facebookmetapixel
Advertisement
क्रेडिट कार्ड बंद करने की सोच रहे हैं? कही जेब पर भारी न पड़ जाए ‘प्लास्टिक मनी’ से दूरी का यह फैसला!South India में मजदूरों की भारी किल्लत: कंपनियां दे रही हैं फ्री फ्लाइट और तगड़ा सैलरी हाइक!अगले हफ्ते स्टॉक स्प्लिट करने जा रही है यह कंपनी, निवेशकों को 1 के बदले मिलेंगे 2 शेयर‘अब सिर्फ ट्रायल नहीं, कंपनियों के कामकाज का मुख्य हिस्सा बना AI’, TCS चेयरमैन ने किया दावापेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने से 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स बेहाल, 5 घंटे काम बंद रखकर जताएंगे विरोधNPS सब्सक्राइबर्स को बड़ी राहत: अब गंभीर बीमारी में सरेंडर कर सकेंगे एन्युटी पॉलिसी, नियमों में हुआ बदलावExplainer: क्यों बढ़ रहा है टाटा संस पर पब्लिक होने का दबाव? अंदरूनी कलह व RBI के नियमों का पूरा सचDividend Stocks: अगले हफ्ते L&T और Havells समेत ये 18 कंपनियां करेंगी पैसों की बारिश, देखें पूरी लिस्टभारतीयों के लिए दुबई में घर खरीदना होगा आसान, रेजीडेंसी वीजा के लिए प्रॉपर्टी की न्यूनतम कीमत सीमा खत्मआसमान में भारत की ताकत बढ़ाने की जरूरत, वायुसेना ने ‘घातक’ स्टेल्थ ड्रोन कार्यक्रम को तेज करने पर दिया जोर

Deepfakes- फर्जी वीडियो रोकने के लिए त्वरित ढांचे की जरूरत: एक्सपर्ट्स

Advertisement

इन्फ्लुएंसर जारा पटेल के वीडियो में AI के जरिये अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के चेहरे का किया गया इस्तेमाल

Last Updated- November 20, 2023 | 10:59 PM IST
deepfakes

दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने हाल में ही आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल से अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के विकृत (फर्जी) वीडियो की शिकायत मिलने पर प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की थी। इस मामले ने एक बार फिर एआई जैसी अत्याधुनिक तकनीक के नियमन के विषय पर बहस तेज कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ट ने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 465 (फर्जीवाड़ा) और 469 (छवि को नुकसान पहुंचाने) और सूचना-प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधान 66सी (पहचान चोरी करना) और 66ई (निजता का उल्लंघन) के तहत मामला दर्ज किया है।

सिंघानिया ऐंड कंपनी में पार्टनर कुणाल शर्मा कहते हैं, ‘फर्जी वीडियो के मामलों में कलाकारों के कानूनी अधिकार पूरी तरह परिभाषित नहीं हो पाए हैं। मगर कुछ सामान्य सिद्धांत तो इसमें जरूर लागू हो सकते हैं। मसलन, कलाकार के पास कॉपीराइट, निजता और प्रचार के अधिकार प्राप्त मौजूद हैं।’

जिस वीडियो की बात चल रही है उसमें अभिनेत्री काले एवं तंग लिबास में एक लिफ्ट के अंदर देखी जा सकती हैं। यह वीडियो सबसे पहले अंग्रेजी-भारतीय मूल की इन्फ्लुएंसर जारा पटेल ने पोस्ट की थी। मगर एआई के इस्तेमाल से इसमें मंदाना का चेहरा लगा दिया गया था।

यह वीडियो सामने आने के कुछ दिनों बाद कटरीना कैफ की आने वाली नई फिल्म ‘टाइगर 3’ से उनकी एक फोटो के साथ छेड़छाड़ की घटना सामने आई थी।

