पब्लिक सेक्टर बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने शेयर बाजार में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए टेक दिग्गज TCS को पीछे छोड़ दिया है। बाजार पूंजीकरण यानी मार्केट कैप के आधार पर अब SBI देश की चौथी सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है। बुधवार सुबह 11:55 बजे के आंकड़ों के अनुसार SBI का मार्केट कैप ₹10.78 लाख करोड़ पर पहुंच गया, जबकि TCS का मार्केट कैप ₹10.68 लाख करोड़ रहा। इससे पहले SBI निजी क्षेत्र के ICICI बैंक को भी पीछे छोड़ चुका था। इस समय देश में सबसे अधिक मार्केट कैप रिलायंस इंडस्ट्रीज का है, उसके बाद HDFC बैंक और तीसरे स्थान पर भारती एयरटेल है।
SBI के शेयर में हाल के दिनों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। बुधवार को इंट्रा-डे ट्रेडिंग में शेयर 3% चढ़कर ₹1,174.80 के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। पिछले तीन कारोबारी दिनों में शेयर करीब 10% उछल चुका है। अगर एक महीने की बात करें तो SBI का शेयर लगभग 16% बढ़ा है, जबकि इसी अवधि में सेंसेक्स केवल 0.5% ही ऊपर गया। दूसरी ओर TCS में 9% की गिरावट आई है और ICICI बैंक भी हल्की कमजोरी के साथ कारोबार करता दिखा।
SBI के शेयर में तेजी की सबसे बड़ी वजह उसके दिसंबर तिमाही के मजबूत नतीजे हैं। बैंक ने ₹21,028 करोड़ का अब तक का सबसे ज्यादा तिमाही मुनाफा दर्ज किया है, जो पिछले साल की तुलना में 24.5% ज्यादा है। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम 9% बढ़कर ₹45,190 करोड़ रही। नेट इंटरेस्ट मार्जिन करीब 2.99% रहा, जो स्थिर प्रदर्शन को दिखाता है। मजबूत कमाई और बेहतर एसेट क्वालिटी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
बैंक मैनेजमेंट का मानना है कि RBI के हालिया नियमों से REITs और मर्जर एंड एक्विजिशन फाइनेंसिंग जैसे क्षेत्रों में नए अवसर मिलेंगे। SBI ने अपने कर्ज वृद्धि लक्ष्य को बढ़ाकर 13–15% कर दिया है और FY26 के लिए मार्जिन लगभग 3% के आसपास रहने का अनुमान जताया है। बैंक की कॉरपोरेट लोन पाइपलाइन मजबूत बनी हुई है, जिससे आगे भी ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है।
ब्रोकरेज फर्मों ने भी SBI के प्रदर्शन की सराहना की है। Axis Securities का कहना है कि बड़े बैंकों में SBI का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है और बैंक की एसेट क्वालिटी मजबूत है। फर्म ने शेयर पर BUY रेटिंग देते हुए ₹1,280 का टारगेट रखा है। वहीं JM Financial ने भी BUY रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट बढ़ाकर ₹1,250 कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर मुनाफा और नियंत्रित लागत के कारण आने वाले वर्षों में भी SBI की कमाई मजबूत रह सकती है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।