facebookmetapixel
Advertisement
भारत-फ्रांस आर्थिक रिश्तों को नई गति देने 4 दिवसीय दौरे पर रवाना हुईं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमणशांति समझौते के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट में सामान्य नहीं हुई जहाजों की आवाजाही, पूरी बहाली में लग सकते हैं तीन महीनेखामेनेई की अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए ईरान का कांग्रेस नेताओं को निमंत्रण‘विजय’ मंत्र के साथ सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने संभाली कमान, कहा- भारतीय सेना हर चुनौती के लिए तैयाररंगमंच के आकाश से टूटा सितारा: विजया मेहता नहीं रहीं, कला जगत में शोक की लहर Editorial: कच्चा तेल सस्ता, लेकिन वैश्विक वित्तीय जोखिम अब भी भारत के लिए चुनौतीम्युचुअल फंड बनाम विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर बहस और जमीनी हकीकतश्रम आय को नहीं, तो पूंजीगत लाभ को भी विशेष कर रियायत क्यों?सेबी का शिकंजा: पंप-एंड-डंप स्कीम में 222 इकाइयों पर प्रतिबंध, ₹47.7 करोड़ का जुर्मानामई के उच्चस्तर के बाद जून में घटा कैश मार्केट में टर्नओवर, F&O कारोबार में बढ़त बरकरार

BFSI Summit 2022 : बेस इफेक्ट की वजह से क्रेडिट, डिपॉजिट ग्रोथ में दिख रहा गैप – RBI गवर्नर

Advertisement
Last Updated- December 21, 2022 | 3:37 PM IST
BFSI Summit

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा आयोजित ‘BFSI Insight Summit 2022’ में कहा कि क्रेडिट और डिपॉजिट ग्रोथ के बीच गैप संबंधित बेस इफेक्ट के कारण है और दोनों भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स को दर्शाते हैं।

दास ने एक फायरसाइड चैट के दौरान कहा, “जिस तरह पिछले वर्ष के कम आधार (base) के कारण ऋण वृद्धि बहुत अधिक दिखती है, पिछले वर्षों के आधार प्रभाव (base effect) के कारण जमा वृद्धि भी बहुत कम दिखती है। क्योंकि कोविड काल में, जमा राशि में लगभग 10 या 11 प्रतिशत की वृद्धि हो रही थी। ”

आरबीआई द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2 दिसंबर, 2022 तक, बैंक ऋण 17.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, जबकि जमा वृद्धि 9.9 प्रतिशत से कम है। एक साल पहले की अवधि के दौरान ऋण वृद्धि 7,3 प्रतिशत थी और जमा 9.4 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे थे।

उन्होंने कहा, “2 दिसंबर के नवीनतम आंकड़े, जिसमें मैं देख रहा था – नवंबर 2021 के अंत से 2 दिसंबर 2022 तक, होल सीरियल नंबर(पूर्ण संख्या) में ऋण वृद्धि 19 लाख करोड़ रुपये है, जबकि जमा वृद्धि 17.4 लाख करोड़ रुपये है। तो ऐसा नहीं है कि डिपॉजिट ग्रोथ और क्रेडिट ग्रोथ के बीच कोई बड़ा गैप है। दोनों का आधार प्रभाव इसे और अधिक भिन्न बना रहा है। ग्रोथ के आंकड़े पिछले दो वर्षों के क्रेडिट के लिए मांग में वृद्धि के अलावा, अर्थव्यवस्था के अंतर्निहित बुनियादी सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करती है।

उन्होंने कहा , “तो इन सभी कारकों पर विचार करते हुए, मुझे लगता है कि मौजूदा क्रेडिट वृद्धि निश्चित रूप से उत्साहजनक स्तर से बहुत दूर है।

उन्होंने कहा कि नए ऋणों पर भारित औसत उधार दर (weighted average lending rate) में लगभग 117  बेसिस प्वाइंट  (आधार अंकों) की वृद्धि हुई है, जबकि भारित औसत जमा दरों में 150 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि हुई है।

यह पूछे जाने पर कि क्या चुनावी साल में मौद्रिक नीति बनाना चुनौतीपूर्ण होगा, दास ने कहा कि चुनाव मौद्रिक नीति के लिए कोई फैक्टर नहीं होगा ।

देश में आम चुनाव 2024 के मध्य में होने हैं। अगले साल का केंद्रीय बजट आम चुनाव से पहले आखिरी पूर्ण बजट होगा। सरकारें चुनाव से पहले लोकलुभावन बजट पेश करती हैं जो चुनौतीपूर्ण हो सकता है जब मुद्रास्फीति अभी भी  केंद्रीय बैंक के ऊपरी दायरे के करीब है।

“…जहां तक ​​मौद्रिक नीति निर्माण का संबंध है, चुनाव कोई चिंता का विषय नहीं है। मौद्रिक नीति वह करेगी जो अर्थव्यवस्था के सर्वोत्तम हित में होगी।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी  ने इस वर्ष मई से नीतिगत रीपो रेट को 225 बेसिस प्वाइंट  बढ़ाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया है।

Advertisement
First Published - December 21, 2022 | 2:39 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement