facebookmetapixel
Credit scores in 2026: कौन सी चीजें आपके क्रेडिट स्कोर को नुकसान पहुंचाती हैं, एक्सपर्ट से समझेंAmagi Media Labs IPO: 13 जनवरी से खुलेगा ₹1,789 करोड़ का इश्यू, चेक करें जरुरी डिटेल्स10 मिनट की डिलीवरी, करोड़ों की कमाई… लेकिन गिग वर्कर्स का क्या?Share Market: 5 दिन की गिरावट के बाद बाजार में राहत, सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार उछालBudget Expectations 2026: दवा उद्योग ने बजट में रिसर्च एंड डेवलपमेंट संबंधी रियायतों, नियामक ढांचे के सरलीकरण की मांग कीUnion Budget 2026 1 फरवरी, रविवार को ही होगा पेश, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने किया कंफर्मHCLTech Q3FY26 Results: मुनाफा 11.2% बढ़कर ₹4,076 करोड़, रेवेन्यू भी बढ़ा, ₹12 के डिविडेंड का ऐलानमहाराष्ट्र में नगर निगम चुनाव के चलते BSE और NSE 15 जनवरी को पूरी तरह बंद रहेंगेसोने-चांदी में निवेश का सुनहरा मौका, Bandhan MF ने उतारे गोल्ड और सिल्वर ETF FoF; ₹100 से SIP शुरू5700% का तगड़ा डिविडेंड! TATA Group की कंपनी का निवेशकों को जबरदस्त तोहफा, रिकॉर्ड डेट इसी हफ्ते

रुपये की गिरावट

Last Updated- December 11, 2022 | 5:27 PM IST

मंगलवार को कारोबार के दौरान भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 80.06 की नई गिरावट तक फिसल गया। हालांकि इसके तत्काल बाद रुपये के मूल्य में थोड़ा सुधार देखने को मिला और दिन के अंत में यह डॉलर के मुकाबले 79.95 पर बंद हुआ। इस वर्ष के आरंभ से अब तक भारतीय मुद्रा अपने मूल्य का सात फीसदी गंवा चुकी है। कुछ एशियाई तथा उभरते बाजारों की कुछ मुद्राओं का प्रदर्शन और भी खराब रहा जबकि कुछ का प्रदर्शन बेहतर भी रहा। डॉलर बनाम एशियाई मुद्राओं का एक सूचकांक संकेत देता है कि इस वर्ष डॉलर के मुकाबले एशियाई मुद्राएं 6.5 फीसदी गिरी हैं यानी रुपये का प्रदर्शन अन्य एशियाई मुद्राओं से थोड़ा खराब रहा है। उदाहरण के लिए इस वर्ष युआन के मुकाबले रुपया 1.3 प्रतिशत गिर चुका है।
हालांकि बढ़ते डॉलर के संदर्भ में उभरते बाजारों की मुद्राओं का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा है। उदाहरण के लिए 1 जनवरी के बाद से जापानी येन डॉलर के मुकाबले 20 फीसदी गिरा है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये में और गिरावट आएगी। चालू तिमाही में भी वह कमजोर बना रहेगा। इन अनुमानों में 30 अरब डॉलर की उस विदेशी राशि का भी उल्लेख है जो इस वर्ष भारतीय शेयरों से बाहर गई है। इसके अलावा कैरी ट्रेड (कम ब्याज दर वाली मुद्रा में उधार लेकर उच्च ब्याज वाली मुद्रा में निवेश) के अनाकर्षक होने और देश में बढ़ते व्यापार घाटे का भी जिक्र है। वर्ष के अंत तक वायदा बाजार डॉलर के मुकाबले तीन फीसदी की अतिरिक्त गिरावट पर आधारित है और वास्तविक प्रभावी विनिमय दर के मामले में यह 2.5 फीसदी है। एक या दो अन्य मुद्राओं का प्रदर्शन इससे अधिक खराब रह सकता है। खासतौर पर कोरियाई मुद्रा वॉन जो वैश्विक ईंधन कीमतों में बदलाव से भी प्रभावित होती है।
भारतीय रिजर्व बैंक पर यह जिम्मेदारी है कि वह हालात का प्रबंधन करे। आरबीआई तथा केंद्रीय वित्त मंत्रालय दोनों रुपये के अवमूल्यन के मुद्रास्फीतिक प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। परंतु मुद्रास्फीति से निपटने का रास्ता रीपो दर से निकलता है। बाजार प्रतिभागियों का कहना है कि आरबीआई ने विदेशी विनिमय बाजार में काफी हस्तक्षेप किया है। यह आशा की जानी चाहिए कि ऐसा केवल इसलिए किया जा रहा है ताकि गिरावट के बाद रुपया डॉलर के मुकाबले एक नया और कमतर उचित मूल्य हासिल कर ले। केंद्रीय बैंक के आंकड़े बताते हैं कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मार्च के बाद से 52 अरब डॉलर कम हुआ है। इसके लिए कुछ हद तक गैर डॉलर मुद्रा भंडारों की डॉलर मूल्य में गिरावट भी जिम्मेदार है जबकि शेष के लिए हाजिर बाजार में हस्तक्षेप उत्तरदायी हैं।
मुद्रा भंडार में आ रही कमी शायद आकार के मामले में बड़ी चिंता का विषय न हो। आरबीआई ने 1 जुलाई को कहा था कि उसके पास 588 अरब डॉलर मूल्य का विदेशी मुद्रा भंडार है जो पर्याप्त है। यानी हमारे पास 10 महीने के आयात का खर्च उठाने लायक विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। अतीत में हमें तभी समस्या हुई है जब मुद्रा भंडार आयात के आठ माह या उससे कम स्तर का हुआ है। इसमें दो राय नहीं कि आरबीआई और सरकार को हालात पर नजर रखनी चाहिए। वैश्विक ईंधन कीमतों में और इजाफा होने से मुद्रा भंडार प्रभावित होगा। ऐसे में बेहतर होगा कि आरबीआई अपने हस्तक्षेप को सीमित रखे, रुपये को अपना नया मूल्य तलाशने दे।

First Published - July 20, 2022 | 12:59 AM IST

संबंधित पोस्ट