को भ्रमित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए कि सेवा शुल्क को न्यायालय की मंजूरी मिल गई है। न्यायालय ने अंतरिम आदेश में उन दिशानिर्देशों पर रोक लगा दी थी, जिसमें खानपान की दुकानों को सेवा शुल्क लगाने से रोका गया है।

नैशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन आफ इंडिया (एनआरएआई) और फेडरेशन आफ होटल ऐंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन आफ इंडिया (एफएचआरएआई) की याचिका की सुनवाई कर रहीं न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने एसोसिएशनों से कहा कि वे बताएं कि खानपान की कितनी दुकानें ग्राहकों को यह बताने को इच्छुक हैं कि सेवा शुल्क अनिवार्य नहीं है।

एसोसिएशनों ने सीसीपीए के 4 जुलाई 2022 के दिशानिर्देशों को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया है कि रेस्टोरेंट और होटल खाने के बिल पर स्वतःस्फूर्त सेवा शुल्क नहीं लगा सकते।

Advertisement
First Published - April 13, 2023 | 9:30 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement