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SEBI ने IPO और MPS नियमों में दी ढील, FPI रजिस्ट्रेशन के लिए सिंगल विंडो शुरू करने का ऐलान

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सेबी नेआईपीओ के लिए न्यूनतम शेयरों की बिक्री की सीमा कम कर दी और एमपीएस के लक्ष्य को हासिल करने के लिए समय-सीमा बढ़ा दी है

Last Updated- September 12, 2025 | 10:37 PM IST
SEBI
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शुक्रवार को बड़ी कंपनियों को बाजार सूचीबद्धता के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कुछ बड़े फैसले लिए। सेबी ने आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के लिए न्यूनतम शेयरों की बिक्री की सीमा कम कर दी और न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) के लक्ष्य को हासिल करने के लिए समय-सीमा बढ़ा दी है।

सेबी ने एंकर निवेशक ढांचे में भी बदलावों को मंजूरी दी है जिसमें घरेलू म्युचुअल फंडों के साथ-साथ जीवन बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों को एंकर हिस्से के लिए आरक्षित श्रेणी में शामिल किया गया है। 

सेबी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए अनुपालन बोझ कम करने के मकसद से एक ‘सिंगल विंडो’ की घोषणा की है, जिससे कुछ एफपीआई के लिए पंजीकरण प्रक्रिया आसान हो जाएगी। सेबी को हर महीने 100 से ज्यादा एफपीआई पंजीकरण आवेदन मिल रहे हैं।

कम न्यूनतम सार्वजनिक पेशकश (एमपीओ) या शेयरों की बिक्री से सूचीबद्धता से जुड़ी आवश्यकताओं में कमी आएगी। बाजार नियामक ने कहा है कि आईपीओ के माध्यम से बड़ी संख्या में शेयरों की बिक्री करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि बाजार शेयरों की इतनी बड़ी आपूर्ति संभाल नहीं सकता है। इसके कारण ऐसी कंपनियां भारत में सूचीबद्धता कराने के लिए कम उत्साहित हो सकती हैं। 

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निर्गम के बाद करीब 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों को 15,000 करोड़ रुपये के शेयर और  बाजार पूंजीकरण के कम से कम 1 फीसदी अतिरिक्त शेयर जारी करने होंगे। वहीं न्यूनतम 2.5 फीसदी शेयरों की बिक्री भी अनिवार्य की गई है।

आगे 1 लाख करोड़ रुपये से 5 लाख करोड़ रुपये के बीच के बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों के लिए, न्यूनतम सार्वजनिक पेशकश 6,250 करोड़ रुपये और आईपीओ के बाद बाजार पूंजीकरण के 2.75 फीसदी तक अतिरिक्त बिक्री करनी होगी।

इसके अलावा, यदि सूचीबद्धता के समय ऐसी कंपनियों में सार्वजनिक शेयरधारिता 15 फीसदी से कम है, तब उन्हें 15 फीसदी तक पहुंचने के लिए पांच साल और कुल 25 फीसदी एमपीएस तक पहुंचने के लिए 10 साल का समय मिलेगा। करीब 50,000 करोड़ रुपये से कम के बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों के लिए सार्वजनिक निर्गम के नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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सेबी के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि ये बदलाव प्राथमिक बाजार को और बढ़ावा देंगे और बड़ी कंपनियों के माध्यम से नए शेयर लाएंगे। इन बदलावों को वित्त मंत्रालय की मंजूरी की आवश्यकता होगी क्योंकि इसके लिए प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) नियम में संशोधन की जरूरत है।

एंकर हिस्से के लिए, कुल आरक्षण को एक-तिहाई से बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया गया है। हालांकि, सेबी ने स्पष्ट किया कि इसमें से एक-तिहाई घरेलू म्युचुअल फंडों के लिए आरक्षित रहेगा जबकि बाकी जीवन बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों के लिए होगा। इसके अलावा सेबी ने 250 करोड़ रुपये से ज्यादा के आवंटन के लिए स्वीकार्य एंकर निवेशकों की संख्या बढ़ाने की भी मंजूरी दी। 

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First Published - September 12, 2025 | 10:37 PM IST

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