facebookmetapixel
Advertisement
पहले सेवा उत्पादन सूचकांक में आवास-भोजन सेवाएं सबसे आगे, अप्रैल में 37.2% की शानदार बढ़ोतरीबाइरैक की बड़ी पहल: ₹1 लाख करोड़ के RDI फंड के लिए चुने गए देश के 8 बेहतरीन बायोटेक स्टार्टअपRBI का नया फरमान: बैंक बोर्डों को अब रणनीति और जोखिम प्रबंधन पर देना होगा ज्यादा समय, नियम बदलेसंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 की सीट के लिए भारत करेगा दावेदारी, अगले साल जून में होगा चुनावEditorial: महंगाई फिर RBI के लक्ष्य से ऊपर, तेल और मॉनसून बढ़ा सकते हैं नीतिगत चुनौतियांआंध्र प्रदेश में कोरोना की दस्तक से हड़कंप, दो मरीजों की मौत के बाद पड़ोसी राज्यों में अलर्ट जारीहोर्मुज स्ट्रेट में ईरानी हमले पर भारत का कड़ा विरोध, 1 भारतीय नाविक की मौत; तेहरान के राजनयिक तलबHurun India Real Estate List: अदाणी प्रॉपर्टीज बनी चौथी सबसे मूल्यवान कंपनी, वैल्यू ₹90,400 करोड़ हुईब्राजील के एथनॉल मॉडल से भारत क्या सीख सकता है? अवसर, चुनौतियां और संतुलन की जरूरतवैश्विक मंच पर भारतीय प्रवासियों की सफलता: विदेशों में हासिल उपलब्धियों से भारत क्या सीख सकता है?

समुद्र का खारा पानी पीने लायक बनाएगी महाराष्ट्र सरकार

Advertisement
Last Updated- December 14, 2022 | 8:54 PM IST

बारिश कम होने या मॉनसून में देरी की वजह से हर साल गर्मी में मुंबईकरों को पानी किल्लत का सामना करना पड़ता है। खासतौर पर मई-जून महीने में पानी की समस्या और बढ़ जाती है। हर साल पानी की कमी से होने वाली दिक्कत खत्म करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने समुद्र का खारा पानी पीने योग्य बनाने का फैसला किया है। मुंबई के पास मनोर में करीब 1,600 करोड़ रुपये की प्रस्तावित इस परियोजना 200 एमएलडी पानी पीने योग्य बनाया जाएगा।
मुंबई में मई और जून महीने में पानी की किल्लत टालने के लिए मनोर में समुद्र का 200 एमएलडी खारा पानी पीने योग्य मीठा बनाने वाली नि:क्षारीकरण परियोजना निर्माण करने के काम का जायजा लेकर परियोजना की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिया। मुख्यमंत्री ठाकरे ने कहा कि बारिश के मौसम के आरंभ में सतत बारिश के कारण मई और जून महीने तक मुंबई में 10 से 15 फीसदी पानी की कटौती करनी पड़ती है। समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बना कर इस परेशानी को हल किया जा सकता है। विश्व के अनेक देशों में यह प्रयोग सफलतापूर्वक किया गया है, जबकि कई देशों में ऐसे परियोजनाओं की निर्माण प्रक्रिया शुरू है। मुंबई जैसे महानगर में यह परियोजना निश्चित तौर पर लाभकारी साबित होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र को बड़े पैमाने में सागर किनारा प्राप्त है। इसलिए इस परियोजना में लगनेवाला पानी हमारे पास उपलब्ध है। यह परियजोना सौर ऊर्जा से चलेगी जिससे खर्च भी कम होगा। मनोर में पानी की गुणवत्ता अच्छी है, बुनियादी सुविधाएं भी यहां सहज रूप में उपलब्ध हो सकती है। मनोर में सरकारी भूखंड उपलब्ध है तथा रास्ते भी उपलब्ध है। इस स्थान पर बस्ती कम होने के कारण परियोजना बिना किसी रुकावट के पूर्ण होगी, जिससे मुंबई के नागरिकों को बिना किल्लत के नियमित पानी मिलेगा।
मुंबई महानगर पालिका के आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने बताया कि इस परियोजना को पूरा होने में तकरीबन ढाई से तीन साल का वक्त लग सकता है। इसे बनाने के लिए तकरीबन 25 से 30 एकड़ की भूमि का उपयोग किया जाएगा। जहां 200 एमएलडी पानी वाली इस परियोजना को स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना में तकरीबन 1,600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। समुद्र के खारे पानी को मीठा करने के लिए तीन से चार पैसे प्रति लीटर खर्च होने का अनुमान है।

Advertisement
First Published - November 25, 2020 | 12:09 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement