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रूस-यूक्रेन के बीच बातचीत की उम्मीद से तेल में गिरावट

Last Updated- December 11, 2022 | 8:45 PM IST

सोमवार को तेल कीमतों में करीब 5 प्रतिशत तक की कमी आई, क्योंकि निवेशकों में यूक्रेन और रूस द्वारा राजनयिक प्रयासों की उम्मीदों में तेजी देखी, जबकि चीन में कोविड-19 मामलों में तेजी से बाजारों में बदलाव देखने को मिला।  
ब्रेंट क्रूड 4.62 डॉलर या 4.1 प्रतिशत तक गिरकर 108.05 डॉलर प्रति बैरल पर रह गया और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल 5.45 डॉलर या 5 प्रतिशत गिरकर 103.88 डॉलर प्रति बैरल रह गया। दोनों अनुबंधों में यूक्रेन पर रूस द्वारा 24 फरवरी को किए गए हमले के बाद से तेजी आई है और इस साल अब तक इनमें करीब 40 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है। यूक्रेनियाई और रूसी वार्ताकार वीडियो लिंक के जरिये सोमवार को फिर से वार्ता को आगे आए। वार्ताकारों ने सप्ताहांतों की बातचीतों के बीच अपना उत्साह बढ़ाया है और सुझाव दिया है कि कुछ ही दिनों में सकारात्मक परिणाम सामने आ सकता है। यूबीएस के विश्लेषक जियोवानी स्टाउनोवो ने कहा, ‘यूक्रेन और रूस के बीच नई बातचीत के अलावा, मेरा मानना है कि चीन में ताजा लॉकडाउन भी कच्चे तेल में नरमी की नकारात्मक शुरुआत का कारण है। दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और अमेरिका के बाद सबसे बड़ा उपभोक्ता चीन कोविड-19 मामलों में बड़ी तेजी दर्ज कर रहा है, क्योंकि वहां ओमीक्रोन वैरिएंट शांघाई से शेंझेन तक कई शहरों में तेजी से फैल रहा है। उसके दैनिक मामले दो साल की ऊंचाई पर हैं और 13 मार्च को 1,437 नए कोरोनावायरस मामले दर्ज किए गए। इस सप्ताह, बाजार कारोबारी इस पर नजर रख रहे हैं कि रूसी तेल आयात की स्थिति कैसी रहेगी। इस महीने अब तक तेल प्रवाह प्रवाह नहीं हुआ था।’

आईओसी ने 30 लाख बैरल यूराल कच्चा तेल खरीदा
देश की प्रमुख रिफाइनर कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्प (आईओसी) ने मई डिलिवरी के लिए कारोबारी वाइटॉल से 30 लाख बैरल रूसी युराल की खरीदारी की। कारोबारी सूत्रों का कहना है कि 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूस द्वारा हमला किए जाने के बाद से इस ग्रेड में कंपनी की पहली खरीदारी ही है। रूस के खिलाफ पश्चिमी प्रतिबंधों से कई कंपनियों और देशों को अपना तेल बचाने, रूसी कच्चा तेल रिकॉर्ड निचले स्तरों पर पहुंचने को बढ़ावा मिला है।

First Published - March 14, 2022 | 11:32 PM IST

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