facebookmetapixel
Budget 2026: कब और कहां देखें निर्मला सीतारमण का भाषण, डेट और लाइव स्ट्रीमिंग की पूरी जानकारीबुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत में 18.3% का इजाफा, बजट बढ़कर ₹35.1 लाख करोड़ पहुंचामॉनसून पर मंडराया अल नीनो का साया: स्काईमेट ने जताई 2026 में सूखे और कम बारिश की गंभीर आशंकाPDS में अनाज की हेराफेरी पर लगेगा अंकुश, सरकार लाएगी डिजिटल ई-रुपी वाउचरIndia- EU FTA से 5 साल में यूरोप को निर्यात होगा दोगुना, 150 अरब डॉलर तक पहुंचेगा व्यापार: पीयूष गोयलMoody’s का दावा: यूरोपीय संघ के साथ समझौता भारत को देगा बड़ा बाजार, अमेरिकी टैरिफ से मिलेगी सुरक्षाRBI का नया कीर्तिमान: स्वर्ण भंडार और डॉलर में उतार-चढ़ाव से विदेशी मुद्रा भंडार सर्वकालिक उच्च स्तर परBPCL की वेनेजुएला से बड़ी मांग: कच्चे तेल पर मांगी 12 डॉलर की छूट, रिफाइनिंग चुनौतियों पर है नजरमासिक धर्म स्वास्थ्य अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार: छात्राओं को मुफ्त मिलेगा सैनिटरी पैड500 यूनिवर्सिटी छात्रों को मिलेंगे GPU और AI टूल्स, इंडिया AI मिशन का दायरा बढ़ाएगी सरकार

Stock Market: विदेशी बिकवाली पर देसी निवेशकों ने बढ़ाई खरीद, म्युचुअल फंड और बीमा कंपनियों ने थामी गिरावट

खरीदारी की यह दौड़ अकेली घटना नहीं है। ऐतिहासिक तौर पर घरेलू संस्थागत निवेशकों (खास तौर से फंडों) ने विदेशी फंडों की तेज बिकवाली के दौरान खरीदारी का मौका देखा।

Last Updated- October 08, 2024 | 10:06 PM IST
FPI Investments

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की भारी बिकवाली के बीच देसी संस्थागत निवेशकों (म्युचुअल फंड और बीमा कंपनियां) ने इस महीने खरीद में बढ़ोतरी की है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने अक्टूबर में तीन दिन सबसे बड़ी एकदिवसीय खरीद की और एफपीआई की निकासी के बीच उन्होंने बाजार में नकदी डाली। सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार गिरावट के छठे दिन सोमवार को उन्होंने बाजार में रिकॉर्ड 13,245 करोड़ रुपये की खरीद की।

खरीदारी की यह दौड़ अकेली घटना नहीं है। ऐतिहासिक तौर पर घरेलू संस्थागत निवेशकों (खास तौर से फंडों) ने विदेशी फंडों की तेज बिकवाली के दौरान खरीदारी का मौका देखा। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सतत निवेश से म्युचुअल फंडों को बाजार में गिरावट के दौरान खरीद का सामर्थ्य मिलता है।

घरेलू समर्थन से भारतीय बाजारों को गिरावट थामने में मदद मिली है और उतार-चढ़ाव नियंत्रण में रहा है। अक्टूबर 2021 से जून 2022 के बीच एफपीआई ने भारतीय बाजार से 2.56 लाख करोड़ रुपये निकाले जिससे बाजार में 18 फीसदी की गिरावट आई। लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीद से बाजार को कुछ ही महीनों में सारे नुकसान की भरपाई करने में मदद मिली।

एफपीआई और देसी संस्थागत निवेशकों के बीच जोरदार रस्साकशी से सेंसेक्स 26 सितंबर को अपने सर्वोच्च स्तर से 5 फीसदी पीछे चला गया था। देसी निवेशकों की तेज खरीदारी से गिरावट कम करने में मदद मिली, लेकिन एफपीआई की भारतीय परिसंपत्तियों में 1 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा की हिस्सेदारी से यह सुनिश्चित होता है कि उनकी गतिविधियां भी बाजार को दिशा देने वाली बनी हुई हैं।

First Published - October 8, 2024 | 10:06 PM IST

संबंधित पोस्ट