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इस खोज के लिए गत कई वर्षों से जारी विश्व के इस सबसे महत्वाकांक्षी प्रयोग से कई भारतीय संस्थान जुडे़ हुए हैं। इनमें मुख्य रूप से कोलकाता स्थित साहा इंस्टीट्यूट आफ न्यूक्लियर फिजिक्स :एसआईएनपी:, मुम्बई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च, इलाहाबाद स्थित हरीशचंद्र रिसर्च इंस्टीट्यूट, भुवनेश्वर स्थित इंस्टीट्यूट आफ फिजिक्स शामिल हैं।
इस महत्वपूर्ण प्रयोग से भारतीय संबंध यूरोपियन सेंटर फॉर न्यूक्लियर रिसर्च :सर्न: के वैग्यानिकों की ओर से हिग्स बोसॉन या गॉड पार्टिकल को खोज निकालने की गई घोषणा से पहले की गई टिप्पणी से भी प्रतिबिंबित होती है।
जिनेवा स्थित परमाणु अनुसंधान संगठन सर्न के प्रवक्ता पाउलो गिउबेलिनो ने कहा, भारत इस परियोजना के ऐतिहासिक जनक की तरह है।
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