facebookmetapixel
Advertisement
SIF की रफ्तार तेज: जुलाई में AUM 30% बढ़कर ₹23,177 करोड़, फोलियो 1 लाख के करीबQ1 में टाटा मोटर्स पीवी का मुनाफा 80% घटा, JLR ने बिगाड़ा परफॉर्मेंस! शुक्रवार को स्टॉक पर रहेगी नजरAyushman Card: न अस्पताल के चक्कर, न लंबी लाइन! व्हाट्सऐप से ऐसे बनाएं कार्ड, जानें आवेदन का आसान तरीकाREITs vs FDs vs equities: टैक्स कटने के बाद किस निवेश में ज्यादा रिटर्न बचेगा?Trade Deficit: जुलाई में भारत का व्यापार घाटा 6 महीने के हाई पर, 31.98 अरब डॉलर पहुंचाआधार कार्ड से घर बैठे मिनटों में बनाएं अपना ई-पैन: जानें स्टेप-बाय-स्टेप पूरा ऑनलाइन प्रोसेससाइबर सुरक्षा पर साथ आए भारत-इजरायल, AI और रैंसमवेयर हमलों से निपटने के लिए बढ़ाएंगे सहयोगएयर इंडिया की सख्ती, हर पायलट को एक बार देना होगा साइकोएक्टिव पदार्थों का टेस्टभारत का कमोडिटी में बढ़ रह दबदबा! ग्लोबल इंटीग्रेशन की जरूरत; ईयरबुक भी हुई लॉन्चQ1 नतीजों से उछला टाटा ग्रुप का ये शेयर, पैसे लगाएं या नहीं? ब्रोकरेज को 47% तक तेजी की उम्मीद

NSE ने शेयर ट्रांसफर प्रक्रिया को आसान और तेज बनाया, अब एक हफ्ते में पूरा होगा काम

Advertisement

24 मार्च से आईएसआईएन कोड के सक्रिय होने के बाद शेयर हस्तांतरण में लगने वाला समय घटकर एक सप्ताह से भी कम होगा; तरलता और ट्रेडिंग वॉल्यूम में इजाफा संभव।

Last Updated- March 21, 2025 | 10:34 PM IST
NSE

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने अपने शेयरों के हस्तांतरण की प्रक्रिया आसान बनाई है, जिससे इसमें लगने वाला समय काफी घट जाएगा। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार पहले जिस काम में तीन से चार महीने लगते थे, वह अब एक सप्ताह से भी कम समय में पूरा हो सकता है।

24 मार्च से एनएसई पर आईएसआईएन (प्रतिभूतियों के व्यापार और निपटान के लिए एक विशेष वैश्विक कोड) के सक्रिय होने से यह प्रक्रिया तेज हो जाएगी। इस बदलाव से तरलता बढ़ने, ट्रेडिंग वॉल्यूम में इजाफा होने, लॉट आकार में कमी आने और गैर-सूचीबद्ध बाजार में एनएसई शेयरों में दिलचस्पी बढ़ने की संभावना है। एक्सचेंज के पहले से ही 20,000 से ज्यादा शेयरधारक हैं।

एनएसई ने कहा है, ‘एनएसई का आईएसआईएन सोमवार, 24 मार्च, से ऐक्टीवेट/अनफ्रोजन हो जाएगा। उस तारीख से एनएसई शेयरों को डिलीवरी इंस्ट्रक्शन स्लिप तंत्र के माध्यम से स्थानांतरित किया जा सकता है जिससे मौजूदा चरण 1 और चरण 2 प्रक्रियाएं समाप्त हो जाएंगी।’

इससे पहले, स्थानांतरण प्रक्रिया में दो चरण शामिल थे : चरण 1 में एक लंबी केवाईसी के सत्यापन की आवश्यकता थी, जिसमें ‘फिट ऐंड प्रॉपर’ एसेसमेंट और व्यक्तिगत तथा क्षेत्रीय होल्डिंग सीमाओं का अनुपालन शामिल था और इसमें अक्सर महीनों लग जाते थे।

Advertisement
First Published - March 21, 2025 | 10:34 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement