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Editorial: VI के बोर्ड ने फंड जुटाने के लिए देर से लिया निर्णय

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VI Fund Raise: वोडाफोन आइडिया के बोर्ड ने इक्विटी और डेट में 45,000 करोड़ रुपये का फंड जुटाने को मंजूरी दी है।

Last Updated- March 01, 2024 | 9:38 PM IST
Vodafone Idea share price on Vi revival plan

वोडाफोन आइडिया के बोर्ड ने इक्विटी और डेट में 45,000 करोड़ रुपये का फंड जुटाने को मंजूरी दी है। इससे संकेत मिलता है कि संकट से जूझ रही दूरसंचार कंपनी सुधार की कोशिश में है। यह सही दिशा में उठाया गया कदम अवश्य है लेकिन निर्णय अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा।

बाजार के मिजाज को दर्शाते हुए घोषणा के एक दिन बाद यानी बुधवार को नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर वोडाफोन आइडिया के शेयर की कीमत 14 फीसदी गिरकर 13.65 रुपये रह गई थी। परिचालन के स्तर पर ताजा आकलन कंपनी को 4जी कवरेज बढ़ाने, 5जी सेवा शुरू करने और ग्राहकों की कम होती संख्या को संभालने में मददगार हो सकता है।

बहरहाल इसके साथ ही इस प्रस्ताव को बहुत देर से आए छोटे कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। कंपनी के कर्ज और घाटे का स्तर बताता है कि आखिर क्यों 45,000 करोड़ रुपये की राशि दीर्घकालिक हल नहीं है। पिछली गणना के मुताबिक वोडाफोन आइडिया के ऊपर करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था और दिसंबर तिमाही में कंपनी ने 6,985 करोड़ रुपये के घाटे की बात कही थी।

गत वर्ष के अंत में कंपनी के पास कुल 21.5 करोड़ सबस्क्राइबर थे और लगभग 20 फीसदी से कुछ कम बाजार हिस्सेदारी उसके पास थी। कंपनी सबस्क्राइबर की तादाद के मामले में रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के बाद तीसरे स्थान पर थी और वह पहले भी कई बार फंड जुटाने की योजनाओं की चर्चा कर चुकी है। इससे 45,000 करोड़ रुपये की फंड जुटाने की योजना पर भी सवाल उठते हैं। प्रस्तावित फंड राउंड की कई परतों के कारण भी प्रक्रिया में देरी हो सकती है।

उदाहरण के लिए गत वर्ष प्रवर्तकों ने कंपनी में 2,000 करोड़ रुपये की राशि डालने की प्रतिबद्धता जताई थी। छह महीने पहले की गई यह प्रतिबद्धता कंपनी की ताजा घोषणाओं में भी नजर आती है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं है कि कौन सा प्रवर्तक पैसे डालेगा। ब्रिटेन का वोडाफोन समूह कंपनी में 32.3 फीसदी हिस्सेदारी रखता है। उसने कहा है कि वह अब इसमें पैसे नहीं लगाएगा। आदित्य बिड़ला समूह के पास 18.1 फीसदी हिस्सेदारी है और उसने भी सालों से कंपनी में कोई अहम निवेश नहीं किया है। कंपनी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी केंद्र सरकार की 33 फीसदी है।

कंपनी के वक्तव्य के मुताबिक उसकी योजना इक्विटी और इक्विटी संबद्ध साधनों से करीब 20,000 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने की है। इसके लिए एक बाहरी निवेशक लाया जाएगा। एक बाहरी निवेशक पाना भी समूह के लिए चुनौती बना रहा है। अगर वोडाफोन आइडिया अपनी फंड जुटाने की योजनाओं को फलीभूत कर लेती है और अपने कारोबार में सुधार के लिए दरों में इजाफा करती है तो भारतीय दूरसंचार बाजार में दो कंपनियों के दबदबे की आशंका धीरे-धीरे दूर होने लगेगी।

परंतु कंपनी को ग्राहकों और निवेशकों का भरोसा हासिल करने के क्रम में अभी लंबी दूरी तय करनी है। बाहरी मोर्चे पर फंड जुटाने के अलावा न्यूबरी मुख्यालय वाली प्रवर्तक वोडाफोन पीएलसी सहित प्रवर्तकों को भी कंपनी के भारत के कारोबार में निवेश करना होगा।

साल 2021 में तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी निक रीड ने कहा था कि वोडाफोन पीएलसी भारत में कोई अतिरिक्त राशि नहीं लगाएगी लेकिन कंपनी को अपना रुख बदलना पड़ा ताकि वह आदित्य बिड़ला समूह के साथ संयुक्त उपक्रम में 4जी, 5जी सेवाओं तथा नेटवर्क सेवाओं में निवेश कर सके और भारतीय बाजार में प्रासंगिक बनी रह सके।

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First Published - March 1, 2024 | 9:38 PM IST

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