FIIs: विदेशी निवेशकों ने जनवरी 2026 में भारतीय शेयर बाजार से 33,336 करोड़ रुपये निकाल लिए। यह अगस्त 2025 के बाद किसी एक महीने में उनकी सबसे बड़ी बिकवाली है। हालांकि, उन्होंने बीते महीने के दौरान चुनिंदा तौर पर मेटल शेयरों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई।
ब्रोकरेज फर्म पीएल कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2025 के बाद से लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। इस दौरान केवल अक्टूबर 2025 में नेट रूप से विदेशी निवेश आया था। जनवरी की बिकवाली में सबसे ज्यादा बिकवाली डिफेंस और कंजंप्शन से जुड़े क्षेत्रों जैसे तेजी से बिकने वाले कंज्यूमर गुड्स, हेल्थ सर्विसेज और कंज्यूमर सर्विसेज में हुई। आईटी सेक्टर में भी अप्रैल 2025 से लगातार बिकवाली देखी जा रही है। सिर्फ जून और दिसंबर 2025 में हल्की खरीद हुई थी।
तेजी से बिकने वाले उपभोक्ता सामान सेक्टर में जनवरी 2026 में 7,497 करोड़ रुपये की निकासी हुई। यह जनवरी 2025 के 5,428 करोड़ रुपये और दिसंबर 2025 के 5,844 करोड़ रुपये से ज्यादा है। हेल्थ सेक्टर में भी बिकवाली बढ़ी और निकासी 6,162 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह दिसंबर 2025 में 2,994 करोड़ रुपये थी। कंज्यूमर सर्विसेज में जनवरी के दौरान 5,513 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई।
इंडेक्स में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में भी जनवरी 2026 में 8,592 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई। हालांकि यह दिसंबर 2025 के 10,525 करोड़ रुपये से कम है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सेक्टर में निवेश का स्तर लंबे समय के औसत से काफी नीचे है।
दूसरी ओर, मेटल और माइनिंग सेक्टर में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। जनवरी 2025 में इस सेक्टर से 2,382 करोड़ रुपये निकले थे। दिसंबर 2025 में इसमें 2,984 करोड़ रुपये आए और जनवरी 2026 में यह बढ़कर 11,526 करोड़ रुपये हो गए। यह लंबे समय के औसत 145.7 करोड़ रुपये से काफी ज्यादा है, जिससे साफ है कि निवेशकों का रुझान अब धातु से जुड़े शेयरों की ओर बढ़ रहा है।
कैपिटल गुड्स सेक्टर में भी लगातार बिकवाली के बाद रुझान बदला और जनवरी में 2,761 करोड़ रुपये का निवेश आया। हालांकि यह भी पुराने औसत स्तर से कम है।
रिपोर्ट के अनुसार, आईटी, बिजली, रियल एस्टेट, टेलीकॉम और कंस्ट्रक्शन मेटीरियल जैसे सेक्टर्स में जनवरी के दौरान भी नेट बिकवाली जारी रही। कुल मिलाकर आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशक डिफेंसिव और फाइनेंशियल शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटा रहे हैं। जबकि चुनिंदा तौर पर मेटल और कुछ साइकेलिकल सेक्टर्स में निवेश बढ़ा रहे हैं।