facebookmetapixel
Advertisement
बुलेट बनाने वाली कंपनी का मुनाफा 21% उछला, रॉयल एनफील्ड की बिक्री मजबूत; ₹958 करोड़ निवेश को मंजूरीTitan Q3 Results: 61% की जबरदस्त उछाल के साथ मुनाफा ₹1,684 करोड़ हुआ, रेवेन्यू ₹24,900 करोड़ के पारडीपफेक पर सरकार सख्त: 3 घंटे में हटाना होगा AI कंटेंट, 20 फरवरी से नए डिजिटल नियम लागूExplainer: ऑफिस में अब नहीं होगी मील की चिंता! ‘ईट नाउ पे लेटर’ से लंच ब्रेक बनेगा और भी खुशनुमाबॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने किराये पर दी प्रोपर्टी, जानें कितनी होगी हर महीने कमाई200% का बंपर डिविडेंड! मुनाफे में 33% की जबरदस्त उछाल के बाद AI सेक्टर से जुड़ी कंपनी का तोहफाOil India Q3FY26 results: मुनाफा 10.7% घटकर ₹1,195 करोड़ पर आया, 70% के डिविडेंड का ऐलानतैयार हो जाइए! 1 अप्रैल से लागू होगा नया इनकम टैक्स एक्ट: टैक्सपेयर्स के लिए इससे क्या-क्या बदलेगा?एडलवाइस की निडो होम फाइनेंस में कार्लाइल करेगा ₹2100 करोड़ का बड़ा निवेश, बहुमत हिस्सेदारी पर हुई डीलइक्विटी म्युचुअल फंड्स में निवेश 14% घटा, जनवरी में Gold ETFs में आया ₹24,000 करोड़; SIP इनफ्लो स्थिर

गेहूं-चावल बिगाड़ रहे रसोई का बजट

Advertisement
Last Updated- December 15, 2022 | 11:49 PM IST
Government will sell 30 lakh tonnes of wheat

मोटे अनाज की खुदरा महंगाई दर घटने का नाम नहीं ले रही है, भले ही कुल मिलाकर खाद्य महंगाई दर में नरमी आई है। खराब मौसम की मार से इन अनाज का उत्पादन घटा है, जिसके कारण ऐसा हो रहा है।

नवंबर में मोटे अनाज की महंगाई दर अक्टूबर महीने के 12.08 फीसदी से बढ़कर नवंबर में 12.96 फीसदी हो गई। ऐसा तब हुआ है, जब समग्र महंगाई दर 11 महीनों में पहली बार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 6 फीसदी के लक्ष्य के भीतर आ गई। खाद्य महंगाई दर भी 11 महीने के सबसे निचले स्तर 4.67 फीसदी पर आ गई है।

खराब मौसम की मार ने डाला है गेहूं-चावल के दाम पर असर

गेहूं की खुदरा महंगाई दर अक्टूबर के 17.64 फीसदी से बढ़कर नवंबर में 19.67 फीसदी हो गई। साल की शुरुआत में यह महज 5.1 फीसदी थी और चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में बढ़कर 9.59 फीसदी हो गई। उस स्तर की तुलना में यह नवंबर में दोगुने से अधिक हो गई है। एक अन्य प्रमुख अनाज चावल की महंगाई दर अक्टूबर के 10.21 फीसदी से बढ़कर नवंबर में 10.51 फीसदी हो गई। जनवरी में यह महज 2.8 फीसदी और अप्रैल में 3.96 फीसदी थी।

अक्टूबर और नवंबर को छोड़कर इन सभी महीनों में अन्य अनाजों की महंगाई दर कम होने के कारण गेहूं और चावल की कीमतों ने महंगाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। अक्टूबर में दरों में 1.99 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि सितंबर में 1.37 फीसदी की कमी आई थी। नवंबर में यह थोड़ी नरम होकर 1.7 फीसदी रहीं। गेहूं और चावल की कीमत बढ़ने से गरीबों का बजट बिगड़ सकता है, लेकिन सरकार 80 करोड़ लोगों के लिए मुफ्त खाद्यान्न योजना को पहले ही 3 महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर तक कर चुकी है।

गरीबों की रसोई संभाल रही प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभार्थियों को 5 किलो गेहूं या चावल मुफ्त प्रदान किया जाता है। यह उनके मासिक कोटा के अतिरिक्त है। इसके अलावा, राशन वाले चावल और गेहूं की कीमत में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। उदाहरण के लिए, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) चावल की कीमतों में कैलेंडर वर्ष के पहले 4 महीनों के दौरान अप्रैल तक गिरावट देखी गई। इसके बाद सितंबर तक महंगाई दर 1 फीसदी से नीचे रही। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले चावल की कीमत में अक्टूबर-नवंबर के दौरान कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। PDS गेहूं के मामले में नवंबर 2022 तक कीमतों में हर महीने गिरावट जारी रही।

गेहूं और चावल दोनों का उत्पादन पिछले साल के स्तर से कम रहा

सरकार के अनुमान के मुताबिक, गेहूं और चावल दोनों का उत्पादन पिछले साल के स्तर से कम रहा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर घोषित और निजी व्यापारियों की गणना के बीच गिरावट की सीमा अलग-अलग है। यह हाल के इतिहास में बहुत कम देखा गया है, जब दोनों मुख्य अनाजों के उत्पादन में प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण गिरावट आई है। 2022 में रबी की कटाई से ठीक पहले गर्मी में अचानक वृद्धि के कारण गेहूं का उत्पादन गिर गया। पूर्वी भारत के मुख्य उत्पादक राज्यों बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में सूखे और कम बारिश के कारण पिछले खरीफ सीजन में चावल का उत्पादन गिरा था।
आधिकारिक अनुमान के अनुसार, जून में

समाप्त होने वाले 2022 के रबी सीजन में गेहूं का उत्पादन 10.64 करोड़ टन आंका गया था। यह पिछले साल के उत्पादन से 38 लाख टन कम है क्योंकि मुख्य फसल उगाने के चरण में गर्मी की लहर के कारण उत्पादन में कमी आई है। हालांकि, निजी व्यापारियों ने उत्पादन को बहुत कम, लगभग 9.8-10.0 करोड़ टन के आसपास आंका है। उत्पादन में गिरावट के कारण घरेलू बाजार में कीमतों में तेजी आई।

यह भी पढ़े: बोआई बढ़ने के बावजूद सस्ता नहीं हो रहा है गेहूं

रूस और यूक्रेन की लड़ाई भी इन प्रमुख जिंसों के रास न आई

यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में गेहूं की भारी कमी के कारण भी कीमतें बढ़ीं। इसी तरह, चावल के मामले में भी खराब मौसम ने खेल दिखाया और पूर्वी भारत में सूखे ने चावल के उत्पादन को नीचे खींच लिया। पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक, हाल में समाप्त हुए खरीफ सीजन में चावल का उत्पादन 10.49 करोड़ टन रहने की उम्मीद है। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 6.05 फीसदी कम होगा।

Advertisement
First Published - December 15, 2022 | 11:27 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement