बिजनेस स्टैंडर्ड - सीमा शुल्क कटौती से चीन की इस्पात मिलों को लाभ!
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, March 03, 2021 02:27 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम निवेश खबर

सीमा शुल्क कटौती से चीन की इस्पात मिलों को लाभ!

ईशिता आयान दत्त / कोलकाता February 08, 2021

केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री द्वारा की गई सीमा शुल्क में कटौती की घोषणा से चीन की इस्पात मिलों को फायदा हो सकता है। इस्पात की बढ़ती कीमतों के कारण सरकार को एमएसएमई के फायदे के लिए अद्र्ध-निर्मित उत्पादों से लेकर इस्पात की चादरों और लंबे उत्पादों के सीमा शुल्क में 2.5 से 5.5 प्रतिशत तक की कटौती करने का फैसला करना पड़ा है। हालांकि इसका एक अनपेक्षित लाभार्थी भी हो सकता है और वह है चीन।

इसके अलावा यह कटौती कीमतों पर लगाम लगाने में विफल रही है, क्योंकि इस शुल्क कटौती की घोषणा के बाद इस्पात मिलों ने इस्पात की चादरों के दामों में प्रति टन 1,500 रुपये तक का इजाफा किया है। इस्पात विनिर्माताओं के अनुसार जब तक अंतरराष्ट्रीय दाम मजबूत रहेंगे, तब तक घरेलू दामों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। एएम/एनएस इंडिया के मुय विपणन अधिकारी रंजन धर ने बताया 'इस्पात के दाम अंतरराष्ट्रीय दामों से जुड़े होते हैं, जो वैश्विक कारकों के कारण बढ़ रहे हैं। आयात शुल्क में किसी कटौती से दामों में कमी नहीं आएगी, बल्कि गैर-एफटीए वाले देशों के निर्यातकों को ही लाभ होगा (क्योंकि एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) पहले ही शून्य शुल्क पर है)। हमारी अर्थव्यवस्था के बजाय कुछ प्रतिस्पर्धी देश लाभ उठाने के लिए तैयार हैं।'

गैर-एफटीए वाले इन देशों में सबसे बड़ा लाभार्थी चीन हो सकता है। जैसा कि इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जयंत रॉय ने कहा कि चीन गैर-एफटीए वाले देशों में भारत को इस्पात निर्यात करने वाले प्रमुख निर्यातकों में से एक है। वर्ष 2019-20 में चीन से आयात 12.06 लाख टन रहा। यह काफी ज्यादा हुआ करता था, लेकिन एंटी-डंपिंग शुल्क समेत कई उपाय किए जाने से पिछले चार से पांच सालों के दौरान इसमें कमी लाने में मदद मिली है। वर्ष 2016-17 में चीन से आयात 21.54 लाख टन था।

अलबत्ता बजट में चीन से विभिन्न इस्पात उत्पादों के आयात पर एंटी-डंपिंग शुल्क और प्रतिकारी शुल्क को अस्थायी रूप से निरस्त करने की घोषणा की गई थी। आयात में एफटीए देशों की हिस्सेदारी अधिक है। वर्ष 2019-20 में कोरिया से आयात 26.86 लाख टन रहा और जापान से 10.18 लाख टन। जब तक वैश्विक दाम अधिक रहते हैं, तब तक घरेलू कंपनियां मूल्य दबाव से बची रह सकती हैं। लेकिन अगर चीन के दामों में गिरावट जारी रहती है, तो इसका असर घरेलू दामों पर भी पड़ेगा। पिछले एक महीने के दौरान चीन के दामों में करीब 80 डॉलर प्रति टन तक की गिरावट आई है। चीन के नव वर्ष से पहले मंदी के कारण ऐसा हुआ है।

एक निर्माता के मुताबिक शुल्क के मौजूदा स्तर के कारण घरेलू और आयातित लागत निकट आ जाएगी। रॉय ने कहा कि घरेलू दामों को आयातित लागत से आंका जाता है। अगर चीन के दाम कम होते हैं, तो भारत के दामों पर दबाव पड़ेगा।

भले ही यह रुख दिखना जारी है, लेकिन चीन के इस्पात कारोबार में कुछ सामान्य स्थिति नजर आई है। सालाना आधार पर सात महीन की चार प्रतिशत तक की गिरावट के बाद चीन के मासिक इस्पात निर्यात में पहली बार इजाफा हुआ है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय दामों में नरमी आने के बावजूद इस बात की संभावना है कि जोरदार मांग की वजह से घरेलू इस्पात के दामों में मजबूती बनी रहेगी। पहले भी ऐसा हुआ है कि जब अंतरराष्ट्रीय दामों में नरमी के बावजूद मजबूत घरेलू मांग के कारण दाम अधिक रहे।

Keyword: सीमा शुल्क, कटौती, चीन, इस्पात मिल, बजट, एफटीए,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या जीएसटी संग्रह के आंकड़े आर्थिक सुधार में तेजी के संकेत हैं?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.