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जोखिम से बचना है तो छोड़ दें स्मॉल, मिड कैप फंड

अगर 5 से 10 साल के लिए निवेश किया है और गिरावट सहने की कुव्वत है तो र्टफोलियो को नए सिरे से संतुलित करते हुए निवेश बनाए रखें

Last Updated- March 17, 2024 | 9:25 PM IST
Stock Market

पिछले एक साल में निफ्टी 50 करीब 27.4 फीसदी चढ़ा है जबकि निफ्टी मिड कैप 150 करीब 56 फीसदी और निफ्टी स्मॉल कैप 250 लगभग 66 फीसदी चढ़े हैं। इसी अवधि में मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों में भारी निवेश देखा गया है। लेकिन इतनी तेज दौड़ के बाद अब इन फंडों में निवेशकों को पूरी सतर्कता बरतने की जरूरत है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मिडकैप फंडों के मुकालबे स्मॉलकैप फंडों में अधिक जोखिम रहता है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) में पंजीकृत निवेश सलाहकार और सहजमनी के संस्थापक अभिषेक कुमार कहते हैं, ‘स्मॉल कैप योजनाओं का बड़ा निवेश फ्री फ्लोट मार्केट कैप के मामले में शीर्ष 500 शेयरों के बाहर ही रहता है। इन अस्थिर शेयर में हाल के दिनों में ज्यादा तेजी देखी गई है।’ स्मॉलकैप फंडों का लार्जकैप शेयरों में निवेश बहुत कम है। उनके पास इतनी नकदी भी नहीं होती कि बेचने या भुनाने के ज्यादा आवेदन ले पाएं।

इन फंडों में कई तरह के जोखिम होते हैं। सबसे पहला जोखिम तो मूल्यांकन का ही होती है। हालंकि स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों का मूल्यांकन अब बेहतर हो गया है। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर के निदेशक-मैनेजर (रिसर्च) कौस्तुभ बेलापुरकर ने कहा, ‘ऐसी लंबी दौड़ के बाद हमेशा ही गिरावट आती है, जैसी 2017-18 में देखी गई थी।’

लेकिन सूचकांक के स्तर पर फॉरवर्ड अर्निंग्स मल्टीपल उतना ज्यादा नहीं है, जितना 2018 में था। सैंक्टम वेल्थ की मुख्य निवेश अधिकारी और सह—प्रमुख ,उत्पाद एवं सॉल्यूशन रूपाली प्रभु कहती हैं, ‘चुनौती तब शुरू होती है, जब आप वाजिब मूल्यांकन पर अच्छी गुणवत्ता वाली कंपनियां ढूंढने चलते हैं।’

धारणा या माहौल बदले तो नकदी का जोखिम भी हो सकता है। शेयरों के फ्री फ्लोट का बड़ा हिस्सा रखने वाले लार्ज फंडों के साथ खास तौर पर ऐसा हो सकता है। ज्यादा लोग बेचने आए तो फंड मैनेजर को परेशानी हो सकती है या शेयर के बारे में उसका नजरिया बदल सकता है। प्रभु समझाती हैं, ‘असली खतरा तो इसके असर का है। फंड प्रबंधकों को कम कीमत पर शेयर बेचना पड़ सकता है, जिसका असर फंड के आगे के प्रदर्शन पर भी पड़ सकता है।’

आमतौर पर फंड मैनेजर ब्लॉक डील या बल्क डील के जरिये शेयर बेचने की बात कहते हैं मगर प्रभु के मुताबिक चढ़ते बाजार में ऐसा करना आसान होती है किंतु बाजार लुढ़क रहा हो तो सौदे नहीं होते।

इतनी रकम आ रही हो तो फंड मैनेजर इस दुविधा में पड़ जाते हैं कि पहले से खरीदे शेयर ही और खरीदें या नए शेयर जोड़ें। मौजूदा शेयर इतने तरल नहीं हैं कि और निवेश किया जाए तो मैनेजर अपने पोर्टफोलियो में नए शेयर जोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं। प्रभु बताती हैं, ‘इससे पोर्टफोलियो में शेयरों की संख्या बढ़ जाती है। लेकिन इस बात की चिंता बढ़ जाती है कि फंड मैनेजर किसी भी शेयर उदाहरण के लिए 130वें स्थान पर मौजूद शेयर के बारे में गहरी समझ रखता है या नहीं।’

निवेशकों की उम्मीदें हालिया रिटर्न से जुड़ी हैं। कई निवेशकों को उम्मीद है कि हर साल ऐसा ही रिटर्न मिलता रहेगा। बेलापुरकर के हिसाब से निवेशक इससे अलग-अलग उप-परिसंपत्ति और परिसंपत्ति श्रेणियों में जाने के बजाय स्मॉल और मिडकैप फंडों में अधिक निवेश कर सकते हैं।’

साल 2018 की तरह जब धारणा एकदम उलट जाती है तो कई निवेशक बाहर निकलना चाहते हैं। उनकी अर्जी निपटाने के लिए फंड हाउस फरमाइश के हिसाब से शेयर बेच देते हैं। अच्छी गुणवत्ता वाले अधिक तरल शेयर ही पहले बिकते हैं। इसके बाद पोर्टफोलियो में कम गुणवत्ता और तरलता वाले शेयर ही बचते हैं। ऐसे में नुकसान लंबी अवधि के निवेशकों को होता है। सेबी फंड कंपनियों से दीर्घावधि निवेशकों की सुरक्षा के लिए पुख्ता ढांचा तैयार करने के लिए कह रहा है।

ऐसे में आप क्या करें? निश्चित आमदनी वाली योजनाओं में पर्याप्त निवेश रखें। कुमार कहते हैं कि अचानक मंदी आने पर स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में उठापटक आए तो घाटा झेलकर उन्हें न बेचें। वह मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में उतनी ही रकम रखने के लिए कहते हैं जो अगले 5 से 10 वर्षों तक लगी रह सके।

जो लोग भारी गिरावट (40 फीसदी तक) बरदाश्त नहीं कर सकते उन्हें पूरी तरह से बाहर निकल जाना चाहिए। जिनके पास दोनों फंड हैं वे अपने परिसंपत्ति आवंटन पर टिके रह सकते हैं। बेलापुरकर कहते हैं, ‘अगर आप इन श्रेणियों में ओवरवेट हो गए हैं तो आपको अपना पोर्टफोलियो पुनर्संतुलित करना चाहिए।’ इस वक्त एकमुश्त निवेश से बचें और सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) पर टिके रहें।

बेलापुरकर कहते हैं, ‘अगर आप इन श्रेणियों में ओवरवेट हो गए हैं तो आपको अपना पोर्टफोलियो पुनर्संतुलित करना चाहिए।’ इस वक्त एकमुश्त निवेश से बचें और सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) पर टिके रहें।

First Published - March 17, 2024 | 9:25 PM IST

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