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QR कोड से लेकर पिन शेयरिंग तक, जानिए कैसे फंस रहे हैं लोग UPI फ्रॉड के जाल में

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UPI Fraud: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की वार्षिक रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान डिजिटल पेमेंट फ्रॉड के मामलों में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है।

Last Updated- June 27, 2025 | 11:13 AM IST
Representative Image

UPI Fraud: देश में डिजिटल पेमेंट का चलन बढ़ने के साथ ही यूपीआई फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। LocalCircles के एक ताज़ा सर्वे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सर्वे के मुताबिक, हर 5 में से 1 भारतीय परिवार यानी करीब 20% परिवार UPI फ्रॉड का शिकार हो चुका है।

किस तरह से हो रही है ठगी?

सर्वे में हिस्सा लेने वाले लोगों ने बताया कि ज्यादातर मामलों में फ्रॉड UPI सेटिंग या पिन हैक करके किया गया। कई लोगों ने गलती से फ्रॉड लिंक या QR कोड पर क्लिक कर दिया, जिससे उनके खाते से पैसे उड़ गए। कुछ मामलों में लोगों ने खुद ही OTP या UPI पिन शेयर कर दिया, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ा।

UPI की बढ़ती लोकप्रियता के साथ बढ़ रहा जोखिम: आरबीआई

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की वार्षिक रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान डिजिटल पेमेंट फ्रॉड के मामलों में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान बैंकिंग फ्रॉड के कुल मामलों में से 56.5% डिजिटल ट्रांजेक्शंस से जुड़े थे। ऐसे 13,516 मामले सामने आए जिनमें कुल मिलाकर करीब ₹520 करोड़ की धोखाधड़ी हुई।

हालांकि रिपोर्ट में UPI फ्रॉड का अलग से आंकड़ा नहीं दिया गया है, लेकिन यह ज़रूर बताया गया है कि अधिकतर धोखाधड़ी कार्ड और इंटरनेट-आधारित लेनदेन के ज़रिए हुई, जिसमें UPI भी शामिल है।

UPI का उपयोग तेजी से बढ़ा है — FY2024–25 में कुल 185.8 अरब लेनदेन UPI के माध्यम से हुए, जो पिछले साल की तुलना में 41.7% अधिक हैं। डिजिटल पेमेंट में UPI का हिस्सा अब 83.4% तक पहुंच गया है।

Also Read | ऑनलाइन फ्रॉड पर लगेगी लगाम, RBI लाएगा रियल टाइम निगरानी प्लेटफॉर्म

इस बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही धोखाधड़ी की आशंका भी बढ़ी है। इसी को ध्यान में रखते हुए RBI और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने कई सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। इनमें डिवाइस बाइंडिंग, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (PIN आधारित), और हर दिन के लेनदेन पर सीमा तय करना शामिल है।

NPCI ने UPI ट्रांजेक्शन की अधिकतम दैनिक सीमा ₹1 लाख तय की है, हालांकि यह बैंक, ऐप और लेनदेन के प्रकार के अनुसार बदल सकती है। जैसे कि:

  • ₹2 लाख: कैपिटल मार्केट, इंश्योरेंस, कलेक्शन और विदेशी इनवर्ड रेमिटेंस के लिए
  • ₹5 लाख: टैक्स भुगतान, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, आईपीओ और आरबीआई की रिटेल डायरेक्ट स्कीम में भुगतान के लिए

इसके अलावा, UPI Lite और UPI 123Pay जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं ताकि अलग-अलग ज़रूरतों को पूरा किया जा सके। उपयोगकर्ताओं को एक दिन में अधिकतम 20 ट्रांजेक्शन की अनुमति है।

उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए सरकार ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) और हेल्पलाइन नंबर 1930 शुरू किया है। इसके साथ ही लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

फ्रॉड की पहचान और नियंत्रण के लिए RBI एक डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म भी तैयार कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों की मदद से पूरे डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में रियल-टाइम डेटा साझा करेगा और नेटवर्क लेवल पर फ्रॉड को रोकने में मदद करेगा।

इस प्लेटफॉर्म की रूपरेखा तय करने के लिए NPCI के पूर्व एमडी और सीईओ ए.पी. होता की अध्यक्षता में एक समिति का गठन भी किया गया है।

Also Read: अब विदेशी नंबर से भी कर सकेंगे UPI पेमेंट, इस बैंक ने लॉन्च की नई सर्विस

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने दिसंबर 2024 में MuleHunter.AI नाम का एक नया AI-ML आधारित टूल लॉन्च किया है। इसे रिज़र्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) ने तैयार किया है। इसका मकसद बैंकों को ऐसे खातों की पहचान में मदद करना है, जो अवैध कामों के लिए ‘म्यूल अकाउंट’ के तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं। इस टूल का परीक्षण दो सरकारी बैंकों में किया गया, जहां इसके नतीजे उत्साहजनक रहे।

फिशिंग जैसे साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाने और डिजिटल बैंकिंग में भरोसा बढ़ाने के लिए RBI ने दो खास इंटरनेट डोमेन भी शुरू किए हैं —

