facebookmetapixel
Advertisement
SEBI का मास्टरस्ट्रोक: AIF योजनाओं के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था शुरू, अब कम समय में लॉन्च होंगे फंडबाजार का मेगा कमबैक: अप्रैल में ₹51 लाख करोड़ बढ़ा निवेशकों का पैसा, मार्केट कैप में रिकॉर्ड उछालQ4 Results: ACC, अदाणी पोर्ट्स, नालको से लेकर वारी एनर्जीज तक; किस कंपनी ने कितना कमाया?करिश्मा कपूर के बच्चों को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली राहत, पिता संजय कपूर की संपत्ति पर लगी रोकभारत और इटली मिलकर बनाएंगे घातक हथियार,रक्षा औद्योगिक ढांचे पर बनी सहमति; सुरक्षा होगी और मजबूतसमुद्र में बढ़ी भारत की ताकत: नौसेना और DRDO ने किया स्वदेशी एंटी-शिप मिसाइल का सफल परीक्षणSC का ऐतिहासिक रुख: दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग पर नहीं थोप सकते अनचाहा गर्भ, कानून में बदलाव के संकेतबाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 583 अंक टूटा, क्रूड ऑयल और ईरान-अमेरिका तनाव ने बढ़ाई निवेशकों की टेंशनHindustan Unilever Q4 Results: मुनाफा 21.4% उछला, निवेशकों को मिलेगा ₹22 का बंपर डिविडेंडकॉग्निजेंट में छंटनी का ‘प्रोजेक्ट लीप’: 15,000 कर्मचारियों की जा सकती है नौकरी, भारत में सबसे ज्यादा असर

कैसे बनाएं इमरजेंसी फंड? जानें तैयारी के टिप्स

Advertisement

भारतीयों के लिए इमरजेंसी फंड बनाना कितना है आसान?

Last Updated- November 23, 2023 | 4:29 PM IST
BNPL (Buy Now Pay Later)

महामारी के बावजूद, 4 में से तीन भारतीयों के पास अचानक आने वाले खर्चों के लिए सेविंग नहीं है।

फिनोलॉजी के एक सर्वे में पाया गया कि 75% भारतीयों के पास इमरजेंसी फंड नहीं है और अगर उन्हें अचानक नौकरी से निकाल दिया गया तो वे अपनी EMI चूक कर सकते हैं।

इमरजेंसी फंड एक सेविंग अकाउंट है जिसका उपयोग आप एकाएक खर्चों को कवर करने के लिए कर सकते हैं। यह आपकी मासिक आय का तीन से छह गुना होना चाहिए।

बैंकबाजार ने अलग-अलग आय वाले व्यक्तियों के लिए इमरजेंसी फंड बनाने में लगने वाले समय की कैलकुलेशन की है।

def

ऊपर दी गई टेबल में, यदि आप अपनी मौजूदा मासिक आय का तीन गुना इमरजेंसी फंड बनाना चाहते हैं, तो इसमें आपको कुल 15 महीने लगेंगे। स्टडी से पता चला है कि अगर आप अपनी वर्तमान मासिक आय का छह गुना इमरजेंसी फंड बनाना चाहते हैं, तो इसमें आपको 28 महीने लगेंगे।

और यदि आप अपनी आय से नौ गुना इमरजेंसी फंड चाहते हैं, तो इसमें 41 महीने लगेंगे। निवेश शुरू करने से पहले, बुनियादी चीजों को कवर करना जरूरी है, यानी इमरजेंसी फंड, टर्म जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा। कई कारक, जैसे उम्र, हेल्थ कंडिशन, जॉब का नेचर और आश्रितों की संख्या, इन फैसलों को प्रभावित करते हैं।

अपना इमरजेंसी फंड बनाने के लिए, पहले अपने मासिक अनिवार्य खर्चों, जैसे घर के खर्चे, भोजन, बच्चों की एजुकेशन फीस पर खर्चा, EMI, इंश्योरेंस प्रीमियम आदि। इनमें से कुछ खर्चों को फिक्स्ड डिपॉजिट या लिक्विड फंड में अलग रखें।

विंट वेल्थ के को फाउंडर और सीईओ, अजिंक्य कुलकर्णी, आपके इमरजेंसी फंड के लिए स्वीप-इन फैसिलिटी के साथ बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट या सेविंग अकाउंट में 12 महीने के खर्चों को रखने की सलाह देते हैं।

स्वीप-इन फैसिलिटी यह सुनिश्चित करती है कि यदि आपके सेविंग अकाउंट की शेष राशि कम हो जाती है, तो बैंक आपकी फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर को प्रभावित किए बिना ऑटोमैटिकली आपके फिक्स्ड डिपॉजिट से आपके सेविंग अकाउंट में फंड ट्रांसफर कर देगा। आप अपने इमरजेंसी फंड के लिए एक लिक्विड फंड भी चुन सकते हैं।

लिक्विड म्यूचुअल फंड हाई क्वालिटी वाली शॉर्ट टर्म डेट सिक्योरिटी में निवेश करते हैं, जैसे सरकारी बांड और कॉर्पोरेट बांड जो 91 दिनों के भीतर मैच्योर होते हैं। ये फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में थोड़ा ज्यादा रिटर्न देते हैं और उन निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं जो छोटी अवधि के लिए एकमुश्त राशि जमा करना चाहते हैं, जैसे कि तीन महीने बाद एक फ्लैट पर डाउन पेमेंट करना चाहते हैं।

कुलकर्णी कहते हैं, यदि आपको कोई बोनस मिला है और आप जल्द ही एक घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आप अपनी कागजी कार्रवाई को अंतिम रूप देते समय इसे लिक्विड म्यूचुअल फंड में रख सकते हैं। हालांकि, लिक्विड म्यूचुअल फंड से पैसा निकालने में 1-2 कार्य दिवस लगते हैं।

बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी ने कहा, “लिक्विड फंड चुनते समय, ऐसे फंड की तलाश करें जिसने अतीत में अपने बेंचमार्क और समकक्ष फंडों से लगातार बेहतर प्रदर्शन किया हो। आप कम व्यय अनुपात वाला प्रत्यक्ष फंड भी चुन सकते हैं। हालांकि, ध्यान रखें कि लिक्विड फंड केवल पिछले रिटर्न की पेशकश करते हैं और भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं दे सकते। दूसरी ओर, फिक्स्ड डिपॉजिट गारंटी एडवांस रिटर्न प्रदान करते हैं।”

Advertisement
First Published - November 14, 2023 | 6:52 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement