बिजनेस स्टैंडर्ड - खराब होने वाली कृषि जिंसों के लॉजिस्टिक्स दुरुस्त करना जरूरी
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खराब होने वाली कृषि जिंसों के लॉजिस्टिक्स दुरुस्त करना जरूरी

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली May 27, 2020

कोविड-19 की देशबंदी के बाद कृषि क्षेत्र को सभी तरह की राहत व पैकेज की घोषणाओं के बावजूद भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने इस क्षेत्र पर अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि खराब होने वाले कृषि उत्पादों जैसे फलों ओर सब्जियों के लिए लॉजिस्टिक्स सुदृढ़ करने की जरूरत है, जिससे किसानों को बेहतर मुनाफा दिया जा सके। देशबंदी के कारण फलों व सब्जियों की मांग में तेज गिरावट आई है।

इसमें कहा गया है कि देश के कृषि क्षेत्र के लिए श्रम की उपलब्धता और कर्ज की सुविधा अभी भी चुनौती बनी हुई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्लेषण से पता चलता है कि गेहूं की खरीद अभी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के नजदीक हो रही है, जबकि सरसों और चना जैसे जिंसों के दाम राज्य समर्थित एमएसपी से नीचे है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'राज्यों को अति सक्रियता के साथ इस मामले में हस्तक्षेप करने की जरूरत है, जिससे किसानों को तकलीफ न हो।'  खराब होने वाले कृषि उत्पादों जैसे फल एवं सब्जियों के बारे में सीआईआई ने कहा है कि इनकी कीमतों में बहुत ज्यादा उतार चढ़ाव होने की वजह से इन फसलों को उगाने वाले किसानों पर दबाव बढ़ता है। इसमें कहा गया है कि खराब होना इन फसलों की एक बड़ी समस्या है। इस समय होटलों व रेटोरेंटों जैसे थोक खरीदारों की मांग में 20-25 प्रतिशत की गिरावट के कारण इस समय सामान्य मांग बढऩे के बावजूद कीमतों पर असर नहीं पड़ा है।

रिपोर्ट में कहा गया है, 'टमाटर, प्याज, आलू जैसे उत्पादों की ग्राहकों की ओर से मांग बढ़ रही है, लेकिन इससे किसानों को अतिरिक्त लाभ नहीं हो रहा है।' 

नाबार्ड के माध्यम से फसल ऋण के लिए अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की व्यवस्था के सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए सीआईआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की भी अतिरिक्त उत्पादन को खपाने की क्षमता है, लेकिन इस समय उद्योग पिछले साल से ही क्षमता के पूरे इस्तेमाल के संकट से गुजर रहा है, जिसकी वजह बिक्री कम होना और कार्यशील पूंजी में कमी है।

एक उद्योग समूह ने कहा, 'अगर मांग की ऐसी ही स्थिति बनी रहती है तो प्रसंस्करणकर्ताओं की किसानों के अतिरिक्त उत्पाद की खरीद क्षमता पर बुरा असर पड़ेगा।' रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य प्रसंस्करणकर्ताओं के अतिरिक्त कार्यशील पूंजी ऋण मुहैया कराया जान चाहिए, जिससे वे कच्चे माल की खरीद कर सकें।

चेरी और लीची जैसी महंगी कृषि फसलों के खुदरा कारोबारियों के मामले में सीआईआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि वे ढुलाई को लेकर संकट से जूझ रहे हैं क्योंकि इनका उत्पादन बहुत ही सुदूर इलाकों में होता है।  रिपोर्ट में कहा गया है, 'महंगे कृषि उत्पादों का बहुत जबरदस्त स्थानीयकरण है, जिसकी वजह से इनकी ढुलाई को लेकर समस्या होती है और लागत बढ़ती है।' वहीं किसानों को अपनी फसल बेचने में समस्या होती है।

रिपोर्ट में कहा गया है, 'पहाड़ी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड, जहां कुल मांग बहुत मामूली है क्योंकि पर्यटन का मौसम बहुत बुरा गुजरा है।'  रिपोर्ट में कहा गया है, 'ऐसी स्थिति देखते हुए किसानों का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए लॉजिस्टिक्स में सुधार भी अहम है और खराब होने वाले कृषि उत्पादों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।'  रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020-21 में 29.83 करोड़ टन अनाज उत्पादन का लक्ष्य कृषि इनपुट की आपूर्ति शृंखला सामान्य होने पर निर्भर है।

Keyword: Perishable, Agri Commodity, Food, Logistics, CII, कृषि जिंस, लॉजिस्टिक्स, सीआईआई, एमएसपी, किसान, फल, सब्‍जी,
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