facebookmetapixel
Advertisement
चंद्रशेखरन के बाद टीसीएस के सामने नेतृत्व की नई चुनौती, टाटा समूह के साथ तालमेल पर भी नजरउदारीकरण के 35 साल: ‘एशिया के डेट्रॉइट’ से चेन्नई ने कैसे तय किया दुनिया के ऑटो हब तक का सफरअटकी चंद्रशेखरन के वारिस की तलाश, उत्तराधिकारी चुनने वाली चयन समिति गठित करने में लगेगा वक्त; AGM पर भी संशयभारत के एयर मोबिलिटी बाजार में उतरने की तैयारी, 2029 से ईवीटीओएल उड़ाने की स्काईड्राइव की योजनाMMDR विधेयक पर कुछ राज्यों को एतराज, खनन मंत्री बोले- प्रमुख खनिजों तक सीमित रहेंगे प्रावधानएयरटेल के ग्राहकों को महंगे प्लान में शिफ्ट करने से Vi को मिल सकता है मौका, बढ़ेगी कमाईस्मॉलकैप-मिडकैप फंड्स में फिर बढ़ी निवेशकों की दिलचस्पी, हर 3 इक्विटी फोलियो में 1 इनकाआरबीआई के नए नियमों से कर्ज दरों में बदलाव होगा तेज, बैंकों के स्प्रेड पर भी पड़ेगा असरQ1 Results: ABREL का घाटा बढ़ा, IGL का मुनाफा 44% घटा; LG Electronics का लाभ 27% बढ़ाभारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी, नीति आयोग ने औद्योगिक पार्क और क्लस्टर का दिया सुझाव

टी+0 सेटलमेंट हमारे लिए बड़ी सफलता होगी: गुरप्रीत सिदाना

Advertisement

2024 में इक्विटी बाजार निवेशकों के लिए पसंदीदा बने रहेंगे, क्योंकि वृहद परिदृश्य आशाजनक दिख रहा है।

Last Updated- December 26, 2023 | 12:38 AM IST
Gurpreet Sidana

इक्विटी बाजारों में छोटे निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है डीमैट खातों की संख्या हाल में बढ़कर 13.2 करोड़ पर पहुंच गई है।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के मुख्य कार्याधिकारी गुरप्रीत सिदाना ने एक ईमेल साक्षात्कार में पुनीत वाधवा को बताया कि भविष्य में सफल ब्रोकरेज कंपनियां वे नहीं हो सकतीं जो शून्य ब्रोकरेज वसूलती हैं, या अपने उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त लिमिट प्रदान करती हैं, या ज्यादा कारोबार के लिए इंट्राडे कॉल की सुविधा देती हैं बल्कि वे होंगी जो निवेशकों को बढ़त बनाने में मदद करती हैं। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

2024 और उसके बाद ब्रोकिंग उद्योग की स्थिति कैसी रहने का अनुमान है?

जहां वर्ष 2023 समावेशन का समय था, लेकिन हमारा मानना है कि 2024 समेकन और बदलाव का वर्ष होगा। वित्त वर्ष 2019 से डीमैट खातों की संख्या तीन गुना हो गई है और नवंबर 2023 के दौरान यह 13.2 करोड़ के पार पहुंच गई। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, रिटेल ब्रोकरेज क्षेत्र का राजस्व पहले ही दोगुना हो चुका है। यह राजस्व वित्त वर्ष 2019 में 14,000 करोड़ रुपये था जो पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर लगभग 27,000 करोड़ रुपये हो गया। नई कंपनियां भविष्य में मजबूती के साथ उभरेंगी और बाजार अवसर उन सभी के लिए काफी व्यापक हैं।

डिस्काउंट ब्रोकर दूसरों के लिए किस तरह से चुनौती पैदा कर रहे हैं? क्या अब वे उद्योग में दबदबा बना रहे हैं?

ब्रोकिंग उद्योग कीमतों, अतिरिक्त निवेश सीमाओं और टिप्स से आगे बढ़ गया है। इसलिए, सफल कंपनियां वे नहीं हो सकती हैं तो शून्य ब्रोकरेज वसूलती हैं, या अपने उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त लिमिट मुहैया कराती हैं बल्कि वे हो सकती हैं जो निवेशकों के लिए बढ़त बनाने में मदद करती हैं। यह बढ़त तकनीक और इन्फ्रास्ट्रक्चर, ग्राहक अनुभव, संपत्ति प्रबंधन, पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा (पीएमएस) में नवाचार के जरिये हासिल की जा सकती है।

भारतीय ब्रोकिंग उद्योग के लिए बड़ा बदलाव कैसे और कब आएगा?

भारत का निवेशक आधार तेजी से बढ़ रहा है और खासकर टियर-2 तथा टियर-3 शहरों में इसमें वृद्धि की अच्छी संभावना है। हमारी वृद्धि के आंकड़े विकसित देशों के मुकाबले मजबूत हैं। इस प्रकार दुनिया की सबसे बड़ी और विविध आबादी में से एक की सेवा करने के लिए, ब्रोकरेज को अनुकूल सेवाएं लाने की आवश्यकता है। हमारा मानना है कि परामर्श सेवाओं और तकनीकी नवाचार से अगला बड़ा बदलाव आएगा।

क्या ब्रोकर और वित्तीय बिचौलिया फर्में सेबी द्वारा प्रस्तावित टी+0 और त्वरित निपटान के लिए पूरी तरह से तैयार हैं?

टी+0 सेटलमेंट हमारे लिए ऐतिहासिक अवसर होगा। मौजूदा परिवेश में भी, भारत टी+1 निपटान व्यवस्था के साथ सेटलमेंट साइकल के संदर्भ में वैश्विक तौर पर तेजी से कार्य कर रहे बाजारों में से एक है। बैंक ट्रांसफर (जिसमें तुरंत और उसी तरह पैसा स्थानांतरण संभव हो सकता है) जैसी व्यवस्था शेयरों के लिए नहीं हो सकती। शेयर बाजार शेयरों तथा दों पक्षों के बीच पैसे के लेनदेन से जुड़ा होता है और इसमें कई इकाइयां बिचौलिए के तौर पर काम करती हैं।

2024 में प्राथमिक बाजारों के लिए आगे की राह कैसी है?

प्राथमिक बाजार में व्यवस्था बरकरार रहने का अनुमान है, क्योंकि कई बड़ी टेक कंपनियां दस्तक देने की तैयारी कर रही हैं। टेक कंपनियां निवेशकों को बड़ा सूचीबद्धता लाभ दे सकती हैं। निवेशकों का ध्यान कंपनियों के मूल्यांकन और उचित मूल्य के साथ अवसरों की तलाश पर रहेगा। कंपनियां निवेश चक्र में सुधार और बाजार में तरलता बढ़ने की वजह से पूंजी जुटाने को उत्साहित हैं।

2024 के लिए इक्विटी बाजारों पर आपका क्या नजरिया है?

2024 में इक्विटी बाजार निवेशकों के लिए पसंदीदा बने रहेंगे, क्योंकि वृहद परिदृश्य आशाजनक दिख रहा है। हमारा मानना है कि 2023 के दौरान सुस्त रहे लार्जकैप फिर से वापसी करेंगे। इनमें मुख्य रूप से बैंकिंग, आईटी और एफएमसीजी जैसे क्षेत्रों का मूल्यांकन आकर्षक हो गया है। 2024 के आम चुनाव का परिणाम भी मिडकैप और स्मॉलकैप के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा, क्योंकि इससे सूचकांक में फंडों के प्रवाह पर असर दिखेगा।

Advertisement
First Published - December 26, 2023 | 12:16 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement