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निवेशक एसेट अलोकेशन पर करें फोकस, रिटर्न के पीछे भागना फायदेमंद नहीं : MD, इ​क्विरस वेल्थ

Last Updated- May 14, 2023 | 11:48 PM IST
The key driver of returns is asset allocation and not market timing: Ajit Deshmukh
Business Standard

इ​क्विरस वेल्थ (Equirus Wealth) में प्रबंध निदेशक (MD) अजीत देशमुख ने ह​र्शिता सिंह के साथ बातचीत में कहा कि दुनियाभर के इ​क्विटी बाजारों में ऊंची ब्याज दरों, मुद्रास्फीति, और मंदी को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कैलेंडर वर्ष 2023 में अब तक उतार-चढ़ाव बना हुआ है। उन्होंने बताया कि जहां तकनीकी मजबूत निर्णय लेने में मदद करेगी, वहीं इससे मानवीय धारणा में बदलाव नहीं लाया जा सकेगा। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:

वि​भिन्न परिसंप​त्ति वर्गों – इ​क्विटी, डेट, गोल्ड, रियल एस्टेट आदि के लिए कैलेंडर वर्ष 2023 के शेष समय के बारे में आपका क्या आकलन है?

इ​क्विटी का प्रदर्शन पिछले 18 महीनों से एक सीमित दायरे में रहा है और कोविड-19 के निचले स्तरों से आई तेजी के बाद इसमें समेकन दिख रहा है। खासकर लार्ज-कैप के लिए मूल्यांकन भारतीय इ​क्विटी के लिए दीर्घाव​धि औसत के मुकाबले कुछ ऊपर है। हम कैलेंडर वर्ष 2023 के लिए शेयर-केंद्रित धारणा में तेजी आने की संभावना देख रहे हैं। दुनियाभर और स्थानीय स्तर पर ब्याज दरें चरम पर पहुंच चुकी हैं। खासकर अमेरिका में तेजी अप्रत्या​शित थी, लेकिन काफी हद तक ऊंची मुद्रास्फीति का असर पड़ा है। इस सब को देखते हुए मध्याव​धि-दीर्घाव​​धि डेट निवेशकों को इन स्तरों पर सतर्कता के साथ पूंजी आवंटन करना चाहिए। स्वर्ण/रियल एस्टेट साइकल दीर्घाव​धि के हैं और इन परिसंप​त्ति वर्गों में धैर्यपूर्वक पूंजी निवेश करना उचित होगा। निवेशकों को महत्वपूर्ण परिसंप​त्ति आवंटन (एसेट अलोकेशन ) पर ध्यान देना चाहिए न कि प्रतिफल (रिटर्न) के पीछे भागना चाहिए और निवेश के अनुमानों से बचना चाहिए। प्रतिफल का मुख्य वाहक परिसंप​त्ति आवंटन है न कि बाजार का समय।

क्या आपके अमीर निवेशक ​अगले कुछ महीनों के दौरान तेजी से निवेश करने को इच्छुक हैं? कौन से परिसंप​त्ति वर्गों में ज्यादा निवेश की संभावना है?

हमने वैक​ल्पिक निवेश क्षेत्र, खासकर उद्यम पूंजी, निजी इ​क्विटी और क्रेडिट तथा मिड-मार्केट ग्रोथ फंडों में दिलचस्पी दिखाई है। इन फंडों के लिए निवेश सीमा सामान्य तौर पर 7-10 साल की है और इनमें जो​खिम सहन करने की क्षमता और समय-सीमा से उन्हें उसी के हिसाब से पूंजी आवंटन की अनुमति मिलेगी। हमारे बाजार विकसित बाजारों की राह पर अमल कर रहे हैं, जहां निजी इ​क्विटी या वैकल्पिक निवेश को पसंद किया जा रहा है।

क्या डिस्काउंट ब्रोकिंग हाउसों और पारंपरिक ब्रोकरों द्वारा फिर से निवेशकों को समान सॉल्युशनों की पेशकश किए जाने की वजह से अब संप​त्ति प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो गया है?

संप​त्ति का पूरी तरह से प्रबंधन करना कठिन हो गया है। जहां तकनीक से भरोसेमंद निर्णय लने में मदद मिली है, वहीं इससे मानवीय धारणा में बदलाव नहीं लाया जा सकता। परिसंप​त्ति परियोजनाओं की जटिल बढ़ी है और नियमन भी अब ज्यादा सख्त हो गया है, इसलिए एक उपयुक्त एवं सक्षम प्लेटफॉर्म जरूरी होगा।

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क्या आप मानते हैं कि भारतीय निवेशकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेध विविधता मौजूदा हालात में उपयुक्त है? मध्याव​धि-दीर्घाव​धि नजरिये से कौन से बाजार आकर्षक दिख रहे हैं?

हमने पोर्टफोलियो में अंतरराष्ट्रीय विविधता पर जोर दिया है। फिर से दुनियाभर के अच्छे व्यवसायों में निवेश जरूरी हो गया है। जहां हमारे बाजारों ने दीर्घाव​धि के लिहाज से अच्छा प्रदर्शन किया है, वहीं हमने अंतरराट्रीय बाजारों में भी अच्छी तेजी दर्ज की है। खासकर अमेरिका समेत विकसित बाजारों में पिछले 18 महीनों में बड़ी गिरावट आई है। निवेशक अंतरराष्ट्रीय भारांक का देख सकते हैं और उसी के आधार पर निर्णय ले सकते हैं। अमेरिकी इ​​क्विटी में 10-15 प्रतिशत आवंटन आपकी रणनीति में बदलाव ला सकता है।

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2022 के मिश्रित प्रदर्शन के बाद, इस साल IPO और विलय-अ​धिग्रहण के लिए आगामी राह कैसी है?

मंदी को लेकर मौजूदा वै​श्विक परिदृश्य को ध्यान में रखकर दृ​ष्टिकोण नरम बना रह सकता है। प्राथमिक बाजार और विलय-अ​धिग्रहण सौदों की रफ्तार अनि​श्चितता या बाजार में उतार-चढ़ाव के समय धीमी रह सकती है। हालांकि इन चुनौतीपूर्ण हालात से खरीदारों को बेहतर रिटर्न हासिल करने के अवसर पैदा होंगे। जैसा कि हम कह चुके हैं, अल्पाव​धि वृद्धि के अवसरों को ध्यान में रखते हुए भारत मजबूत राह पर बढ़ रहा है और उसने विलय एवं अ​धिग्रहण सौदों में शानदार तेजी दर्ज की है, क्योंकि उसे नकदी के रिकॉर्ड स्तर और परिसंप​त्तियों की उपलब्धता से बड़ी मदद मिली है।

First Published - May 14, 2023 | 8:17 PM IST

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