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Sebi ने OFS और ESOP के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा, जनता से मांगे सुझाव

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सेबी ने इन सभी प्रस्तावों पर 10 अप्रैल 2025 तक जनता से सुझाव मांगे हैं।

Last Updated- March 20, 2025 | 6:59 PM IST
SEBI

बाजार रेगुलेटर सेबी ने पब्लिक इश्यू से जुड़े नियमों को आसान और साफ बनाने के लिए नए प्रस्ताव रखे हैं। गुरुवार को सेबी ने एक सलाह पत्र जारी कर कहा कि वह Offer for Sale (OFS) और Employee Stock Options (ESOPs) को लेकर कुछ नियमों में बदलाव करना चाहती है, जिससे शेयर बाजार में प्रक्रियाएं और पारदर्शी हो सकें।

सेबी ने यह बदलाव दो मुख्य नियमों में सुझाए हैं — ICDR (Issue of Capital Disclosure Requirements) और Share Based Employee Benefits (SBEB) से जुड़े नियम।

OFS में मिनिमम होल्डिंग पीरियड को लेकर साफ नियम

सेबी ने OFS में शेयर बेचने से पहले शेयरों के न्यूनतम होल्डिंग पीरियड को लेकर स्पष्टीकरण देने का प्रस्ताव दिया है। फिलहाल नियम के अनुसार, पब्लिक इश्यू में दिए गए शेयरों को कम से कम एक साल तक होल्ड करना जरूरी है। लेकिन यदि ये शेयर किसी स्कीम के तहत अनिवार्य रूप से कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज (जैसे डिपॉजिटरी रिसीट्स) से मिले हैं, तो नियम स्पष्ट नहीं है।

उदाहरण के तौर पर- मान लीजिए किसी कंपनी ने कुछ लोगों को कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज दिए। ये सिक्योरिटीज बाद में अपने आप या किसी तय तारीख पर कंपनी के शेयर में बदल जाएंगी। अब OFS (Offer for Sale) के नियम कहते हैं कि शेयर बेचने से पहले उन शेयरों को कम से कम 1 साल तक रखना जरूरी है। अगर किसी ने सीधे शेयर खरीदे हैं तो तो 1 साल की गिनती आसान है। लेकिन जिन लोगों के पास पहले से कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज थीं, और वो बाद में शेयर में बदलीं तो क्या 1 साल की गिनती सिक्योरिटीज मिलने से होगी या शेयर में बदलने के बाद से? इसी बात को लेकर सेबी ने प्रस्ताव दिया है।

सेबी का कहना है कि इस स्थिति में कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज की होल्डिंग अवधि और बाद में मिले शेयरों की होल्डिंग अवधि — दोनों को मिलाकर देखा जाए। अगर शेयर किसी मंजूर स्कीम के तहत मिले हैं, तो एक साल की होल्डिंग शर्त से छूट दी जाए।

ESOP को लेकर संस्थापकों के लिए नियम साफ

सेबी ने Employee Stock Options (ESOPs) को लेकर भी एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। यदि किसी कंपनी के संस्थापक को ESOPs पहले ही दिए गए हैं और बाद में वही संस्थापक Promoter के रूप में कैटेगराइज हो जाते हैं, तो उनके ESOPs पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यानी, प्रमोटर बन जाने के बाद भी वे पहले से मिले ESOPs का फायदा उठा सकते हैं।

हालांकि, प्रमोटर बनने के बाद उन्हें कोई नया ESOP जारी नहीं किया जाएगा। सेबी ने कहा कि मौजूदा नियम ESOPs को लेकर स्पष्ट नहीं हैं कि प्रमोटर बनने के बाद पुराने ESOPs का क्या होगा, इसलिए यह स्पष्टीकरण दिया जा रहा है।

जनता से सुझाव मांगे

सेबी ने इन सभी प्रस्तावों पर 10 अप्रैल 2025 तक जनता से सुझाव मांगे हैं। इन बदलावों का मकसद नियमों को सरल और स्पष्ट बनाना है, ताकि शेयर बाजार में निवेश और कंपनियों के लिए प्रक्रियाएं आसान हों। (PTI के इनपुट के साथ)

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First Published - March 20, 2025 | 6:52 PM IST

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