अदालत ने बिहार के रहने वाले राजेश की यह दलील ठुकरा दी कि लडकी उससे प्रेम करती थी और उसने अपनी मर्जी से उसके साथ शारीरिक संबंध बनाये थे । अदालत ने कहा कि पीडिता की सहमति मायने नहीं रखती क्योंकि वह उस समय साढे बारह साल की थी ।
अदालत ने कहा ्र दोषी :राजेश : 12 साल की अभियोक्ति्र लडकी को उसके माता पिता की सहमति के बगैर ही अपने साथ ले गया और उसके साथ यौन संबंध बनाये ।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार ने कहा ्र जब बलात्कार के मामले में लड़की की उम्र 16 साल से कम हो और अपहरण के मामले में 18 साल से कम हो तो पीडिता की सहमति मायने नहीं रखती ।
अदालत ने सात साल कैद के अलावा राजेश पर 7000 रूपया जुर्माना भी लगाया ।
अदालत ने लडकी की गवाही पर विश्वास करते हुए सजा सुनायी । उसने कहा कि अभियुक्त उसे अच्छा खाना खिलाने और कई जगह घुमाने के बहाने उसे ले गया था। वह उसे नोएडा में एक मंदिर ले गया और उसके समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा । इससे इंकार करने पर राजेश उसे एक मकान में ले गया और उसके साथ दो दिन तक बलात्कार किया ।
अदालत ने पाया कि बलात्कार के मामले में लडकी की गवाही महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिकांश मामलों में वही एकमात्र चश्मदीद होती है ।
भाषा