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नौकरी के बाद बाइक टैक्सी चला गुजारा कर रहे हजारों

कंसल्टेंसी फर्म केपीएमजी की मार्च 2024 की रिपोर्ट के अनुसार 2019 में 14.1 करोड़ राइड का बाइक टैक्सी बाजार था, जो बढ़कर 2022 में 28.1 करोड़ और 2023 में 31.8 करोड़ राइड हो गया।

Last Updated- June 30, 2025 | 11:21 PM IST
Rapido
प्रतीकात्मक तस्वीर

राकेश कुमार गुड़गांव की एक फर्म में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सेल्स एग्जिक्यूटिव की नौकरी करते हैं। उन्हें वहां मामूली वेतन मिलता है, जिससे घर का किराया, ईएमआई और दूसरी जरूरतें मुश्किल से ही पूरी हो पाती थीं। पिछले कुछ साल में इस वेतन में घर चलाना मुश्किल हो गया तो मजबूरी में उन्होंने दफ्तर से पहले और बाद में बाइक टैक्सी चलाना शुरू कर दिया।

राकेश बताते हैं, ‘ऑफिस जाने से पहले मैं कम से कम 5-6 राइड पूरी कर लेता हूं। ड्यूटी के बाद शाम को भी दो-तीन घंटे राइड करता हूं। इससे मुझे रोजाना 200-300 रुपये अलग से मिल जाते हैं। घर का रोज का खर्च निकालने में इससे बहुत आसानी हो जाती है।’ वह कहते हैं कि यह काम करने का उन्होंने कभी नहीं सोचा था मगर घर की जरूरतें पूरी नहीं कर पाने की मायूसी उन्हें सड़क पर ले आई।

परिवारे के गुजारे के लिए बाइक राइडर बनने वाले राकेश इकलौते शख्स नहीं हैं। बढ़ती महंगाई और ठहरे वेतन के कारण उनके जैसे कई कर्मचारी पार्ट-टाइम राइडर बनकर बाइक टैक्सी चला रहे हैं।

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण से मिले वेतनभोगी कर्मचारियों, ठेका कामगारों और खुद का रोजगार चलाने वालों की आय के आंकड़े देखने पर पता चलता है कि देश में 2019 से वास्तविक वेतन उतना नहीं बढ़ा है, जितनी महंगाई बढ़ गई है। वास्तविक वेतन महंगाई के नजरिये से किसी कामगार की कमाई होती है। यह बताती है कि कुछ खरीदने की उसकी वास्तविक क्षमता कितनी है। महामारी से पहले जून 2019 तिमाही से तुलना करें तो जून 2024 तिमाही में वेतनभोगियों का वास्तविक वेतन 1.7 प्रतिशत घट गया था। मगर इस दौरान जीवनयापन की लागत यानी भोजन, ईंधन, घर किराये का खर्च बहुत बढ़ गया। इसी वजह से लोग कमाई के दूसरे जरिये तलाशने पर मजबूर हो रहे हैं।

पार्ट टाइम राइडिंग का फायदा

पूरे दिन गाड़ी चलाने वालों से उलट राकेश जैसे पार्ट-टाइम राइडर आम तौर पर सुबह-शाम बाइक चलाते हैं, जब मांग बहुत अधिक होती है। कंसल्टेंसी फर्म केपीएमजी की मार्च 2024 की रिपोर्ट के अनुसार 2019 में 14.1 करोड़ राइड का बाइक टैक्सी बाजार था, जो बढ़कर 2022 में 28.1 करोड़ और 2023 में 31.8 करोड़ राइड हो गया। रिपोर्ट के अनुसार आधे से अधिक ड्राइवर ऐसे हैं, जो नियमित नौकरी के साथ बाइक टैक्सी चला रहे हैं। अध्ययन में यह भी पता चला कि भारतीय शहरों खासकर महानगरों में 2030 तक 54 लाख बाइक ड्राइवरों को बाइक टैक्सी के धंधे से रोजी-रोटी मिल सकती है। खेती के अलावा दूसरे क्षेत्रों से 2030 तक करीब 9 करोड़ रोजगार मिलेंगे, जिनमें 5 प्रतिशत इसी धंधे से होंगे।

नई दिल्ली में एक आईटी फर्म में काम करने वाले 28 साल के सुनील मेहता को एक दिन अहसास हुआ कि अपने वेतन से वह बुनियादी जरूरतें ही पूरी कर पा रहे हैं। तब 2023 मे सुनील ने नौकरी के साथ रैपिडो भी चलानी शुरू कर दी। बह बताते हैं, ‘ मेरी पगार तो ठीकठाक है मगर किराये, खाने और दूसरे खर्चों के बाद कुछ बच नहीं पाता है। अब मैं काम पर जाने से पहले सुबह 7 से 9 बजे तक और काम के बाद शाम 6 से 8 बजे तक बाइक चलाता हूं। महीने में मुझे 10-12 हजार रुपये की आमदनी और हो जाती है। इससे मुझे बहुत मदद मिल जाती है।’

राजधानी ऐप वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष सुनंद कहते हैं कि वेतन में ठहराव और घटती वास्तविक कमाई के साथ ही पक्की नौकरी पाना भी अब मुश्किल हो गया है। इसलिए लोग दूसरे काम खोजने के लिए मजबूर हो रहे हैं। वैश्विक पेरोल फर्म एडीपी रिसर्च इंस्टीट्यूट के 2024 के पीपल ऐट वर्क सर्वेक्षण के अनुसार 40 प्रतिशत से अधिक भारतीय कामगार 2 या अधिक स्रोतों से कमा रहे हैं। सर्वेक्षण में शामिल 18 देशों में सबसे बड़ा आंकड़ा भारत से ही है।

थकान बड़ा मुद्दा

करीब 8-9 घंटे की नौकरी करने के बाद अलग से काम करना आसान नहीं होता। ऐसे कई लोगों का दिन सुबह 6 बजे शुरू हो जाता है और नौकरी पूरी करने के बाद वे फिर सड़कों पर उतर जाते हैं और अक्सर देर रात तक बाइक चलाते हैं। इससे थकान होना लाजिमी है। मेहता कहते हैं, ‘मैं रोज थक जाता हूं और कई बार मन करता है कि घर लौट चलूं। मगर फिर याद आता है कि मुझे और पैसों को जरूरत है। यह सोचकर फिर काम में जुट जाता हूं।’

कुछ लोग बचत के लिए बाइक टैक्सी चलाते हैं तो कुछ के लिए घर चलाने का सहारा ही यही है। नोएडा में एक निजी फर्म में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने वाले 38 साल के रवि सिंह को 11,000 रुपये महीने मिलते हैं। इतनी कम रकम में चार लोगों का परिवार पालना नामुमकिन जैसा ही है। इसलिए 2024 की शुरुआत में वह भी रैपिडो के लिए बाइक टैक्सी चलाने लगे। रवि कहते हैं, ‘मैं शाम को सुरक्षा गार्ड की अपनी शिफ्ट पूरी होते ही राइड लेना शुरू कर देता हूं। सुबह भी शिफ्ट शुरू होने से पहले राइड करता हूं। थकान तो बहुत होती है मगर कोई चारा नहीं है। बच्चे स्कूल जाते हैं और दूसरे खर्च भी करने होते हैं। बाइक चलाकर रोजाना मिलने वाले 200-300 रुपये मेरे बहुत काम आते हैं।’

First Published - June 30, 2025 | 11:11 PM IST

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