मगर ऐसे वीडियो पर कैसे नजर रखी जाती है? फर्जी वीडियो के अक्सर ऐसे पहलू होते हैं जिनका अंदाजा तकनीकी विश्लेषण के बाद लगाया जा सकता है। क्रेड ज्यूरे में मैनेजिंग पार्टनर अंकुर महिंद्रू कहते हैं, ‘जांच एजेंसियां आईपी अड्रेस मालूम करने वाली, मेटाडाटा एनालिसिस और ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (ओएसआईएटी) जैसी विशेष तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं। फेशियल रिकग्निशन और कन्टेंट रिकग्निशन अल्गोरिद्म जैसी अत्याधुनिक तकनीक भी फर्जी वीडियो अपलोड करने से जुड़ी गतिविधि और इसके अनधिकृत प्रसार रोकने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।’

अनधिकृत वीडियो का पता लगाने वाले मौजूदा कानूनी ढांचे में भारतीय तकनीक अधिनियम (धारा 67ए), कॉपीराइट एक्ट, 1957 और भारतीय दंड संहिता, 1860 (धारा 292) के प्रावधान शामिल हैं। न्यायालयों ने अक्सर इन मामलों में अनधिकृत सामग्री दिखाने वाले यूआरएल या पोस्ट हटाने के निर्देश दिए हैं।

आनंद ऐंड नाईक में आईपीआर वकील एवं ज्वाइंट मैनेजिंग पार्टनर सफीर आनंद कहते हैं, ‘भारत में सूचना-प्रौद्योगिकी अधिनियम के अंतर्गत एक विशेष प्रावधान है जो किसी व्यक्ति की निजता के उल्लंघन के मामले में लागू हो सकता है। ऐसे मामलों में अपराध साबित होने के बाद 3 वर्षों तक कारावास या 2 लाख लाख रुपये तक आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।

फर्जी वीडियो या विकृत तस्वीर प्रकाशित करने वाले प्लेटफॉर्म भी इस संबंध में नोटिस मिलने के बाद कदम नहीं उठाते हैं तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।’दिल्ली महिला आयोग ने मंदाना का वीडियो प्रसारित होने के बाद दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

आयोग ने कहा कि अब तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। उसने इस मामले में दर्ज एफआईआर में आरोपी व्यक्तियों के बारे में जानकारी 17 नवंबर तक मांगी थी। केंद्र सरकार ने भी सोशल मीडिया कंपनियों को पूरी सतर्कता बरतने और भ्रामक सूचना एवं फर्जी तस्वीरों को पहचानने में सभी उपाय करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार ने कहा है कि सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे मामलों में आईटी नियम, 2021 के अंतर्गत निहित समयसीमा के अंतर्गत कदम उठाने होंगे और उन्हें उपयोगकर्ताओं (यूजर) को ऐसी सूचना या सामग्री पोस्ट करने से रोकना होगा। सरकार का कहना है कि किसी आपत्तिजनक सामग्री की सूचना मिलने के 36 घंटे बाद उसे हटाना अनिवार्य होगा।

मगर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले रोकने के लिए उपयुक्त एवं ठोस नियमन की दरकार है। शर्मा कहते हैं, ‘कानून में यह परिभाषा बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए कि किसी तरह के वीडियो फर्जी या आपत्तिजनक वीडियो की श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा एआई की मदद से तैयार वीडियो का इस्तेमाल ठगी सहित अन्य अपराधों के लिए इस्तेमाल होने से भी रोकने के प्रावधान होने चाहिए।’

असल समस्या तो तब खड़ी होती है जब ऐसे मामले से निपटने में काफी वक्त निकल जाता है। करंजावाला ऐंड कंपनी में पार्टनर मेघना मिश्रा कहती हैं, ‘इन वीडियो का प्रसार तत्काल रोकना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इससे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक निगरानी ढांचे की आवश्यकता है। हमारे यहां कानूनी प्रक्रिया सभी पहलुओं पर विचार तो जरूर करती है मगर एक तय रफ्तार से ही आगे बढ़ती है।’

Advertisement
First Published - November 20, 2023 | 10:59 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement