कमोडिटी ट्रेडिंग में भारत अपनी स्थिति को फिर से हासिल करने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) ने सरकार से कमोडिटी ट्रेडिंग को बढ़ावा देने और गिफ्ट-आईएफएससी में सहभागिता बढ़ाने के लिए कई नियामकीय बदलावों की मांग की है। ये प्रस्ताव विशेषज्ञ समिति की पूर्व रिपोर्ट से लिए गए हैं।
इन प्रस्तावों का मकसद गुजरात स्थित वित्तीय केंद्र को जिंस कारोबार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। एक प्रमुख सिफारिश यह है कि जिंस कारोबार को आईएफएससीए अधिनियम के तहत वित्तीय प्रोडक्ट के रूप में अधिसूचित किया जाए, साथ ही भंडारण और जिंस ब्रोकिंग को वित्तीय सेवाओं के रूप में माना जाए।
प्राधिकरण के अनुसार, इस बदलाव से कमोडिटी बाजार एक एकीकृत नियामक ढांचे के तहत आ जाएंगे। गिफ्ट सिटी के प्रबंध निदेशक (एमडी) और ग्रुप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) संजय कौल ने कहा, इसकी मुख्य सिफारिश कमोडिटी और कमोडिटी डेरिवेटिव को आईएफएससीए अधिनियम के तहत वित्तीय प्रोडक्ट के रूप में अधिसूचित करने की है। इससे एक अकेला एकीकृत ढांचा बनेगा जिसके दायरे में एक्सचेंज-ट्रेडेड, ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) और स्ट्रक्चर्ड कमोडिटी उत्पाद आ सकेंगे। इससे अलग-अलग नियामकों के नियम कम होंगे और अन्य आईएफएससी की तुलना में पूंजी दक्षता में सुधार होगा।
समिति ने नियमों में संशोधन का सुझाव भी दिया है ताकि आईएफएससीए को उन जिंसों की सूची अधिसूचित करने का अधिकार मिल सके, जिनके डेरिवेटिव जारी किए जा सकते हैं। इस तरह मंजूर अनुबंधों का दायरा बढ़ जाएगा। अभी सूची में 104 जिंस शामिल हैं, जिनके बारे में समिति ने कहा कि इनके डेरिवेटिव जारी करने की अनुमति को लेकर अस्पष्टता बनी हुई है।
एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव जिंसों की व्यापक परिभाषा अपनाना है, जिसके लिए प्रतिबंध सूची का नजरिया अपनाना होगा यानी उन सभी जिंसों में कारोबार की इजाजत देना जिन पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध नहीं है।
कौल ने कहा, समिति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेंचमार्क वाले, नकद निपटान और डिलिवरी योग्य कमोडिटी डेरिवेटिव के विकास का भी प्रस्ताव किया, जिससे गिफ्ट-आईएफएससी उन कमोडिटीज के लिए कीमत तय करने वाले और हेजिंग केंद्र के रूप में विकसित हो सके, जो स्वाभाविक रूप से भारत से जुड़ी हैं। इसके अलावा, केंद्रीय समाशोधन और नेटिंग के साथ ओवर-द-काउंटर कमोडिटी डेरिवेटिव, कमोडिटी-लिंक्ड नोट्स, इंडेक्स और फंडों को सक्षम बनाने से वैश्विक बैंक, ट्रेडिंग हाउस और ऐसेट मैनेजर भी आकर्षित होंगे।
हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों ने बताया कि इन सिफारिशों को लागू करने के लिए कई मंत्रालयों से अनुमोदन लेना होगा और अंतर-विभागीय रूप से व्यापक परामर्श की जरूरत होगी। विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत आईएफएससी में कार्यरत इकाइयों को विदेशी संस्थाओं के रूप में माना जाता है, लेकिन वे विदेशी व्यापार (विकास एवं नियमन) अधिनियम, 1992 और विदेश व्यापार महानिदेशालय की विदेश व्यापार नीति से प्रशासित होती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कर प्रोत्साहन दिया जाए और आईएफएससी बैंकों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में कमोडिटी ट्रेडिंग की अनुमति दी जाए। इसमें उल्लेख किया गया है कि प्रमुख भारतीय कमोडिटी ट्रेडर दुबई, सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग जैसे केंद्रों की ओर लगातार पलायन कर रहे हैं, जिसका कारण क्रेडिट की आसान उपलब्धता, निर्बाध बैंकिंग और ज्यादा अनुकूल नियामकीय व्यवस्थाएं हैं।