ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव ने निवेशकों की घबराहट बढ़ा दी जिससे शेयर बाजार में भारी गिरावट आई। दोनों इक्विटी बेंचमार्कों में आज 8 महीने की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कंपनियों की आय में नरमी और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में खास प्रगति नहीं होने से भी बाजार की धारणा प्रभावित हुई।
सेंसेक्स 1,066 अंक या 1.3 फीसदी की गिरावट के साथ 82,181 पर बंद हुआ। निफ्टी 353 अंक या 1.4 फीसदी के नुकसान के साथ 25,233 पर बंद हुआ। दोनों सूचकांक तीन महीने के निचले स्तर पर बंद हुए और इनमें 13 मई 2025 के बाद एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट आई।
निफ्टी मिडकैप 2.6 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 2.9 फीसदी नुकसान पर बंद हुए। इन दोनों सूचकांकों में 7 अप्रैल, 2025 के बाद एक दिन में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई। स्मॉलकैप सूचकांक 8 महीने के निचले स्तर पर आ गया है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 10 लाख करोड़ रुपये घटकर 456 लाख करोड़ रुपये रह गया।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 2,938 करोड़ रुपये के शेयर बेचे और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 3,666 करोड़ रुपये की शुद्ध लिवाली की। भू-राजनीतिक तनाव से निवेशक सुरक्षित ठिकाना माना जाने वाली परिसंपत्तियों चांदी और सोने में निवेश को तव्वजो दे रहे हैं। इससे सोना 4,733 डॉलर प्रति औंस और चांदी 95.3 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।
कंपनियों की स्थिर आय और भारत-अमेरिका व्यापार करार में देरी से घरेलू शेयरों पर पहले से ही दबाव बना हुआ है।
चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में अभी तक जितनी कंपनियों ने नतीजे जारी किए हैं उनसे आय और मुनाफे में नरमी का पता चलता है। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में 142 कंपनियों का कुल शुद्ध मुनाफा महज 3.5 फीसदी बढ़ा जो वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में 11.2 फीसदी बढ़ा था। आय वृद्धि भी एक अंक में रही।