लगातार महंगे होते इलाज को देखकर लोग भी उसके लिए पूरी तरह तैयार हो रहे हैं। यही वजह है कि ज्यादा से ज्यादा भारतीय बड़ी रकम का स्वास्थ्य बीमा खरीद रहे हैं। पॉलिसीबाजार से मिले आंकड़ों के अनुसार बीमा को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे से बाहर किए जाने के बाद ज्यादा रकम की बीमा पॉलिसी की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस प्लेटफॉर्म पर 13 फीसदी खरीदारों ने 25 लाख रुपये से अधिक बीमा रकम वाली पॉलिसी खरीदी, 45 फीसदी लोगों ने 15 से 25 लाख रुपये की पॉलिसी चुनी, 24 फीसदी लोगों ने 10 से 15 लाख रुपये की पॉलिसी ली और 10 लाख रुपये से कम रकम वाला स्वास्थ्य बीमा चुनने वाले केवल 18 फीसदी लोग थे।
बीमा की रकम इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति किस शहर में रहता है, उसकी उम्र कितनी है, परिवार में कितने लोग हैं और उसे पहले किस तरह की बीमारी हुई हैं। इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी की कार्यकारी निदेशक (मार्केटिंग) निहारिका सिंह का कहना है, ‘महानगर में रहने वाले व्यक्ति को 15 लाख रुपये या ज्यादा का बीमा लेना चाहिए और छोटे शहर के व्यक्ति को कम से कम 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कराना चाहिए। परिवार में चार सदस्य हों तो 15 लाख रुपये का फैमिली फ्लोटर सही है मगर महानगरों में रहने वालों या बुजुर्गों वाले परिवारों के लिए बीमा की रकम बढ़कर 25 से 50 लाख रुपये तक पहुंच जाती है।’
बड़े शहरों में इलाज ज्यादा महंगा होता है। पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के कारोबार प्रमुख (स्वास्थ्य बीमा) सिद्धार्थ सिंघल कहते हैं, ‘बड़े शहरों में रहने वाले व्यक्ति को कम से कम 10 लाख रुपये का बीमा कराना चाहिए और मझोले शहर के व्यक्ति को पर्याप्त सुरक्षा के लिए कम से कम 7 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा लेना चाहिए।’ जिन लोगों को मधुमेह, हृदयरोग या कैंसर जैसी बीमारियां हैं, उन्हें 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कराना चाहिए। सिंघल की राय है, ‘अपनी जेब से खर्च कम करना है तो ऐसी पॉलिसी चुनें, जिनमें वेटिंग पीरियड कम हो और सब-लिमिट या बहुत अधिक को-पे का प्रावधान नहीं हो।’
आपकी उम्र 25 साल के आसपास है तो स्वास्थ्य बीमा खरीदने पर प्रीमियम कम होगा, मंजूरी आसानी से मिल जाएगी और विकल्प भी ज्यादा होंगे। सिंघल समझाते हैं, ‘इससे वेटिंग पीरियड जल्दी खत्म हो जाता है और बाद में मधुमेह या दिल की बीमारी हो जाए तो फौरन बीमा के दायरे में आ जाती है।’
अगर आप 30 से 50 साल की उम्र में बीमा पॉलिसी खरीदते हैं तो बीमा की रकम अधिक होने पर प्रीमियम का बोझ उठाना आपके लिए आसान होता है। लेकिन 60 साल से ज्यादा उम्र होने पर वही आपको बोझ लग सकता है। इसलिए बेस प्लान लेकर उसमें सुपर टॉप-अप जोड़ने पर आपको वाजिब रकम में ज्यादा बीमा सुरक्षा मिल सकती है। उदाहरण के लिए अगर आप 20 लाख रुपये की बेस पॉलिसी लेकर 80 लाख रुपये का सुपर टॉप-अप कराते हैं तो उसका प्रीमियम 1 करोड़ रुपये की बीमा पॉलिसी के प्रीमयम से बहुत कम होगा।
अगर आप अधिक रकम वाली बेस बीमा पॉलिसी खरीदते हैं तो उसमें डिडक्टिबल नहीं होगा, दावे आराम से निपटेंगे, रीन्यूअल भी आसान होगा और आपकी जेब से बहुत कम खर्च होगा। इसमें फीचर भी ज्यादा मिलेंगे। बेस पॉलिसी के साथ सुपर टॉप-अप सस्ता पड़ेगा।
डिडक्टिबल वह रकम है जो चुकाने के बाद ही सुपर-टॉप का काम शुरू होता है। बजाज जनरल इंश्योरेंस के हेड (हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन टीम) भास्कर नेरुरकर बताते हैं, ‘डिडक्टिबल उतना ही हो, जितनी आपकी बेस पॉलिसी की बीमा रकम है तो एक्टिवेशन काफी आसान हो जाता है।’
स्वास्थ्य बीमा में आपको टॉप-अप के बजाय सुपर टॉप-अप चुनना चाहिए। नेरुरकर समझाते हैं, ‘टॉपअप हरेक दावे में डिडक्टिबल के बराबर रकम खर्च होने के बाद ही काम करना शुरू करता है। लेकिन सुपर टॉप-अप में पूरे एक साल के दौरान हुआ खर्च देखा जाता है और जैसे ही यह खर्च डिडक्टिबल से ज्यादा होता है सुपर टॉप-अप काम करना शुरू कर देता है।’
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)