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GST रिफॉर्म्स के प्रस्तावों ने भारतीय शेयर बाजार को संकट से बचाया: क्रिस वुड

जेफरीज के अनुमान के मुताबिक, टैरिफ का इंडियन इकॉनमी पर करीब 55-60 अरब डॉलर का सीधा झटका है, और सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्टर वस्त्र, जूते, आभूषण और रत्न हैं

Last Updated- August 29, 2025 | 12:05 PM IST
Jefferies Chris Wood
Jefferies के ग्लोबल इक्विटी स्ट्रेटजी हेड क्रिस्टोफर वुड (फाइल फोटो)

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) में रिफॉर्म्स के प्रस्तावों ने अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ के खतरे के बीच भारतीय शेयर बाजारों को तेज गिरावट से बचाने में मददगार साबित हुआ। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) के ग्लोबल इक्विटी स्ट्रेटजी हेड Chris Wood ने अपने हालिया निवेश नोट ‘GREED & fear’ में यह बात ही।

वुड ने अपनी इंडिया लॉन्ग-ओनली इक्विटी पोर्टफोलियो से आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट का निवेश हटा दिया है और इसे महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) में बदल दिया है।

वुड ने कहा, “भारतीय शेयर बाजार ने हाल ही में 50 फीसदी टैरिफ खतरे के बावजूद ज्यादा नकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी, खासकर कंजम्पशन वाले शेयरों में, क्योंकि सरकार का पॉलिसी रिएक्शन लगातार तेज हो रहा है। फरवरी के बजट में आयकर में कटौती पहले ही लागू की जा चुकी है। लेकिन हाल ही में ज्यादा सकारात्मक खबर यह है कि GST में सुधार और सरलीकरण का प्रस्ताव है।”

अमेरिकी प्रशासन ने 27 अगस्त को भारत से होने वाले सामानों के निर्यात पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लागू कर दिया, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स बाहर थे।

जेफरीज के अनुमान के मुताबिक, यह अर्थव्यवस्था पर लगभग 55-60 अरब डॉलर का सीधा झटका है, और सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्टर वस्त्र, जूते, आभूषण और रत्न है। इन सेक्टर्स में रोजगार के ज्यादा मौके भी बनते हैं।

बाजार में अगस्त 2025 में Nifty50 एक फीसदी गिर गया, जो टैरिफ से संबंधित चिंताओं का संकेत है। फार्मा, रियल्टी, ऑयल एंड गैस, बैंक, रियल्टी और CPSE इंडेक्स इस अवधि में 5 फीसदी तक गिरकर कमजोर प्रदर्शन कर चुके हैं।

यह भी पढ़ें: अमेरिकी टैरिफ सिर्फ दिखावा, लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट निवेश का अवसर: नीलेश शाह

ACE Equity के डेटा के मुताबिक, GST दरों में कटौती की संभावना से Nifty Auto, Nifty India Consumption और Nifty Consumer Durables इंडेक्स को इस अवधि में 6.5 फीसदी तक उछल गए।

वुड ने कहा, “पिछले सप्ताह के अंत में नई दिल्ली में हुई बातचीत से स्पष्ट हुआ कि टैरिफ मुख्य रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति की ‘व्यक्तिगत नाराजगी’ का नतीजा हैं, क्योंकि मई में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन चले सैन्य संघर्ष के बाद लंबित मतभेद को समाप्त करने में उनकी भूमिका के दावे को भारत ने खारिज कर दिया।”

ग्रोथ पर दिखेगा असर

Chris Wood का मानना है कि टैरिफ मसला और भी अहम है क्योंकि भारत में ग्रोथ धीमी हो गई है, विशेषकर नॉमिनल GDP ग्रोथ , जो शेयर बाजारों के लिए भी अहम है। अनुमान है कि इस तिमाही में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 8 फीसदी (YoY) रह सकती है, जो हाल के वर्षों की 10-12 फीसदी की ट्रेंड से कम है।

उन्होंने कहा कि नॉमिनल ग्रोथ रेट में सुस्ती की अहम वजह यह है कि जुलाई में खुदरा महंगाई दर आठ साल के निचले स्तर 1.6 फीसदी (YoY) थी और थोक महंगाई दर -0.6 फीसदी (YoY) रही।

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कंजम्प्शन स्टॉक्स की मजबूती

Chris Wood का मानना है कि घरेलू फंड मैनेजर्स ने इस साल अपने पोर्टफोलियो को साइ​क्लिक पूंजीगत व्यय (capex) से उपभोग (consumption) शेयरों की ओर झुका दिया, जिससे 50 फीसदी टैरिफ खतरे के बावजूद कंजम्प्शन स्टॉक्स की मजबूती बनी रही।

उनका कहना है, “50 फीसदी टैरिफ नि​श्चित रूप से ज्यादा जॉब पैदा करने वाली इंडस्ट्री में छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए भारी नकारात्मक असर डाल सकते हैं। इससे माइक्रोफाइनेंस और कंजम्प्शन फाइनेंस कंपनियों पर भी लंबी अवधि में नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।” हालांकि, भारत के लिए अन्य बड़े एशियाई अर्थव्यवस्थाओं जैसे चीन और इंडोनेशिया की तुलना में एक सकारात्मक बिंदु यह है कि भारतीय शेयर बाजार से आम निवेशकों की भागीदारी कम नहीं हुई है।

उन्होंने सुझाव दिया कि “मंथली आधार पर इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश की मजबूती बनी हुई है, और पसंदीदा इंस्ट्रूमेंट्स मंथली सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) है। ये इनफ्लो नियर टर्म में बने रहने की संभावना है।”

First Published - August 29, 2025 | 12:05 PM IST

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