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NSE की SEBI से दरख्वास्त, IPO के आवेदन पर नए सिरे से किया जाए विचार

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एनएसई का आईपीओ कोलोकेशन, डार्क फाइबर एवं कंपनी प्रशासन में खामी जैसे मसलों पर चल रहे मुकदमों और तमाम अदालतों में अटके मामलों के कारण अधर में है।

Last Updated- July 04, 2024 | 11:03 PM IST
NSE Tick Size

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से उसके आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) आवेदन पर नए सिरे से विचार करने की दरख्वास्त की है। एनएसई ने दिसंबर 2016 में आईपीओ का मसौदा जमा कराया था, जिसे सेबी ने 2019 में वापस कर दिया था। उस समय एनएसई को कोलोकेशन मामले में जांच पूरी होने पर नए सिरे से आवेदन करने की सलाह दी गई थी।

एनएसई के आईपीओ में तेजी लाने के लिए पीपल एक्टिविज्म फोरम ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की है और उस पर सुनवाई चल रही है। एक्सचेंज ने 19 जून को अदालत में दायर हलफनामे में कहा कि उसको दस्तावेज दाखिल किए 7 साल गुजर चुके हैं और सेबी को मसौदा वापस किए भी 5 साल से ज्यादा हो गए हैं। इसलिए उसके आवेदन पर नए तथ्यों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए गौर होना चाहिए।

एक्सचेंज ने कहा है, ‘सभी लंबित मामले पूरी तरह निपटाना फिलहाल संभव नहीं होगा क्योंकि उनमें से कुछ मामले सर्वोच्च न्यायालय में हैं। सेबी (एलओडीआर) विनियम के तहत जानकारी के प्रावधानों को देखा जाए तो यह भी डीआरएचपी के तहत आवश्यक खुलासे में शामिल होना चाहिए।’

दिल्ली उच्च न्यायालय में मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी। न्यायालय ने मई में पिछली सुनवाई के दौरान एनएसई और सेबी को चार हफ्ते के भीतर जवाब देने के लिए कहा था। एनएसई ने कहा है कि उसने जानकारी देने या खुलासा करने के बारे में सेबी के सभी दिशानिर्देशों का पालन किया है।

एनएसई का आईपीओ कोलोकेशन, डार्क फाइबर एवं कंपनी प्रशासन में खामी जैसे मसलों पर चल रहे मुकदमों और तमाम अदालतों में अटके मामलों के कारण अधर में है।

एनएसई ने कहा है कि अधिकतर मामले अपने अंतिम चरण में पहुंचने वाले हैं और हो सकता है कि उनमें प्रशासन तथा नियमन के उन मानदंडों की झलक न दिख सके, जिनका इस्तेमाल अब वह कर रहा है।

एनएसई ने कहा है, ‘अप्रैल और मई 2024 में भारत में स्टॉक एक्सचेंजों पर वोडाफोन आइडिया (FPO) और आधार हाउसिंग फाइनैंस सिक्योरिटीज की सूचीबद्धता जैसे उदाहरण पर गौर किया जा सकता है। इन संस्थाओं के वित्तीय एवं प्रशासन संबंधी मुद्दों पर प्रभाव डालने वाले मुकदमे चल रहे हैं फिर भी बाजार नियामक ने खुलासा व्यवस्था के आधार पर मसौदा दस्तावेज को प्रकाशित करने के लिए मंजूरी दी थी।’

पीपल एक्टिविज्म फोरम ने न्यायालय में दायर अपनी याचिका में कहा है कि एनएसई के शेयर को सूचीबद्ध करने में कोई बाधा नहीं है क्योंकि कोलोकेशन मामले में बाजार नियामक द्वारा लगाया गया छह महीने का प्रतिबंध अक्टूबर 2019 में ही पूरा हो चुका है।

एनएसई ने प्रतिस्पर्धी स्टॉक एक्सचेंज बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) के साथ-साथ लंदन स्टॉक एक्सचेंज, न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और सिंगापुर स्टॉक एक्सचेंज जैसे कई बड़े वैश्विक एक्सचेंजों का हवाल देते हुए कहा है कि वे काफी समय से सूचीबद्ध हैं और दुनिया भर में खुलेआम उनके शेयरों का कारोबार होता है।

एनएसई ने हलफनामे में कहा है कि उसके सूचीबद्ध होने से सभी को फायदा होगा। शेयरधारकों की संख्या मार्च 2022 में 2,607 थी, जो बढ़कर 31 मई, 2024 तक करीब 15,000 हो चुकी है। इससे पता चलता है कि इन शेयरों में नियमित तौर पर खरीद-फरोख्त होता है। स्टॉक एक्सचेंज से इतर एनएसई के शेयरों का काफी कारोबार होता है। उसके प्लेटफॉर्म पर करीब 10 लाख यूनीक निवेशक 1,300 पंजीकृत ब्रोकरों के जरिये कारोबार करते हैं।

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First Published - July 4, 2024 | 10:25 PM IST

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