Midcap Funds Outlook for 2026: कई साल तक शानदार रिटर्न देने के बाद 2025 में मिडकैप म्युचुअल फंड्स की रफ्तार धीमी पड़ गई। इस साल अब तक इन फंड्स का रिटर्न करीब 2.5 फीसदी रहा, जिससे वे लार्ज कैप फंड्स से काफी पीछे रह गए। इस कमजोर प्रदर्शन ने निवेशकों के धैर्य की परीक्षा ली है। अब 2026 की ओर देखते हुए निवेशकों के सामने दुविधा है। क्या मिडकैप फंड्स का यह कमजोर प्रदर्शन सिर्फ अस्थायी है, या फिर यह संकेत है कि निवेश घटाने और रिटर्न की उम्मीदों को दोबारा तय करने की जरूरत है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह हाई वैल्यूएशन और कमजोर आर्थिक माहौल रहा। साल की शुरुआत में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 43 गुना कमाई के वैल्यूएशन पर था, जबकि निफ्टी 50 करीब 21 गुना और स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 30 गुना पर था। इससे मिडकैप शेयरों में निराशा की गुंजाइश बहुत कम रह गई थी।
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अरुणएसेट इनवेस्टमेंट सर्विसेज के को-फाउंडर और पार्टनर अंकित पटेल के अनुसार, पहले मिडकैप शेयरों के ऊंचे दाम कमाई में तेज वृद्धि के कारण टिके हुए थे। लेकिन 2025 में प्रति शेयर कमाई (EPS) की वृद्धि घटकर सिंगल डिजिट में आ गई, जबकि पिछले तीन सालों में यह हाई-टीन से लो-20 फीसदी के बीच थी। इसके अलावा, सरकारी खर्च में सख्ती, कमजोर सरकारी निवेश और सुस्त नाममात्र जीडीपी वृद्धि ने मांग को प्रभावित किया। इस वजह से निवेशकों ने ज्यादा स्थिर कमाई और मजबूत बैलेंस शीट वाले लार्ज कैप शेयरों की ओर रुख किया।”
अगर कमाई में सुधार होता है और ब्याज दरें अनुकूल रहती हैं, तो 2026 में मिडकैप फंड्स की रिकवरी संभव है। चॉइस वेल्थ में रिसर्च और प्रोडक्ट हेड अक्षत गर्ग के अनुसार, “यदि महंगाई कम होती है, कर्ज लेने की लागत घटती है और मुनाफे के मार्जिन में सुधार आता है, तो मिडकैप फंड्स का प्रदर्शन बेहतर हो सकता है। फाइनैंशियल सर्विसेज, ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं। ग्रामीण मांग में सुधार से कंजप्शन से जुड़े शेयरों को भी सहारा मिल सकता है।”
वहीं, पटेल का मानना है कि अगर रिकवरी आती है तो वह वैल्यूएशन बढ़ने के बजाय कमाई के दम पर होगी। उन्होंने कहा, “निफ्टी मिडकैप का वैल्यूएशन घटकर करीब 33 गुना कमाई पर आ गया है, जो इसके पांच साल के औसत के आसपास है। इसके उलट, 2025 की शुरुआत में मिडकैप शेयर काफी महंगे थे। विकास को समर्थन देने वाली नीतियां और नाममात्र जीडीपी वृद्धि में संभावित तेजी मिडकैप कंपनियों की कमाई को आगे चलकर सहारा दे सकती है।”
2026 में प्रदर्शन काफी हद तक मांग में सुधार की रफ्तार पर निर्भर करेगा। पटेल के मुताबिक, अगर उपभोग और निवेश में तेजी नहीं आती है, तो कमाई की वृद्धि कमजोर रह सकती है। इसका असर मिडकैप कंपनियों पर ज्यादा पड़ सकता है, क्योंकि उनका ऑपरेटिंग लीवरेज ज्यादा होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ बाहरी जोखिम रिकवरी को सीमित कर सकते हैं।
इनमें अमेरिका की अर्थव्यवस्था में सुस्ती, वैश्विक व्यापार तनाव, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय हालात का सख्त होना, कच्चे माल की बढ़ती लागत, पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) में देरी और परियोजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियां शामिल हैं।
2025 के अंत में निफ्टी मिडकैप 150 करीब 33 गुना कमाई और 4.5 से 5 गुना बुक वैल्यू पर ट्रेड कर रहा है। इसमें डिविडेंड यील्ड 1 फीसदी से भी कम है, जो अब भी लार्ज कैप शेयरों से ज्यादा है। मैक्सिओम वेल्थ के फाउंडर और सीईओ राम मेदुरी के अनुसार, “पिछले एक साल में सिर्फ 5–6 फीसदी रिटर्न मिलने से यह साफ है कि कमाई की रफ्तार पहले हुए री-रेटिंग के मुकाबले पीछे रह गई है। 2026 में इंडेक्स स्तर पर रिटर्न से ज्यादा अहम होगा सही शेयरों का चयन, कंपनियों की मजबूत बैलेंस शीट और अच्छे मैनेजमेंट की पहचान करना।”
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मौजूदा हालात को देखते हुए फंड मैनेजर सलाह देते हैं कि कम जोखिम उठाने वाले निवेशक (conservative investors) अपने इक्विटी पोर्टफोलियो में मिडकैप फंड्स का हिस्सा 10–15 फीसदी तक ही रखें, और इसके साथ लार्ज कैप व डेट निवेश भी बनाए रखें।
मेदुरी के मुताबिक, मध्यम जोखिम लेने वाले निवेशक अपने इक्विटी पोर्टफोलियो का 20–25 फीसदी मिडकैप फंड्स में लगा सकते हैं। वहीं, ज्यादा जोखिम लेने वाले और 8 से 10 साल का लंबा निवेश नजरिया रखने वाले निवेशक अच्छे डायवर्सिफिकेशन के साथ अपने इक्विटी पोर्टफोलियो का करीब 30 फीसदी मिडकैप फंड्स में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं।
एक्सपर्ट्स 2026 में मिडकैप फंड्स को लेकर सतर्क लेकिन पॉजिटिव नजरिया रखते हैं और निवेशकों को रिटर्न की उम्मीदें सीमित रखने की सलाह देते हैं। गर्ग के अनुसार, “जैसे-जैसे कमाई स्थिर होती है और नीतिगत समर्थन बेहतर होता है, मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर प्राइसिंग पावर और स्थिर कैश फ्लो वाली क्वालिटी वाली कंपनियां सबसे ज्यादा फायदा उठा सकती हैं।”
उन्होंने कहा कि निवेशकों के लिए तेजी के पीछे भागने के बजाय डिसिप्लिन के साथ डायवर्सिफिकेशन या क्वालिटी-फोकस्ड फंड्स में निवेश करना अगले दो से तीन साल में स्थिर रिटर्न दे सकता है।
(लेखक दिल्ली स्थित एक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)