डी बीयर्स ग्रुप भारत में नैचुरल हीरों के लिए अपने मार्केटिंग खर्च को दोगुना कर रहा है और इसमें उसका निवेश अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है। डी बीयर्स ग्रुप के मुख्य कार्याधिकारी अल कुक और डी बीयर्स ग्रुप की वैश्विक वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं फॉरएवरमार्क की सीईओ श्वेता हरित ने मुंबई में शार्लीन डिसूजा के साथ बातचीत में भारतीय हीरा बाजार में कंपनी के योगदान के बारे में बात की। बातचीत के अंश:
क्या डी बीयर्स भारत में मार्केटिंग पर बहुत ज्यादा खर्च कर रही है?
कुक: हम अगले साल दो तरह की मार्केटिंग करेंगे। हम अपनी कैटेगरी मार्केटिंग जारी रखेंगे, जिसमें लव, फ्रॉम डैड, लव, फ्रॉम बेस्टी और आईपीएल जैसे कैंपेन की सफलता को आगे बढ़ाएंगे। इसके साथ ही, हम फॉरएवरमार्क के लिए अपनी मार्केटिंग मजबूत बनाएंगे। लॉन्च के बाद इस सप्ताह तक हमारे पास पांच फॉरएवरमार्क स्टोर हैं जो साल के आखिर तक बढ़कर लगभग 25 हो जाएंगे। हम फॉरएवरमार्क के लिए खास तौर पर मार्केटिंग भी करेंगे। भारत हमारे लिए तेजी से बढ़ता हुआ महत्त्वपूर्ण बाजार बन रहा है और हम उसी हिसाब से यहां निवेश कर रहे हैं।
हरित: फॉरएवरमार्क के लिए इस साल का खर्च पिछले साल के मुकाबले ज्यादा होगा। पिछले साल हमारे पास कम स्टोर थे। इस साल, हम पूरी तरह से मार्केटिंग पर ध्यान बढ़ाकर नई शुरुआत कर रहे हैं।
भारत अमेरिका के बाद दुनिया का हीरों का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में डी बीयर्स के लिए भारतीय बाजार कैसा चल रहा है?
कुक: असल में, यह अब और भी ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। हमारा मानना है कि 2025 में भारत में लगभग 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जो दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले सबसे ज्यादा है। इसकी वजह भारत की आर्थिक वृद्धि है, साथ ही गहनों और हीरों के प्रति लोगों का गहरा प्यार भी है। यह कॉम्बिनेशन हीरों और डी बीयर्स दोनों के लिए बहुत अच्छा है।
क्या आपको लगता है कि 2026 में भी पारंपरिक हीरों में यह वृद्धि जारी रहेगी?
कुक: भारत पिछले कई साल से तेजी से बढ़ रहा है। हमने लगातार चार वर्षों – 2022, 2023, 2024 और 2025 में प्राकृतिक हीरों की मांग में दो अंक की वृद्धि दर्ज की है। हमें उम्मीद है कि यह रफ्तार 2026 और 2027 में भी जारी रहेगी। सोने की ऊंची कीमतों का कुछ असर हुआ है। लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने मांग को बनाए रखने में मदद की है। हम इससे बहुत खुश हैं। अब जब हमारे पास भारत में एक रिटेल ब्रांड है, साथ ही हमारी कैटेगरी के हिसाब से डायमंड मार्केटिंग भी है, तो ऐसे में हम इन दोनों- कैटेगरी मार्केटिंग और फॉरएवरमार्क- के बीच तालमेल बिठाकर इसे और बढ़ा सकते हैं
सोने की मौजूदा कीमतों को देखते हुए, क्या आपको जड़ाऊ ज्वैलरी की मांग में तेजी दिख रही है?
हरित: हां, हम देख रहे हैं कि कई लोग सिर्फ हीरे या जड़े हुए आभूषणों की बिक्री के लिए हमसे संपर्क कर रहे हैं। सोने के मार्जिन पर दबाव है और सिर्फ सोना बेचना मुश्किल हो गया है। मेरा मानना है कि स्टडेड यानी जड़ाऊ आभूषणों की मांग बढ़ेगी।
भारत में लैब में बने हीरे भी लोकप्रिय हो रहे हैं। क्या आपको लगता है कि इससे नेचुरल हीरों की मांग पर असर पड़ेगा?
कुक: भारतीय उपभोक्ता शायद दुनिया का सबसे समझदार आभूषण उपभोक्ता है। दुनिया में कहीं और उपभोक्ता सोने और हीरों की क्वांटिटी जानने पर इतना जोर नहीं देते, जितना भारत में देते हैं। यह समझदारी मायने रखती है, खासकर इसलिए कि लैब में बने और नेचुरल हीरों के बीच वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता रही है। यही वजह थी कि लैब में बने हीरों की कीमतें पहले बढ़ीं और फिर गिर गईं। भारत में, हम कुछ अलग देख रहे हैं। लैब में बने हीरे रिटेल में आ रहे हैं, लेकिन कम कीमतों पर। उपभोक्ता समझते हैं कि वे क्या खरीद रहे हैं। उन्हें पता है कि यह नेचुरल डायमंड नहीं है, उन्हें पता है कि यह एक कमोडिटी बन गया है।