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बुच के खिलाफ कांग्रेस के आरोपों का महिंद्रा ने किया खंडन

कांग्रेस का आरोप है कि उनके पति धवल बुच को वाहन दिग्गज फर्म से 2019 से 2021 के बीच 4.78 करोड़ रुपये मिले जब सेबी ने एमऐंडएम के खिलाफ करीब चार आदेश जारी किए थे।

Last Updated- September 10, 2024 | 10:39 PM IST
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महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (M&M) ने मंगलवार को कांग्रेस के उन आरोपों का खंडन किया जिनमें कहा गया है कि नियामक से तरजीह पाने के लिए एमऐंडएम ने सेबी की चेयरपर्सन के पति धवल बुच को रकम का भुगतान किया।

मुख्य विपक्षी पार्टी ने आरोप लगाया है कि उनके पति धवल बुच को वाहन दिग्गज फर्म से 2019 से 2021 के बीच 4.78 करोड़ रुपये मिले जब सेबी ने एमऐंडएम के खिलाफ करीब चार आदेश जारी किए थे।

एमऐंडएम ने आरोपों को गलत व भ्रामक करार दिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि आपूर्ति शृंखला और सोर्सिंग में धवल के अनुभव का फायदा उठाने के लिए महिंद्रा समूह ने साल 2019 में उनकी सेवाएं ली थी जब वे यूनिलीवर के मुख्य खरीद अधिकारी (वैश्विक) से रिटायर हुए थे।

वाहन निर्माता ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि हम स्पष्ट कह रहे हैं कि हमने कभी भी सेबी से तरजीही व्यवहार का अनुरोध नहीं किया। हम कॉरपोरेट गवर्नेंस के सर्वोच्च मानक बनाए रखते हैं। धवल एमऐंडएम की सहायक ब्रिस्टलकोन के निदेशक मंडल में हैं।

एमऐंडएम ने कहा कि माधवी पुरी बुच के सेबी चेयरपर्सन बनने से करीब तीन साल पहले वह महिंद्रा समूह से जुड़े। उन्हें दी गई रकम विशेष रूप से आपूर्ति शृंखला व प्रबंधन में उनके अनुभव के लिए है।

समूह ने कहा कि कांग्रेस ने अपने आरोपों में जिन आदेशों या मंजूरी का जिक्र किया है वे प्रासंगिक नहीं हैं क्योंकि उनमें से तीन कंपनी या उसकी सहायकों से जुड़े हुए नहीं है। एक राइट्स इश्यू को फास्ट ट्रैक करने का है जिसके लिए सेबी की मंजूरी की दरकार नहीं होती। एक आदेश पर कांग्रेस ने हितों के टकराव का दावा किया है जो मार्च 2018 का है। लेकिन यह धवल के महिंद्रा समूह के साथ काम शुरू करने से पहले का मामला है।

विपक्षी पार्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि बुच की परामर्श फर्म अगोरा एडवाइजरी को एमऐंडएम, डॉ. रेड्डीज लैब, पिडिलाइट, आईसीआईसीआई समूह और दो अन्य संगठनों से रकम मिली जब माधवी पुरी बुच बाजार नियामक में पद पर थीं।

डॉ. रेड्डीज ने भी स्पष्ट किया है कि उसने धवल बुच की सेवाएं अक्टूबर 2020 से अप्रैल 2021 के बीच लीडरशिप कोचिंग के लिए ली थी। एक्सचेंज को भेजी सूचना में दवा कंपनी ने कहा कि धवल को दिए गए कुल 6.58 लाख रुपये अन्य कोच को पेशकश के मुताबिक थे।

पिडिलाइट ने भी आरोपों पर कहा है कि उसने अगोरा एडवाइजरी व धवल बुच की सेवाएं आपूर्ति शृंखला व खरीद के क्षेत्र में उनके अनुभव के आधार पर ली थीं। कंपनी ने कहा कि उसके खिलाफ कभी भी सेबी की तरफ से कोई जांच या मामला नहीं रहा है। अगोरा एडवाइजरी एक परामर्श फर्म है जिसका गठन माधवी और उनके पति धवल बुच ने किया है।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि यह मामला इरादतन छिपाने और हितों के टकराव का है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस हफ्ते और सूचनाएं जारी करेगी। खेड़ा ने दोहराया कि एडवाइजरी फर्म सक्रिय थी जबकि सेबी की चेयरपर्सन ने दावा किया था कि सेबी में उनके कार्यकाल के दौरान यह निष्क्रिय हो गई थी। कंपनी मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट में भी धवल को अगोरा एडवाइजरी का निदेशक बताया गया है।

इससे पहले खेड़ा ने वॉकहार्ट की सहायक फर्म से किराया आय लेना भ्रष्टाचार का मामला है। उन्होंने बुच पर आरोप लगाया कि वॉकहार्ट की सेबी जांच के समय कंपनी के साथ उनके वित्तीय संबंध बने रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यह हितों के टकराव का मामला है। वॉकहार्ट ने शुक्रवार को एक्सचेंज को बताया था, हम स्पष्ट रूप से इन आरोपों से इनकार करते हैं।

कांग्रेस पार्टी ने बुच पर अपने पूर्व नियोक्ता आईसीआईसीआई बैंक से मिले कथित भुगतान व ईसॉप्स पर सवाल उठाया है। बैंक ने इन आरोपों को ठुकराते हुए कहा है कि बुच को वेतन नहीं दिया गया और न ही ईसॉप्स, जब वह अक्टूबर 2013 में रिटायर हो गईं।

First Published - September 10, 2024 | 10:04 PM IST

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