  • .bank.in बैंकों के लिए
  • .fin.in गैर-बैंक वित्तीय संस्थाओं के लिए

इससे ग्राहक असली वेबसाइट की पहचान कर पाएंगे और फ्रॉड का खतरा कम होगा।

LocalCircles का बड़ा सर्वे: हर पांच में से एक परिवार UPI फ्रॉड का शिकार

डिजिटल पेमेंट में बढ़ते फ्रॉड को लेकर लोकलसर्कल्स (LocalCircles) ने बीते 12 महीनों में एक सर्वे किया। इसका मकसद यह जानना था कि क्या लोगों या उनके परिवार के किसी सदस्य को UPI फ्रॉड का सामना करना पड़ा है और अगर हां, तो किस तरह का।

सर्वे में देश के 365 ज़िलों से 32,000 से ज़्यादा लोगों ने भाग लिया।

  • 67% उत्तरदाता पुरुष थे, जबकि 33% महिलाएं थीं।
  • 42% प्रतिभागी टियर-1 शहरों से थे, 27% टियर-2 और 31% टियर-3 व 4 क्षेत्रों से थे।

LocalCircles के एक ताज़ा सर्वे के अनुसार, हर 5 में से 1 परिवार ऐसा है जिसने बीते 3 सालों में UPI फ्रॉड का अनुभव किया है।

जब लोगों से पूछा गया — “क्या आपने या आपके किसी परिवारजन ने पिछले 3 साल में UPI फ्रॉड का सामना किया है?”
तो 16,312 जवाबों में से:

  • 20% ने कहा “हां”
  • 78% ने कहा “नहीं”
  • और 2% ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

3 साल में इन तरीकों से ठगे गए लोग, पिन हैक से लेकर फर्जी लिंक तक

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करने वाले कई लोगों को बीते तीन सालों में फ्रॉड का सामना करना पड़ा है। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, जिन लोगों ने धोखाधड़ी का अनुभव किया, उनमें से कई ने एक से ज्यादा तरीकों से फ्रॉड झेला है।

इस सर्वे में 4,894 लोगों ने हिस्सा लिया और अपने अनुभव साझा किए। आइए जानते हैं कौन-कौन से तरीके थे जिनसे यूपीआई यूजर्स को ठगा गया:

  • 50% लोगों ने बताया कि उनके यूपीआई पिन या सेटिंग्स को किसी ने हैक कर लिया और उनके खाते से पैसे निकाल लिए गए।
  • 40% यूजर्स ने कहा कि उन्होंने किसी लिंक पर क्लिक किया था जो पैसे मिलने के लिए भेजा गया था, लेकिन क्लिक करते ही उनके खाते से पैसे कट गए।
  • 20% ने बताया कि उन्होंने किसी क्यूआर कोड को स्कैन किया जिससे उनके खाते से पैसा कट गया, जबकि उन्हें लग रहा था कि उन्हें पैसे मिलेंगे।
  • 20% लोगों ने ये भी स्वीकार किया कि उन्होंने ओटीपी या यूपीआई पिन किसी ऐसे व्यक्ति को बता दिया जो खुद को बैंक अधिकारी बता रहा था, और उसके बाद उनके खाते से पैसा कट गया।
  • 50% यूजर्स ने कहा कि उनके साथ यूपीआई धोखाधड़ी ऐसे तरीकों से हुई जो ऊपर बताए गए विकल्पों में शामिल नहीं थे।
  • 10% प्रतिभागी ऐसे थे जिन्होंने साफ-साफ जवाब नहीं दिया।

LocalCircles के एक ताज़ा सर्वे में यह भी पाया गया कि कई लोग एक से अधिक तरीकों से ठगी का शिकार हुए हैं।

UPI फ्रॉड के शिकार हर दो में से एक व्यक्ति ने नहीं की शिकायत, सर्वे में हुआ खुलासा

पिछले तीन वर्षों में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) से जुड़े फ्रॉड का शिकार हुए हर दो में से एक व्यक्ति ने किसी भी प्लेटफॉर्म पर इसकी शिकायत दर्ज नहीं कराई। एक हालिया सर्वे में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

सर्वे में 15,862 लोगों से यह पूछा गया था कि यदि उन्होंने या उनके परिवार के किसी सदस्य ने पिछले तीन वर्षों में किसी UPI फ्रॉड का सामना किया, तो उन्होंने इसकी शिकायत कहां-कहां की? कई लोगों ने एक से ज्यादा विकल्प भी चुने।

जिन लोगों ने शिकायत की, उनमें:

  • 38% ने कहा कि उन्होंने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत की
  • 25% ने कहा कि उन्होंने जिस UPI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया, उस पर शिकायत की
  • 13% ने अपनी बैंक से संपर्क किया
  • 13% ने NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) को रिपोर्ट किया
  • 13% ने RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) से शिकायत की।

हालांकि, सबसे चिंताजनक बात यह रही कि 51% लोगों ने बताया कि उन्होंने किसी भी आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर कोई शिकायत दर्ज नहीं की।

इससे साफ है कि अधिकतर उपभोक्ता या तो प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में, या फिर प्रणाली पर भरोसा न होने की वजह से, शिकायत दर्ज नहीं करते। जबकि वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में शिकायत करना जरूरी है, ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके और भविष्य में दूसरों को ऐसे फ्रॉड से बचाया जा सके।

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First Published - June 27, 2025 | 10:38 AM IST

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