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पांच साल में सामने आएंगे AI के फायदे, भारत के लोगों को ज्यादा उम्मीद

AI positive impact : भारत में 75 फीसदी लोगों ने कहा कि एआई अगले पांच वर्षों में नौकरियों और उद्योगों का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र ही बदल देगा, जो बहुत अच्छी बात होगी।

Last Updated- February 13, 2024 | 11:36 PM IST
Artificial intelligence

एआई को लेकर दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले भारत के लोग अधिक आशावादी हैं। अधिकांश भारतीयों का मानना है कि निकट भविष्य या दीर्घावधि में आर्टिफिशल इंटेलीजेंस यानी एआई के सकारात्मक प्रभाव पड़ेंगे। यह बात गूगल और आईपीएसओएस द्वारा हाल ही में किए गए एक सर्वे में सामने आई है।

सर्वेक्षण में शामिल 18 वर्ष से अधिक आयु के 1000 भारतीय नागरिकों में लगभग 82 फीसदी उम्मीद करते हैं कि स्वास्थ्य, देखभाल, नौकरी और जटिल मुद्दों को समझने की योग्यता जैसे क्षेत्रों में एआई अगले पांच वर्षों में आम जनजीवन को बहुत अधिक लाभ पहुंचाएगा। एआई को लेकर लोगों के नजरिए को परखने के लिए आयोजित ‘एआई के साथ हमारा जीवन : आज की हकीकत और भविष्य के वादे’ नाम से किए गए सर्वे में अन्य देशों के औसतन 54 फीसदी लोग ही इस क्रांतिकारी टूल को लेकर आशावादी दिखे।

सर्वे में शामिल 70 फीसदी भारतीयों ने बताया कि वे पहले ही एआई के सकारात्मक प्रभाव का अनुभव कर चुके हैं। सूचनाएं खंगालने के अधिकांश तरीकों पर इसका असर दिखा। गूगल इंडिया के उपाध्यक्ष और कंट्री हेड संजय गुप्ता ने कहा, ‘एआई की पहली कंपनी होने के नाते एआई को लेकर भारतीयों के सकारात्मक नजरिए को लेकर हम बहुत अधिक उत्साहित हैं। आईपीएसओएस सर्वे ने इस बात को साबित कर दिया है कि एआई की मदद से आर्थिक वृद्धि को लेकर भारतीय लोगों को बहुत उम्मीदें हैं।’

उन्होंने कहा कि इंडिया फर्स्ट नजरिए के साथ गूगल भारतीयों की उम्मीदों के अनुसार काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, ‘अपनी एआई पहल के प्रभाव का दायरा और अधिक बढ़ाने के लिए हम सरकार और पारिस्थितिकी तंत्र के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत कर यह सुनिश्चित करेंगे कि हर नई खोज देश और व्यक्तिगत आधार पर संभावनाओं के नए द्वार खोलती है।’

सर्वे में कहा गया है कि अधिकांश भारतीय खासकर एआई के भविष्य को लेकर बहुत अधिक आशावादी नजर आए। एआई के निकट भविष्य में सकारात्मक प्रभावों को आशावान लोगों से लगभग दोगुने लोगों का मानना है कि एआई के जरिए अगले 25 वर्षों में विकास का पूरा परिदृश्य ही बदल जाएगा। यही नहीं, 77 फीसदी का मानना है कि इससे गरीबी कम करने में मदद मिलेगी। वहीं, 86 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि इसकी सहायता से परिवहन व्यवस्था में सुधार करने की बहुत अधिक संभावनाएं हैं।

इसके अतिरिक्त भारतीय लोग यह भी महसूस करते हैं कि एआई एप्लीकेशन स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा, अंतरिक्ष और जलवायु जैसे क्षेत्रों के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण होने जा रहा है।

सर्वे में पाया गया कि भारतीय मानते हैं कि एआई का नौकरियों को लेकर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। लगभग 80 फीसदी कहते हैं कि यह व्यक्तिगत स्तर पर बहुत अधिक लाभदायक टूल होगा। सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में भी इतने ही लोग एआई के सकारात्मक प्रभावों को लेकर आशावाद से भरे हैं। वैश्विक स्तर पर ऐसा मानने वालों की औसत संख्या 65 फीसदी है।

खास यह कि 95 फीसदी भारतीयों ने अपने कार्य स्थल पर एआई के बारे में बातचीत की है। भारत में 75 फीसदी लोगों ने कहा कि एआई अगले पांच वर्षों में नौकरियों और उद्योगों का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र ही बदल देगा, जो बहुत अच्छी बात होगी। अमेरिका में केवल 29 फीसदी और वैश्विक स्तर पर 52 फीसदी लोग ही इस नजरिए से इत्तेफाक रखते हैं।

आईपीएसओएस के सीईओ बेन पेग ने कहा, ‘दुनियाभर में लोग अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में भविष्य की संभावनाओं को लेकर जागरूक होना बहुत ही जरूरी है। हम यह देखकर बहुत उत्साहित हैं कि लोगों के आंकड़ों को लेकर अधिक गहराई से सोचने और दुनिया में सकारात्मक बदलाव लाने में इनके उपयोग में एआई किस प्रकार लोगों की मदद करेगा।

First Published - February 13, 2024 | 11:36 PM IST

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