मद्रास उच्च न्यायालय ने बंधुआ मजदूरों से जुड़े मामलों से निपटने में तमिलनाडु पुलिस को सतर्कता और सावधानी बरतने की नसीहत देते हुए ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई के लिए कहा है।
न्यायमूर्ति के एन बाशा और न्यायमूर्ति पी देवदास की खंडपीठ ने कहा कि यह बड़े दुख की बात है कि तंजौर जिले में पुलिस ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर संग्यान लेने के बाद ही एर्क इंट के भट्टे पर जाने के लिए कदम उठाये और एक महिला को बचाकर अदालत में लाया गया, जिसे उसकी मर्जी के खिलाफ वहां ले जाया गया था।
अरियालुर जिले में उदयरपलायम तालुक के याचिकाकर्ता के. बालामुरगन के वकील ने कहा था कि उसकी 48 साल की मां को पिछले साल 25 अप्रैल को के. राजा तथा चार अन्य लोग अपने भट्टे में काम कराने के लिए ले गये।